बिहार

रणवीर सेना में क़ुर्बानी से अत्यधिक अनंत , विवेका और सूरजभान के वर्चस्व में हुई विधवाएं !

 सूरजभान ने राजनीति का रूख किया तो अपराध से किया तौबा, अनंत और विवेका में आज भी जंग जारी

>> अनंत के तीन,  विवेका के दो परिवार की हत्या और हत्याएं का सिलसिला नहीं थमा

>> बाढ़ व मोकामा में जातिय संगठन नहीं गैंगवार रहा हावी ,सभी जाति गिरोह के बनें हिस्सा

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं  ) । देश के आजादी संग्राम में बाढ़ और मोकामा की भूमिका अहम रही हैं । उस समय यहां के नौजवानों के हाथों में तिरंगा और जुबान पर भारत माता के सिवा कुछ नहीं था। यहीं वह बलिदान था की सबसे अधिक स्वतंत्रता सेनानी बाढ़ और मोकामा के हुये । ऐसे वीर भूमि का इतिहास गौरवान्वित रहा हैं । आजादी बाद बाढ़ और मोकामा विकास की ओर अग्रसर बढ़ चला था ,रोजगार का बड़ा क्षेत्र नौजवानों के लिए भविष्य के लिए खुला अवसर रहा था। आपसी सामंजस्य और भाई चारा मिसाल थी। 90 की दशक में  काल की नियति ,बाढ़ और मोकामा में अलग प्रभाव दिखाने वाली थी। ऐसे तो पुरे दक्षिण बिहार को कालचक्र ने घिर लिया था। चारों तरफ नरसंहार और हत्याएं की दौर शुरू हो गयी थी ,तो वहीं बाढ़ और मोकामा में आपसी वर्चस्व को लेकर गैंगवार की पथ कथा लिख दी गयी थी जो आज भी निरंतर जारी हैं । नक्सली संगठन से लोहा लेने के लिए भूमिहार-ब्राह्मण ( सम्पूर्ण स्वर्ण ) ने रणवीर सेना संगठन बनाया ।प्रतिशोध में एक के बाद एक नरसंहार होने लगे ,इंसान किसी फसल की तरह काटे जाने लगे ,बिहार की भूमि रक्तरंजीत हो गयी । सबसे अधिक गया जिले के बारा में 35  लोग व  सेनानी में 34  लोग की हत्याएं हुई है । अपने  जाति – समाज को बचाने के लिए प्राणों की आहुति देने के लिए बढ़ चले और इसके नेतृत्वकर्ता बनें भोजपुर जिले के खोपिरा निवासी ब्रमेश्वर मुखिया । रणवीर सेना संगठन के नाम पर भूमिहार-ब्राह्मण ने सैकड़ों लोगों ने कुर्बानी से अत्यधिक पटना  जिले के उत्तरी भाग बाढ़ और मोकामा में अनंत सिंह ,विवेका पहलवान ,सूरजभान सिंह के बीच वर्चस्व की लड़ाई में विधवाएं हुई ।  कई मां की गोद सूनी हो गयी । सूरजभान सिंह ने अपराध से तौबा कर राजनीत की राह को पकड़ा तो वहीं बाढ़ के लदमा बाढ़ निवासी ,एक बुट के दो दाल – अनंत सिंह और विवेका पहलवान के बीच वर्चस्व की लड़ाई जो शुरू हुई वह आज भी निरंतर जारी हैं ।

एशिया में सबसे अधिक बाढ़ व मोकामा में विधवाएं

बाढ़ एवं मोकामा में वर्चस्व को लेकर सन् 1990 से जो गैंगवार शुरू हुआ वह आज भी जारी हैं । इस गैंगवार  के  तीन नेतृत्वकर्ता आज भी जिंदा हैं । अनंत सिंह ,विवेका पहलवान और सूरजभान सिंह ।  सूरजभान सिंह और अनंत सिंह ने अपराध जगत में सिर्फ नाम ही नहीं कमाया बल्कि राजनीति में भी सफल खिलाड़ी साबित हुये ।
सूरजभान सिंह विधायक बनें फिर सांसद । एक मामले में सजा मिलने के बाद पत्नी और भाई को भी सांसद बनाया । सूरजभान सिंह राजनीति से जुड़े रहने के साथ ही एक अच्छे बिजनेसमैन साबित हुये और अपराध से तौबा कर लिया । वहीं अनंत सिंह भी राजनीत में भाग्य अपनाया और सफलता पूर्वक तीन बार विधायक बनें । पत्नी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ी लेकिन ललन सिंह से हार गयी । अनंत सिंह का भी करोड़ों का बड़ा बिजनेस फैला हैं । लेकिन अपराध से नाता जुड़ा रहा । विधायक बनने के बाद भी आधा दर्जन हत्या करने /कराने का सीधे तौर पर आरोप लगा।  घर से एके 47 बरामद होने पर विधायक अनंत सिंह पर यूएपीए के तहत मामला दर्ज हुआ हैं । दिल्ली में सरेंडर के बाद बेऊर जेल भेज दिया गया हैं । विवेका पहलवान का अपराध नहीं बल्कि अनंत सिंह से सीधे वर्चस्व की लड़ाई हैं । विवेका पहलवान ने एक इंटरव्यू में कहां था की जब तक जिंदा रहेंगे ,अनंत सिंह से जंग जारी रहेगा ।
        बाढ़ एवं मोकामा में अनंत सिंह ,विवेका पहलवान ,सूरजभान सिंह के वर्चस्व की लड़ाई में करीब 300 हत्याएं हुई ।  200 से अधिक तो विधवाएं हुई  ,कई की तो शादी कर के आई और साल-दो साल में मांगे सूनी हो गयी । एशिया का सबसे अधिक विधवा बाढ़ और मोकामा में हैं और यह सिर्फ वर्चस्व की लड़ाई को लेकर हुई। इस वर्चस्व की लड़ाई में सूरजभान सिंह का परिवार सिर्फ सुरक्षित रहा । अनंत सिंह के दो भाई विरंची सिंह ,फाजो सिंह एवं बहनोई की हत्या हुई वहीं विवेका पहलवान के दो भाई की भी हत्या हुई ।
      बाढ़ व मोकामा में कोई जातिय संघर्ष की लड़ाई नहीं रही बल्कि वर्चस्व अनंत और विवेका के वर्चस्व की लड़ाई में सभी जाति के लोग शामिल हुये । सूजभान सिंह ने रंजीत सोनार को आगे बढ़ाया,  अनंत सिंह ने लल्लू मुखिया उर्फ लल्लू यादव को आगे बढ़ाया और अकुत सम्पत्ति का मालिक बना दिया । विवेका पहलवान का हाथ कुख्यात मनोहर यादव पर रहा ,बाद में मनोहर यादव गैंगवार में मारा गया । विधायक अनंत सिंह और विवेका पहलवान के वर्चस्व की लड़़ाई में आज भी सिर्फ स्वजातिय ही नहीं बल्कि सभी जाति के लोग हिस्सा हैं और जान गंवा रहे हैं ।
loading...
Loading...

Related Articles