धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया गया भगवान घनश्याम का जन्मोत्सव

गोंडा। भगवान घनश्याम महाराज की जन्म स्थली स्वामिनारायण मंदिर का 169 वां स्थापना दिवस तीन दिवसीय वार्षिक पाटोत्सव महोत्सव के दूसरे दिन विविध धार्मिक अनुष्ठान और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये गये। कथावाचक शास्त्री स्वामी भक्ति नंद दास जी महराज ने भगवान घनश्याम महराज के जन्म का सजीव वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जब जब पृथ्वी पर पाप बढ़ता है तो अपने भक्तों की रक्षा के लिए भगवान जरूर जन्म लेते हैं। राक्षसों का संहार करते है।

धूमधाम से मना जन्मोत्सव
तीन दिवसीय पाटोत्सव महोत्सव कथा में भगवान घनश्याम महराज का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया। भक्तों ने भव्य चांदी की पालकी पर भगवान का दिव्य श्रृंगार कर  वैदिक मंत्रोचार के साथ यजमान अमरसी भाई, डूंगरसी भाई निशर और मंदिर के महंत ब्रम्हचारी वासुदेवानंद जी महराज, कोठारी ब्रम्हचारी स्वामी हरि स्वरूपा नंद महराज और सरधार के सह यजमान शास्त्री स्वामी नित्यस्वरूप दास ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन कराया।

जल यात्रा और हुआ अभिषेक
पवित्र नारायण सरोवर से हरिभक्तों ने जल भर कर भगवान घनश्याम महराज का जलाभिषेक किया। मुख्य यजमान और महंत ब्रम्हचारी स्वामी वासुदेवानंद जी महराज, ब्रम्हचारी स्वामी हरिस्वरूपा नंद महाराज और सह यजमान सद गुरू शास्त्री नित्यस्वरूप दास जी महराज ने आरती करायी। स्वामी राम चन्द्र नंद जी महाराज, शास्त्री स्वामी पूर्णनंद जी महराज, स्वामी कृष्ण प्रियानंद जी महराज, शास्त्री स्वामी पवित्रता नंद महाराज, हरि कृष्णा नंद महाराज, स्वामी हरि दर्शन दास, अम्बालाल भाई,चिराग भाई,,रमण भगत, राजा भगत, माधवराम तिवारी, अयोध्या भाई, मुकेश भाई, अरविन्द ,नंदू भाई, कल्पेश भगत, अशोक मोदी, जयदीप भगत सहित अनेक हरिभक्त रहे।

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