शराब बरामद पर शपथ -पत्र देने का फ़रमान के बाद बग़ावत की राह बिहार पुलिस !

 पुलिस संघ पर से लोगों का भरोसा उठा, कहां -निजी स्वार्थ के लिए सिर्फ एसोसिएशन

>> सरकार का आदेश हैं ,पहले भी दिये गये है शपथ पत्र – मृत्युंजय कुमार

>> बगावती तेवर के बाद पुलिस  मुख्यालय ने पूर्व में वापस लिया था आदेश

>> चार साल में शराबबंदी को लेकर कई बार बदले गये नियम-कानून ,सख्त के साथ सफल बनाने की कोशिश ,और होम डिलीवरी का आरोप

निक्की कुमारी  / रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । अपराधों की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने चार दिन पूर्व शराबबंदी पर एक और सख्त आदेश दिया हैं की थानाध्यक्षों को यह शपथ पत्र देना होगा की उनके क्षेत्र में शराब बिक्री नहीं होती हैं ,शराब बरामद होगी तो गुनाहगार होंगे । ऐसे थानाध्यक्षों को 10 वर्षों तक थानाध्यक्ष की कुर्सी नहीं मिलेगी और अनुशासनिक कार्रवाई की जायेगी । इसके आलोक में पुलिस मुख्यालय ने सभी थानाध्यक्षों को शपथ -पत्र देने का आदेश दिया हैं । इसके बाद सभी थानाध्यक्षों का बीपी बढ़ गया हैं ।कई थानाध्यक्षों ने  सरकार के इस आदेश को तुगलकी फरमान बताया हैं ,और अंदर ही अंदर बगावत की आग सुलग रही हैं । कई परेशानियां बताकर थानाध्यक्ष इस्तीफा देने का विचार कर लिये हैं लेकिन यह शपथ -पत्र देने को कतई तैयार नहीं हैं की उनके क्षेत्र में शराब बिक्री /बरामद नहीं होगी ।  मालूम हो की बिहार के सभी सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को शराब सेवन नहीं करने का शपथ -पत्र लिया गया हैं ।

पुलिस एसोसिएशन पर से भरोसा उठा ,बताया निजी स्वार्थ के लिए संघ

शराब बरामद नहीं होने का शपथ -पत्र देने का आदेश ,थानाध्यक्षों के लिए मुसीबत बन गयी हैं । बिहार पुलिस के इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर इसपर विरोध जताना चाहते हैं लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी बिहार पुलिस एसोसिएशन की कोई प्रतिक्रिया नहीं आने से भरोसा उठ गया हैं । नाम नहीं छापने के शर्त पर कई थानाध्यक्षों ने कहां की पुलिस एसोसिएशन ,पुलिस की सुरक्षा, सुविधाएं एवं सम्मान के लिए नहीं बल्कि निजी स्वार्थ के लिए हैं ।इससे बड़ी और समस्या क्या हो सकती हैं । राम राज की बात होती है उस समय शपथ -पत्र लेने का कोई जिक्र रामायण में नहीं हैं ।और यहाँ तो अपराध कोई करेंगा और सजा किसी और को ,यह कहां से उचित हैं ।

सरकार के साथ हैं ,पहले भी दिया गया हैं शपथ -पत्र-मृत्युंजय कुमार

पुलिस मुख्यालय ने तीन वर्ष पहले भी इस तरह का आदेश दिया था की शराब बरामद होने पर, थानाध्यक्ष दोषी होंगे और इसका शपथ -पत्र देने को कहां गया था। उक्त समय पुलिस मुख्यालय के आदेश पर तिखी प्रतिक्रिया हुई थीं । बिहार पुलिस एसोसिएशन खिलाफ में खड़ा हो गया था और कहां था की ऐसा नियम जिले के एसपी और डीएसपी पर भी लागू होना चाहिए । इसके बाद पुलिस मुख्यालय को आदेश वापस लेना पड़ा था। लेकिन इस बार की स्थिति कुछ ऐसी नहीं हैं । बिहार पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष मृत्युंजय कुमार ने कहां की सरकार के आदेश के साथ हैं ,पूर्व में भी शपथ -पत्र दिया गया हैं ।इससे स्पष्ट होता हैं की बिहार पुलिस एसोसिएशन ,सूबे के थानाध्यक्षों से अलग विचार रखती हैं ।

कई बार बदले गये कानून ,फिर भी शराब होम डिलीवरी का आरोप

बीते चार साल पूर्व ,1  अप्रैल 2016 से बिहार में शराबबंदी लागू हैं ।शराब के सेवन ,कारोबार को गैरकानूनी करार दिया गया हैं । शराबबंदी को सफल बनाने के लिए सख्त कानून बनाएं गये । सुप्रीम कोर्ट ,हाईकोर्ट और बुद्धिजीवी ,समाजिक संगठनों के प्रतिक्रिया के बाद शराबबंदी कानून में परिवर्तन किया गया । जैसे गैरजमानतीय ,गांवों पर सार्वजनिक जुर्माना आदी ।
बीते लोकसभा चुनाव में शराबबंदी को लेकर विपक्ष कड़ा रूख अपनाएं रखी । विपक्ष सवाल करता रहा की सूबे में शराबबंदी लागू हैं ,पुरे पुलिस सिस्टम को शराबबंदी लागू कराने में लगा दिया गया हैं ,फिर भी होम डिलीवरी हो रही हैं । लाखों लीटर शराब बरामद प्रतिमाह बरामद हो रहा हैं ,आखिर यह शराब आ कहां से रहा हैं ।
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