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‘एबीसी’ तकनीक से रुकेंगी बस दुर्घटनायें

एक्सप्रेस वे पर जनरथ बस हादसे के बाद मंथन में जुटा रोडवेज प्रबंधन

15 दिनों में चालक-परिचालक के लिए लागू होगी ‘ड्यूटी एलॉटमेंट साफ्टवेयर’ व्यवस्था

लखनऊ। यमुना एक्सप्रेस वे पर हाल-फिलहाल हुए भीषण जनरथ बस हादसे के बाद यूपी रोडवेज प्रबंधन बस दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए नये और अनुभवी प्रयोगों को इस्तेमाल करने में लगा हुआ है। इसी के तहत अब ‘एबीसी’ तकनीकी को लागू करते हुए बस दुर्घटनाओं पर ज्यादा से ज्यादा लगाम करने की रणनीति बनायी जा रही है। इस बाबत शुक्रवार को यूपी रोडवेज के एमडी धीरज साहू ने बताया कि अब सुरक्षित बस संचालन के मद्देनजर बस, ड्राईवर, कंडक्टर और रूटों को एबीसी कैटेगरी में बांटा जायेगा।

इसके कैटेगरी के कुछ मानक तय किये गये हैं और जिसके हिसाब से ही संबंधित रूटों पर चालक-परिचालक की ड्यूटी के अलावा आॅनरोड बस का संचालन शुरू किया जायेगा। साथ ही एमडी ने यह भी कहा कि आने वाले 15 दिनों में सभी डिपो में चालकों व परिचालकों की तैनाती ‘ड्यूटी एलॉटमेंट साफ्टवेयर’ के जरिये ही सुनिश्चित की जायेगी। इसके अलावा एमडी ने यह भी कहा कि 400 किमी से ऊपर की दूरी के लिए हर स्थिति में दो चालकों की ड्यूटी लगायी जायेगी जिसकी मॉनीटरिंग नियमित रूप से करायी जायेगी।

बताया गया कि एबीसी श्रेणी के तहत चार लाख किमी से कम संचालित बसों को रखा जायेगा। इन बसों पर अनुभवी चालक और परिचालकों को लगाया जायेगा और उनकी तैनाती करते समय उनके पुराने टैÑक रिकॉर्ड को भी खंगाला जायेगा। बी कैटेगरी में चार लाख किमी से अधिक चली बसों को रखा जायेगा। इसी प्रकार सी श्रेणी में उपनगरीय और लोकल रूटों पर चलने वाली बसों को रखा जायेगा। इसी कड़ी में एमडी ने यह भी जानकारी दी कि वृहद स्तर पर सभी डिपो और बस स्टेशनों पर खासकर चालक और परिचालकों के लिए नेत्र और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किया जायेगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इन मेडिकल परीक्षण में जो भी चालक अक्षम पाये जायेंगे, उन्हें किसी भी स्थिति में ड्यूटी पर नहीं भेजा जायेगा। इसी क्रम में शनिवार को कैसरबाग डिपो परिसर में एक नेत्र और स्वास्थ्य परीक्षण शिविर भी लगाया जायेगा। अवध डिपो की एआरएम अम्बरीन अख्तर ने बताया कि एक मेडिकल कैम्प में दोनों डिपो से जुड़े चालकों और परिचालकों का मेडिकल परीक्षण कराया जायेगा। साथ ही इस परीक्षण में दोनों डिपो के समस्त कर्मी भी भाग लेंगे।

पुराने सिस्टम को फिर शुरू करने की कवायद

गौर हो कि एमडी ने जिस ड्यूटी एलॉटमेंट साफ्टवेयर की व्यवस्था को शीघ्र लागू करने की बात कही है, वो सिस्टम काफी पहले से ही चल रहा था लेकिन संबंधित साफ्टवेयर में कुछ तकनीकी खामी आने के बाद इसे बंद कर दिया गया।
जबकि रोडवेज मुख्यालय से जुडे सूत्रों की मानें तो दरअसल, उक्त तकनीकी व्यवस्था के देखरेख का जिम्मा जिस अधिकारी को दिया गया था उनकी इस काम में न तो खास दिलचस्पी थी और न ही उन्हें इस नई तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ी कोई खास जानकारी थी। हालांकि उपरोक्त साफ्टवेयर को पहले फेज के तहत कुछ डिपो में लगाया गया तो परिणाम अच्छे मिलने लगे और चालक-परिचालकों की ड्यूटी में पारदर्शिता दिखने लगी। मगर कुछ समय बाद इस नयी व्यवस्था में कुछ तकनीकी दिक्कतें आने लगी तो संबंधित मुख्यालय अधिकारी न तो उस खामी को टेस कर पाये और न ही इस सिस्टम को संचालित कर रही कंपनी से कोई समन्वय स्थापित कर पायें। सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि अभी भी उक्त कंपनी का कई लाख रूपये रोडवेज के ऊपर बाकी है, जिसके चलते यह व्यवस्था चलते-चलते बाधित हो गई।

‘एबीसी कैटेगरी के तहत कुछ मानक हैं जिसके तहत बस, चालक, परिचालक और रूटों का चयन किया जायेगा। 400 किमी से ऊपर हर हाल में दो चालकों की ड्यूटी लगायी जायेगी। आरएम और एसएम की जवाबदेही भी तय होगी।’ -:धीरज साहू, एमडी (यूपी रोडवेज)

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