उत्तर प्रदेशलखनऊ

सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता ने शिया धर्म गुरू व अन्य  के खिलाफ दी तहरीर

लखनऊ । मॉब लिंचिंग की घटनाओं के विरोध में लखनऊ में समुदाय विशेष के लोगों को हथियार ट्रेनिंग देने के मामले में रविवार को चौक थाने में एफआईआर दर्ज करने के तहरीर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता सुबूही खान ने शिया धर्म गुरू मौलाना कल्बे जवाद और एडवोकेट महमूद प्राचा और टीले वाली फजले मस्जिद के मौलाना मन्नान के खिलाफ तहरीर दी है।
बता दें कि बीते शनिवार को इन लोगों ने राजधानी में एक प्रेसवार्ता कर समुदाय विशेष के लोगों के लिए कानूनी ट्रेनिंग और हथियार ट्रेनिंग कैंप लगाने की बात कही थी। प्रेस वार्ता में एडवोकेट महमूद प्राचा ने था कि जल्द ही बड़ा इमामबाबाड़ा में मौलाना कल्बे जवाद की सरपरस्ती में कैंप का आयोजन होगा। प्रेस वार्ता के बाद मीडिया सहित कई लोगों ऐसे कैंपों के आयोजन और हथियार ट्रेनिंग पर सवाल उठाए थे। शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी ने भी ऐसे कैंपों का विरोध किया है। मेरठ निवासी अधिवक्ता सुबूही खान ने आरोप लगाया कि मौलाना कल्बे जव्वाद, मौलाना फजले मन्नान और एडवोकेट ने प्रेस वार्ता में धर्म और जाति विशेष के लोगों को डराने वाल, धार्मिक उन्माद फैलाने वाली और लोगों को हिंसा के लिए प्रेरित करने वाली बातें कहीं। महमूद प्राचा ने वकील होते हुए भी कानून की गलत बयानी की। लोगों को हिंसा के लिए भड़काया। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि दोनों व्यक्तियों ने देश और सरकार के खिलाफ षड्यंत्र रचा है। यह लोग समुदाय विशेष, जाति और वर्ग के लोगों को डरा कर, उकसा कर और भय का माहौल बनाकर उन्हें अपने घर के जेवर बेचकर हथियार खरीदने को कह रहे हैं। इन लोगों ने 26 जुलाई को राजधानी में एक कानूनी ट्रेनिंग कैंप लगाने की बात कही है। जिसमें धर्म, जाति और वर्ग विशेष के लोगों को हथियार का लाइसेंस लेने की ट्रेनिंग दी जाएगी। अधिवक्ता ने कहा कि इन लोगों का यह कार्य अपराध की श्रेणी में आता है, जिससे धार्मिक उन्माद, हिंसा और आपसी नफरत का माहौल बनेगा। यह सरकार और देश के खिलाफ षड्यंत्र है। इसलिए इस मामले आरोपी लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। चैक पुलिस ने इस मामले में तहरीर पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। बता दें कि 20 जुलाई को प्रेस वार्ता के दौरान सोनभद्र हादसे की मिसाल देकर महमूद प्राचा ने कहा था कि अपराधियों के पास तो जुल्म करने के लिए कानूनी और गैरकानूनी हथियार मौजूद हैं, लेकिन मजलूमों के पास जुल्म से बचने के लिए अपनी और अपनी जान व माल की हिफाजत करने के लिए कुछ भी नहीं है। जबकि एससी/एसटी एक और दूसरे रूल्स के तहत यह सरकारों की जिम्मेदारी है कि एससी,एसटी वह दूसरे जरूरतमंदों को हथियार के लिए लाइसेंस मुहैया कराएं। महमूद प्राचा ने अखलाक से लेकर तबरेज और उसके बाद भी लगातार हो रही मॉब लिंचिंग की वारदातों का जिक्र करते हुए कहा कि सभी माइनारटीज के लोगों को हथियारों के लाइसेंस के लिए सरकार को दरखास्त देनी होगी, भले ही उन्हें अपने घर के जेवर और दूसरी कीमती चीजें बेंचनी पड़ें।
loading...
Loading...

Related Articles

WP Twitter Auto Publish Powered By : XYZScripts.com