परिवहन मंत्री बोले… हादसे की वजह, चालक की ‘झपकी’

एक्सप्रेस-वे पर हुई बस दुर्घटना की आई जांच रिपोर्ट  

झपकी आने का क्या रहा साक्ष्य, जवाब देने में कन्नी काट गये मंत्री व अफसर

चालक की हो चुकी है मौत, कई सवाल अभी भी अनसुलझे

मंत्री का योगा टिप्स, रूट पर ड्राईवर ज्यादा खाना न खायें करें वज्रासन

लखनऊ। यमुना एक्सप्रेस-वे पर दो दिन पहले तड़के चार से पांच बजे के बीच यूपी रोडवेज की एसी जनरथ बस अनियंत्रित होते हुए 30 फुट गहरे नाले में जा गिरती है, जिसमें 29 बेकसूर यात्रियों की असमय मौत हो जाती है…आनन-फानन में उच्चस्तरीय जांच टीम बिठा दी जाती है और सीएम योगी 24 घंटे के अंदर हादसे की जांच रिपोर्ट तलब करने का आदेश दे देते हैं। खैर मामला सीएम के गंभीर संज्ञान का था, ऐसे में परिवहन मंत्री से लेकर शासन व यूपी रोडवेज मुख्यालय पर बैठे आला अफसरों पर भी तय समय में जांच रिपोर्ट प्रदेश वासियों के प्रकाश में लाने का दबाव था। और फिर बुधवार को योगी सरकार के परिवहन मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) स्वतंत्र देव सिंह मीडिया से रूबरू होते हुए यह बोले कि एक्सप्रेस-वे पर जो जनरथ बस हादसा हुआ, उसकी जांच रिपोर्ट के तहत दुर्घटना की वजह चालक को झपकी आना था। हालांकि जब उनसे पत्रकारों ने यह पूछा कि आखिर जांच रिपोर्ट में जो झपकी आना बताया जा रहा है, उसका कोई पुख्ता साक्ष्य है…इस पर टालमटोल वाला रवैया अपनाते हुए विभागीय मंत्री ने निगम के आला अफसरों को कुछ बिंदुओं पर निर्देशित किया और गंतव्य के लिए निकल लिये।

बहरहाल मंत्री और अफसरों ने भले ही जांच रिपोर्ट का खुलासा करते हुए अपने विभागीय कर्तव्यों की इतिश्री कर दी हो, मगर परिवहन निगम के जानकारों की मानें तो चालक की मौत के साथ ही कई सवाल उसके शव के साथ ही दफन हो गये। कहते-कहते मंत्री यह भी जिक्र करते चले कि रूट पर चलने वाले ड्राईवरों को ढाबे, होटल आदि पर अधिक खाना नहीं चाहिये जिससे उन्हें नींद या झपकी न आने पाये। हालांकि उन्होंने एक योगा टिप्स यह भी दिया कि अगर ड्राईवर पेट भर के खायें तो कम से कम 20 मिनट वज्रासन में जरूर बैठें। साथ ही यह भी कहा कि हाईवे पर खासकर तड़के तीन से छह बजे के बीच टीआई की रूटीन ड्यूटी लगायी जाये जिससे दुर्घटनाओं को जीरो तक किया जा सके।

