लखनऊ के बीकेटी का एक लाल भी था वायुसेना के क्रैश विमान में सवार

लखनऊ। भारतीय वायुसेना के लापता विमान एएन- 32 का मलबा देखे जाने के बाद सर्च ऑपरेशन और तेज हो गया है। वायुसेना की टीम ने एएन-32 के टुकड़ों को अरुणाचल प्रदेश के लिपो नाम की जगह से 16 किलोमीटर उत्तर में देखा है। भारतीय सेना के विंग कमांडर रत्नाकर सिंह ने जानकारी देते हुए कहा है कि क्रैश की साइट का पता चलने के बाद भारतीय वायुसेना, थल सेना और पर्वतारोहियों की एक टीम को इस जगह के पास एयरड्रॉप किया गया है। वायुसेना के लापता विमान का मलबा मिलने की खबर से उसमें सवार जवानों के परिजनों के मन मे आशंकाओं के ज्वार उबाल मार रहे हैं। बता दें कि एमआई-17एस और एएलएच विमान द्वारा 15 पर्वतारोहियों को सभी उपकरणों के साथ घटना स्थल पर भेजा गया है। जिसमें 9 भारतीय वायु सेना की पर्वतारोहण टीम, 4 आर्मी और 2 सिविल नागरिक शामिल हैं। कुछ दुर्घटना स्थल पर पहुंच गए और कुछ ट्रैकिंग कर रहे हैं।

यूपी की राजधानी लखनऊ के बख्शी का तालाब तहसील के नगर पंचायत भौली के रहने वाले पुताली पुत्र स्व. टिकाई भी उसी विमान में सवार था। वायु सेना के अधिकारियों ने परिजनों पर फोन पर घटना की जानकारी देने के साथ असम पहुँचने को कहा है। पुताली के बड़े भाई मुन्नीलाल ने बताया कि वह तीन भइयो में सबसे छोटा था। वह सन 2000 में वायुसेना में एन सी में कुक के पद पर सामिल हुआ था। उन्होंने विवाह नहीं किया था। पिछली बार 8 अप्रैल को छुट्टियों में घर आये थे। 2 मई को वापस लौट गये थे। जिसके बाद उनके विमान में होने और गायब होने की जनकारी मिली थी। बुधवार सुबह एयर फोर्स अधिकारियों ने फोन करके विमान का मलबा मिलने के साथ तलाशी की जानकारी दी है। उन्होंने असम पहुचाने को कहा तो घर वालों का रो-रोकर बुरा हाल है। लेकिन गरीबी और पढ़े लिखे न होने के कारण परिजन असम जाने में असमर्थ हैं। अधिकारियों से वहां पहुँचाने की गुहार लगा रहे हैं।

एएन-32 विमान ने सोमवार 3 जून को दोपहर 12:25 बजे असम के जोरहाट एयरबेस से उड़ान भरी थी। इस विमान का दोपहर 1 बजे के बाद से विमान से संपर्क टूट गया। वायुसेना ने इस विमान को खोजने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया। इस अभियान के लिए सुखोई 30 एयरक्राफ्ट और सी-130 स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट को लॉन्च किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने वायुसेना के उप प्रमुख राकेश सिंह भदौरिया से बातचीत की। काफी देर तक जानकारी न मिलने पर सर्च अभियान में थल सेना भी भी जुट गई।

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