सीएम को खून से पत्र लिख लगाई न्याय की गुहार!

उन्नाव भाजपा नेता के नवजात बच्चे की मौत का मामला, पत्नी हुई बदहवास

नवाबगंज पीएचसी के डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

आइजीआरएस पर की शिकायत तो सीएमओ ने बिठाई जांच
उन्नाव/लखनऊ। सूबे के मुखिया सीएम योगी प्रदेश के स्वास्थ्य महकमे की बिगड़ती सेहत को जितनी शिद्दत से दुरूस्त करने की कोशिशों में लगे हुए हैं, उतनी ही तेजी से इस प्रयास में पलीता लगाने के लिए कई सरकारी अस्पतालों में व्याप्त अनियमिततायें इस पर भारी पड़ रही हैं। यहां तक कि हाल-फिलहाल हुए मंत्रिमंडल बदलाव में स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा एक कद्दावर मंत्री हटाकर दूसरे को एलॉट कर दिया गया। बहरहाल, मामला राजधानी मुख्यालय से सटे उन्नाव जनपद का है जहां पर एक बीजेपी नेता की गर्भवती पत्नी को सामुदायिक अस्पताल में सही व समुचित इलाज नहीं मिला। पीड़ित नेता के अनुसार ये केवल चिकित्सकों की लापरवाही थी कि बच्चा जीवित नहीं रह सका जबकि पत्नी बदहवास होकर यहां-वहां भटक रही है।
जानकारी के अनुसार उन्नाव जनपद के मोहान विधानसभा क्षेत्र के नगर पंचायत न्योनतनी वार्ड गांधी नगर निवासी भाजपा ओबीसी मण्डल अध्यक्ष दुर्गेश राठौर ने सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज में तैनात डा. कंचन, डा. रूचि त्रिपाठी पर अपने नवजात बच्चे की मौत का गम्भीर आरोप लगाते हुए अपने खून से मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं इस जनपद में हुए इस गंभीर प्रकरण के मद्देनजर स्थानीय संवाददाता ने कई बार उन्नाव सांसद साक्षी महाराज के मोबाइल नंबर पर कॉल किया तो बात नहीं हो पाई।

नगर पचायंत न्योतनी वार्ड गांधी नगर निवासी भाजपा पदाधिकारी दुर्गेश राठौर के मुताबिक उनकी पत्नी नीलम राठौर गर्भवती थी। ऐसी अवस्था में वो अपनी पत्नी को लेकर मां के साथ नजदीकी सामुदयिक स्वास्थ्य केन्द्र नवाबगंज ले गये, जहां पर मौजूद डा. कंचन, डा. रूचि त्रिपाठी व सफाई कर्मी ने उनकी पत्नी को वार्ड में एडमिट कर बिना किसी प्राथमिक जांच के डिलेवरी कराने की कोशिश की। दुर्गेश ने उक्त चिकित्सकीय स्टाफ पर गम्भीर आरोप लगाते हुए बताया कि डा. कंचन और डा. त्रिपाठी ने डिलेवरी के पहले उसकी पत्नी को एक टेबलेट दिया जिससे उसकी पत्नी के पेट में तेजी से दर्द होने लगा। डाक्टरों ने सफाई कर्मी के साथ मिलकर जबरदस्ती डिलवरी करा दी जिसके चलते उनके पत्नी के साथ-साथ नवजात बच्चे की हालत बिगड़ गई। ऐसे में पत्नी व बच्चे की हालत बिगड़ते देख दुर्गेश ने डाक्टरों ने जच्चा-बच्चा को अन्यत्र रिफर करने की बात कही, मगर वहां पर तैनात स्टाफ ने किसी प्रकार की सहायता न करते हुए नीलम व उसके बच्चे को उनके हाल पर छोड़ दिया। इसके बाद दुर्गेश किसी तरह से प्राइवेट एम्बुलेंस द्वारा अपनी पत्नी व नवजात बच्चे को लेकर पीजीआई पहुंचे और गत 10 जून 2019 को दोनों को वहां पर भर्ती कराया।

उनके अनुसार पीजीआई में इलाज के छठें दिन नवजात बच्चे की मौत हो गई और ऐसी अवस्था में पत्नी नीलम की हालत भी और गंभीर होती चली गई। नवजात बच्चे की मौत से आहत उसकी पत्नी नीलम मानसिक तौर से अस्वस्थ होती चली गई और कई बार आत्महत्या करने का प्रयास भी कर चुकी है। दुर्गेश की मानें तो उन्होंने सीएम के आइजीआरएस पोर्टल पर पीएचसी डाक्टरों की लापरवाही की शिकायत मुख्यमंत्री से की है, जिसकी जांच डिप्टी सीएमओ जेआर सिंह कर रहे हैं। भाजपा नेता राठौर के अनुसार हर तरफ से निराश होने के बाद आखिकार उन्होंने बीते 23 अगस्त को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपने खून से एक पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई। पत्र के माध्यम से उन्होंने कहा कि जनपद के सीएमओ लालता प्रसाद ,डिप्टी सीएमओ जेआर सिंह समेत सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में तैनात डॉ. कंचन व डॉ. रूचि त्रिपाठी एकदूसरे से मिले हुए हंै और मामले को जैसे-तैसे करके रफा-दफा करने में लगे हुए हैं। पीड़ित भाजपा नेता दुर्गेश के मुताबिक अगर उसे और उसके परिवार को न्याय नहीं मिला तो पूरा परिवार आत्महत्या करने को मजबूर हो जायेगा।

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मुख्यमंत्री कार्यालय से जाचं मिली है, उसके मद्देनजर डिप्टी सीएमओ जेआर सिंह को जांच सौंप दी गइ है,अभी तक जांच रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट में किसी प्रकार से अगर कोई लापरवाही सामने आई या अनियमितता मिली तो सम्बन्धित के खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगाी-
डा.लालता प्रसाद, सीएमओ उन्नाव

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दुर्गेश राठौर बीजेपी संगठन में है, लेकिन अभी तक यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। और न ही राठौर मेरे पास कोई मदद के लिए आये। अब मैं इस प्रकरण की जानकारी लूंगा और उचित कार्यवाही होगी।
-: बृजेश रावत, भाजपा विधायक मोहन विधानसभा क्षेत्र

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