दरअसल, बुधवार को परिवहन मंत्री ने न्यू हैदराबाद स्थित नियोजन विभाग के आॅडिटोरियम में विभागीय बैठक बुलाई थी जिसमें प्रमुख सचिव परिवहन से लेकर एमडी, एएमडी, सीजीएम, जीएम से लेकर आरएम और एआरएम अधिकारी मौजूद रहें। दिनभर चली मैराथन बैठक के बाद परिवहन मंत्री दोपहर करीब तीन बजे मीडिया के सामने आये। हैरानी की बात यह रही कि इतनी वीभत्स बस दुर्घटना होने के बाद विभागीय मंत्री सबसे पहले इस अति गंभीर मुद्दे पर कोई सफाई या हादसे के कारणों पर वार्ता करने के बजाये कुछ मंडलों में बीते दिनों हुई दुर्घटनाओं व मौत के आंकड़ों का तुलनात्मक विवरण देना शुरू कर दिये। साथ ही बेहतर और खराब परफार्मेंस वाले टॉप 10 और बॉटम 10 डिपो की रैंकिंग बताने लगे। इसी क्रम में मंत्री ने यह भी निर्देशित किया कि टेनिंग व हेल्थ कैम्प लगाये जायें और कानपुर सेंटर पर चालकों को प्रशिक्षण दिया जाये।

ड्राईवर-कंडक्टर से पूछते तो मिलता सही फीडबैक

लखनऊ। परिवहन मंत्री की मानें तो जांच रिपोर्ट में यही सामने आया है कि यमुना एक्सप्रेस वे पर घटित जनरथ बस हादसे की वजह ड्राईवर को झपकी आना रहा। यानी सबसे बड़ी चूक चालक से हुई, मगर किन परिस्थितियों में उक्त चालक की पकड़ बस स्टैयरिंग पर ढीली पड़ गई जिससे ऐसा भीषण हादसा हो गया इस पर मंथन के लिए न तो मंत्री और न ही रोडवेज अफसरों की भारी-भरकम टीम संजीदा नजर आयी। बस दुर्घटनाओं पर प्र्रभावी रोकथाम व सुझावों के आदान-प्रदान के लिए बुलायी गई निगम की बैठक में विभागीय मंत्री, चेयरमैन, प्रमुख सचिव, एमडी, एएमडी, सीजीएम, जीएम, आरएम और एआरएम से लेकर सभी तो मौजूद रहें…केवल चालक-परिचालकों को ही दूर रखा गया था। जबकि परिवहन निगम के जानकारों की मानें तो अगर सही में मंत्री को बस दुर्घटनाओं के पीछे की वजह जानने या उन तात्कालिक परिस्थितियों को समझने-बुझने की ललक रही होती तो कुछ ड्राईवर और कंडक्टर को खुले मंच पर बुलाकर उनका फीडबैक लेना चाहिये था।

परफेक्ट नहीं होती कोई व्यवस्था: प्रमुख सचिव

लखनऊ। मंत्री के सभागार से बाहर निकलते ही प्रमुख सचिव परिवहन आराधना शुक्ला कुछ देर के लिए मीडिया से रूबरू हुर्इं। इस दौरान जब उनके समक्ष यह रखा गया कि भले ही बीते दिनों ट्रांसफर पॉलिसी के तहत एआरएम का तबादला किया गया हो, मगर मुख्यालय के विभिन्न सेक्शन में एक से डेढ़ दशक पहले से अभी भी तैनात उन बाबुओं का स्थानांतरण क्यों नहीं हो पाया तो जवाब में प्रमुख सचिव ने यही कहा कि कुछ उदाहरण स्वरूप नाम तो बताइये। इसी क्रम में जब उनसे यह कहा गया कि आखिर किसी बडेÞ हादसे के बाद ही क्यों सड़क सुरक्षा और बस दुर्घटनाओं के बाबत अहम बैठकें की जाती हैं या फिर नये दिशानिर्देश जारी किये जाते हैं। इस पर प्रमुख सचिव कोई स्पष्ट उत्तर देने के बजाये यही कहने लगीं कि आज भी सड़क दुर्घटनाओं और उसमें होने वाली मौत के नेशनल फीगर को देखा जाये तो हमारे यूपी के आंकड़े काफी कम हैं। साथ ही हमारी रोडवेज बसें यूपी जैसे बड़ी आबादी वाले राज्य में संचालित हो रही हैं, ऐसे में कोई भी कार्य या व्यवस्था परफेक्ट नहीं हो सकती।

 

 

 

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