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बीजेपी की ‘गवर्नर पॉलीटिक्स’!

राज्यों के आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर शीर्ष नेतृत्व ने किया फेरबदल

यूपी और बिहार में खेला ओबीसी दांव

आनंदीबेन के सहारे यूपी पर फुल पॉलीटिकल कंट्रोल की मंशा

बंगाल के नये गवर्नर बनाये गये रमेश बैस के जरिये ममता सरकार पर रहेगी पैनी नजर

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता लालजी टंडन को बिहार का गवर्नर नियुक्त किये कुछ ही समय बीता था कि…उन्हें वहां से हटाकर मध्य प्रदेश के राज्यपाल की कमान सौंप दी गई। यूपी या यूं कहे कि सेंटर में भी यहां के किसी नेतागण से दूर-दूर तक किसी प्रकार का राजनयिक संबंध नहीं रखने वाली आनंदीबेन पटेल को मप्र से हटाकर अचानक उत्तर प्रदेश के गवर्नर की जिम्मेदारी दे गई। और फिर एक तरह से सक्रिय राजनीति से दूर होने की कगार पर पहुंचे चुके फागू चौहान को यकायक बिहार का राज्यपाल बना दिया। इससे ठीक पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र को हिमाचल प्रदेश का गवर्नर बनाकर भेजा गया। साथ ही पश्चिम बंगाल में भी पार्टी के सीनियर लीडर पंडित केशरीनाथ त्रिपाठी को हटाकर प्रख्यात अधिवक्ता रमेश बैस को वहां का नया गवर्नर बनाया गया। हालांकि यूपी के संदर्भ में एक बात और जुुड़ती दिखायी दे रही है कि…आनंदीबेन जोकि मोदी-शाह की काफी विश्वस्त हैं, आने वाले दिनों में उनके माध्यम से सूबे की कानून-व्यवस्था से लेकर अन्य राजनीतिक परिस्थितियों पर सीधे तौर पर शीर्ष नेतृत्व की दखलंदाजी रहेगी।

वहीं भाजपा के इस गवर्नर वाले पॉलीटिकल स्टैंड पर वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार प्रभातरंजन दीन का कहना है कि यूपी व बिहार के नये गवर्नर की नियुक्ति के मामले में बीजेपी ने ओबीसी को ही टारगेट किया है। उनका तो यह भी कहना है चंूकि बिहार में पिछडेÞ वर्ग की संख्या काफी अधिक है, ऐसे में फागू चौहान को नया गवर्नर बनाकर भाजपा इस अधिसंख्य वर्ग को भी साधेगी और साथ ही ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार और उनकी पार्टी जद यू को भी कहीं न कहीं गवर्न करती नजर आयेगी। देखा जाये तो बीजेपी की इस ‘गवर्नर पॉलीटिक्स’ के पीछे एक समानता यह दिख रही है कि पार्टी नेतृत्व ने जिन भी राज्यों के गवर्नर का फेरबदल किया है या फिर नई नियुक्ति की है…वहां एक-दो साल के अंदर विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन राज्यों में बिहार और यूपी भी शामिल है, जहां के लिए पार्टी का शीर्ष नेतृत्व कतई किसी प्रकार का राजनीतिक जोखिम नहीं लेना चाहता।

आगामी विधानसभा चुनावों की बात करें तो 2020 में बिहार, 2022 में यूपी और हिमाचल प्रदेश तथा 2021 में पश्चिम बंगाल में विधानसभा के चुनाव होने हैं। फिलहाल ओबीसी कार्ड का दांव खेलने में जुटी बीजेपी ने खासकर यूपी और बिहार के गवर्नर के मामले में इसी राह पर चलना कहीं अधिक मुनासिब और फायदेमंद समझा। तभी तो पहले यूपी बीजेपी की कमान सूबे के ओबीसी नेता स्वतंत्र देव सिंह को दिया और नये गवर्नर के तौर पर इसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाली आनंदीबेन पटेल को प्रदेश का नया गवर्नर बनाया। वहीं बिहार के लिए फागू चौहान जोकि ओबीसी श्रेणी से ही आते हैं, उनके नाम पर अंतिम मुहर लगायी। इसके अलावा पश्चिम बंगाल के वर्तमान राजनीतिक हालात पर गौर करें तो ममता बनर्जी की तमाम रूकावटों के बावजूद बीजेपी ने बीते लोकसभा चुनाव में किसी न किसी तरह अपनी ठीक-ठाक पैठ वहां पर बना ली है। ऐसे में दो साल बाद आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पार्टी ने केशरी नाथ त्रिपाठी जोकि बतौर गवर्नर वहां लम्बा समय बीता चुके, उन्हें हटाकर नये सिरे से अधिवक्ता समुदाय के तेजतर्रार नेता रमेश बैस को बंगाल के लिए अपना नया प्रतिनिधि चुना।

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