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मुद्रा लोन से परहेज नहीं, पर रिकवरी की हो मजबूत व्यवस्था

लखनऊ में मीडिया से मुखातिब होते हुए आॅल इंडिया बैंक आफिसर्स कन्फेडरेशन का कहना

बैंकों के विलय,बैंको के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अपना पक्ष रखा

सरकार जनता का ध्यान कापोर्रेट्स के एनपीए वसूली से हटाना चाहती है

लखनऊ। सरकार के मुद्रा लोन बैंकिंग ऋण नीति से कोई परहेज नहीं है। बस केवल ऐसी व्यवस्था होनी चाहिये कि ऋण की रिकवरी के लिए मजबूत तंत्र दिया जाना चाहिये। यह मुद्दा गुरूवार को राजधानी स्थित एसबीआई मुख्यालय पर आयोजित आॅल इंडिया बैंक आफिसर्स कन्फेडरेशन के संवाददाता सम्मेलन में उठी। बैंकों के राष्ट्रीयकरण के 50वें स्वर्णिम वर्ष पर बैंक अधिकारी संगठन आईबॉक उप्र इकाई ने बैंकों के विलय, वेतन समझौते मे देरी तथा एवं बैंको के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में अपना पक्ष रखा। आईबॉक के प्रदेश महासचिव दिलीप चाौहान ने बताया कि राष्ट्रीयकरण के बाद बैंकों ने देश की अर्थव्यवस्था को हर मुश्किल समय में सम्भाले रखा चाहे वह रोजगार सृजन की बात हो या 2008 की मंदी का समय हो लेकिन सरकार बैंकों को खत्म करने का का कुत्सित प्रयास कर रही है।

सरकार जनता का धन कोपोर्रेट्स के हाथों में सौंपकर सबका ध्यान कापोर्रेट्स के एनपीए वसूली से हटाना चाहती है। साथ ही यह भी कहा कि सभी बड़े बकायेदारों के नाम सार्वजनिक किये जाये जिससे कोई भी बैंक उन्हें नया ऋण न दे सके। इस दौरान पवन कुमार प्रदेश अध्यक्ष ने बताया कि सरकार कापोर्रेट सेक्टर से ऋण वसूली के स्थान पर उनको सरकारी संस्थान सौंपने की तैयारी में है। उप-महामंत्री सौरभ श्रीवास्तव ने कहा कि सरकारी बैंकों का कार्यक्षेत्र वृहद है इसलिये सरकार को इसके हितों का संरक्षण करना चाहिये। प्रदेश उपाध्यक्ष राम नाथ शुक्ला ने कहा कि पूरे विश्व में सबसे कम बेल आउट पैकेज पाने वाले भारतीय सरकारी बैंक ही भारतीय अर्थव्यवस्था के भविष्य के तारणहार हैं, सरकार को विलय के बजाय सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था को और मजबूत करने पर ध्यान देना चाहिये।

विनय श्रीवास्तव प्रदेश उपाध्यक्ष ने कहा कि सरकार का विलय और निजीकरण का एकतरफा प्रयास तथा बैंक, बीएसएनएल और तेल कंपनियों को बेचने का प्रयास भारत के संघीय अस्तित्व और समाजवाद पर सीधे चोट कर रहा है। संगठन के प्रदेश मीडिया संयोजक अनिल तिवारी ने बताया कि शुक्रवार 19 जुलाई को राष्ट्रीयकरण के स्वर्ण जयन्ती समारोह के उपलक्ष्य मे आइबोक सुबह 50 वृक्षारोपण के साथ स्वर्ण जयन्ती कार्यक्रम की शुरूआत करेगा। इसके अलावा दिन भर विभिन्न कार्यक्रम और नुक्कड़ नाटक द्वारा जनजागरण के बाद शाम को बजे ऊर्दू अकादमी गोमती नगर मे बैंक राष्ट्रीयकरण के 50 वर्ष पूरे होने पर राष्ट्रीयकृत बैंक विषयक संगोष्ठी आयोजित की जाएगी।

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