बलरामपुर अस्पताल में तीमारदारों के लिए रूकने की व्यवस्था नही

लखनऊ। राजधानी के बलरामपुर अस्पताल में पुराना अस्थायी रैन बसेरा तोड़ दिया गया है।बारिश के दिनों में अस्थायी रैन बसेरे को तोड़ दिए जाने से तीमारदारों को अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस दौरान तीमारदारों का आरोप है कि बारिश में अस्पताल में ठहरने का कोई व्यावस्था नहीं है। वार्ड में मरीज के साथ रुकने नहीं दिया जाता है। और बाहर कोई भी सुविधा नही।

सांझा चूल्हा में खाना भी बनाते थे तीमारदार

यहां पर रोजाना लाखों की संख्या में मरीजों का इलाज होता है। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के लिए निदेशक कार्यालय के आगे न्यू बिल्डिंग के पास रैन बसेरा बना था। इसमें ही अस्पताल की ओर से सांझा चूल्हा भी बना था। जिसमें मरीज न्यूनतम शुल्क देकर तीमारदार खुद ही खाना भी बना लेते थे। एलपीजी गैस की आपूर्ति एक कंपनी करती थी। इससे मरीजों को घरेलू भोजन मिल जाता था।

तीमारदारों को रुकने के लिए भटकना पड़ रहा

अस्पताल में बने अस्थायी रैन बसेरे को बारिश में तोड़ दिए जाने से लोगों में नाराजगी है। यहां आने वाले तीमारदारों का कहना है कि बारिश के बाद रैन बसेरा तोड़कर बनाया जाता तो काफी सहूलियत रहती। अब तीमारदारों को रुकने के लिए भटकना पड़ रहा है। बलरामपुर में दूसरे जनपदों से भी मरीज अधिक संख्या में आते हैं। उन मरीज के साथ दो से तीन तीमारदार भी आते हैं। क्योंकि अस्पताल में भागदौड़ के लिए दो-तीन दिन लोगों की जरुरत होती है।

अस्थायी रैन बसेरा काफी खराब हो गया था। कई जगह से पानी भी टपकता था। तीमारदारों के लिए जल्द ही नया रैन बसेरा बनवाया जाएगा।जिसका उद्धाघाटन भी हो चुका है।

डॉ. राजीव लोचन, निदेशक, बलरामपुर अस्पताल

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