अपोलो अस्पताल और एबॅट ने कार्डियक रजिस्‍ट्री बनाने के लिए की साझेदारी

मुंबई। अपोलो अस्पताल और एबॅट ने साझेदारी की है। दोनों मिलकर हार्ट से संबंधित बीमारियों को लेकर काम करेंगे।भारत में पहली बार कार्डियोवैस्‍क्‍युलर डिजीज के लिए प्रिवेंटिव केयर में सुधार करने के उद्देश्‍य के साथ, अपोलो हॉस्पिटल्‍स और एबॅट कार्डियक रजिस्‍ट्री बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

कार्डियो वैस्‍क्‍युलर डिजीज (सीवीडी) भारत में मॉर्टेलिटी का सबसे बड़ा कारण है और लगभग 25 प्रतिशत मॉर्टेलिटीज सीवीडी के कारण 25 से 69 साल के आयु समूह में होती है। इस स्थिति ने यूरोपीयन की तुलना में लगभग एक दशक पहले भारतीयों को प्रभावित करना आरंभ किया है। रजिस्‍ट्री के हिस्‍से के तौर पर, दोनों संगठन देशभर में अपोलो हॉस्पिटल्‍स जाने वाले मरीजों के हार्ट हेल्‍थ डेटा को एकत्रित करेंगे। इसमें एबॅट के हाई सेंसेटिव ट्रॉपोनिन-1 ब्‍लड टेस्‍ट द्वारा मापा गया ट्रॉपोनिन का स्‍तर भी शामिल है। कार्डियक रजिस्‍ट्री के हिस्‍से के तौर पर एकत्रित डेटा से शोधकर्ताओं को यह बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी हार्ट डिजीज किस तरह भारतीयों को प्रभावित कर रही हैं, साथ ही कार्डियक रिस्‍क में पैटर्न्‍स का भी पता चल सकता है जोकि सीवीडी को रोकने में मदद करते हैं। फिजिशियंस एवं मरीजों को उनकी स्थिति को ज्‍यादा दक्षता से मैनेज करने में सक्षम बनाते हैं। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, अमेरिका में कार्डियक रजिस्‍ट्रीज की स्‍थापना से अस्‍पतालों एवं डॉक्‍टरों को मरीजों को मुहैया कराई जानेवाली केयर की गुणवत्‍ता सुधारने में मदद मिली है। भारत में नेशनल कार्डियक रजिस्‍ट्री की स्‍थापना करने से आनेवाले वर्षों में असंख्‍य जिंदगियों को बचाने में मदद मिलेगी।

अपोलो हॉस्पिटल्‍स की संयुक्त प्रबंध निदेशक डॉ संगीता रेड्डी के मुताबिक पिछले दशक से डेटा दुनिया भर में केयर का मानदंड सुधारने में मुख्‍य भूमिका निभा रहा है। भारत में नेशनल कार्डियक रजिस्‍ट्री स्‍थापित कर, हमारा उद्देश्‍य बहुमूल्‍य डेटा को एकत्र करना है जोकि हमें कार्डियक केयर सुधारने और कई जिंदगियां बचाने में सक्षम बनाएगा
अपोलो हॉस्टिपल्‍स ने हैदराबाद, बेंगलुरू, मुंबई, दिल्‍ली, चेन्‍नई और कोलकाता में पिछले साल पायलट टेस्‍ट किए थे ताकि इसके कर्मचारियों को उनमें हार्ट डिजीज होने के खतरे को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिल सके। अपोलो के 16 हजार से ज्‍यादा कर्मचारियों की जांच की गई और एकत्र किया गया डेटा रजिस्‍ट्री में जोड़ा जा चुका है।

एगिम बे‍शिरी, एमडी, सीनियर मेडिकल डायरेक्‍टर, ग्‍लोबल मेडिकल एवं साइंटिफिक अफेयर्स, एबॅट डायग्‍नोस्टिक्‍स बिजनेस के डायरेक्टर एगिम बेशिरी के अनुसार जीवन को बदलने वाली इस तकनीक में इस बात को बदलने का सामर्थ्‍य है कि डॉक्‍टर्स कैसे उन लोगों की पहचान करते हैं, जिनमें हार्ट डिजीज होने का खतरा है। हमें पता है कि सभी मरीज हार्ट डिजीज के लिए उच्‍च जोखिम पर एक व्‍यक्ति की सामान्‍य प्रोफाइल में फिट नहीं बैठते। अब हमारे पास एकसरल व सुलभ ब्‍लड टेस्‍ट है जोकि विशिष्‍ट रूप से हार्ट के लिए है, महिलाओं के लिए संवेदनशील है और विभिन्‍न आयु समूहों में काम करता है ताकि भारत में हार्ट डिजीज की शुरुआती जांच की जा सके।

ट्रॉपोनिन ब्‍लड टेस्‍ट का उपयोग इमरजेंसी रूम्‍स में किया जाता है ताकि हार्ट अटैक की पहचान करने में मदद मिल सके। लेकिन अब शोध में पता चला है कि इसका उपयोग प्रिवेंटिव सेटिंग में इस्‍तेमाल किया जा सकता है। जब मौजूदा कार्डियक रिस्‍क स्‍कोरिंग सिस्‍टम में जोड़ा जाता है, जैसेकि फ्रैमिंघम रिस्‍क स्‍कोर, एबॅट का टेस्‍ट उस व्‍यक्ति में काफी सालों पहले कार्डियक घटना होने के अवसर का ज्‍यादा सटीकता से पता चल सकता है। जिनमें कार्डियक रोगों के कोई स्‍पष्‍ट लक्षण नजर नहीं आते हैं।

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