सुल्तानपुर

स्वरोजगार हेतु मशरूम उत्पादन पर परीक्षण सम्पन्न

जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि शिवकुमार सिंह ने वितरित किया सर्टिफिकेट

बल्दीराय,सुल्तानपुर -मशरूम का प्रयोग सब्‍जी के रूप में किया जाता है। इसे खुम्‍बी भी कहते है। इसकी कई प्रजातियाँ है ।अन्‍य खुम्बियों की तुलना में ढीगरी सरलता से उगाई जाने वाली प्रजाति है। ढींगरी खुम्‍बी खाने में स्‍वादिष्‍ट, सुगन्धि्त , मुलायम तथा पोषक तत्‍वों से भरपूर होती है। इसमें वसा तथा शर्करा कम होने के कारण यह मोटापे, मधुमेह तथा रक्‍तचाप से पीड़ित व्‍यक्तियों के लिए आर्दश आहार है,व्‍यवसायिक रूप से तीन प्रकार की खुम्‍बी उगाई जाती है। बटन खुम्‍बी, ढींगरी, खुम्‍बी तथा धानपुआल खुम्‍बी तीनों प्रकार की खुम्‍बी को किसी भी हवादार कमरे या सेड में आसानी से उगाया जा सकता है।ढींगरी खुम्‍बी की खेती मौसम के अनुसार अलग-अलग भागों मे की जाती है। आचार्य नरेन्द्र देव कृषि एवं प्रौधौगिक विश्व विधालय कुमारगंज अयोध्या द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केन्द्र द्वितीय बरासिन सुलतानपुर के तत्वधान मे मशरूम उत्पादन पर चार द्विवसीय व्यसायिक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि शिवकुमार सिंह प्रशिक्षण पाये सभी किसानों को सर्टिफिकेट वितरित किया ।केन्द्र के अध्यक्ष प्रो.रविप्रकाश मौर्य ने बताया कि शकाहारियो के लिए मशरुम बहुत उपयोगी है।इसमे प्रोटीन , वसा , रेशा ,कार्बोहाईडेट , खनीज लवण पाया जाता है। मशरूम उगाने की व्यहारिक ज्ञान देते हुए कहा कि ढींगरी मशरूम की फसल के लिए 20 से 28 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान की आवश्यकता होती है।धान की पु्वाल या गेहूँ के भूसे पर असानी सेउगाया जा सकता है। सामान्‍यत: 1.5 किलोग्राम सूखे भूसे या 6 किलोग्राम गीले भूसे से लगभग एक किलोग्राम ताजी मशरूम का उत्पादन होता है।के.वी.के अम्वेडकर नगर के मशरूम वैज्ञानिक डा. प्रदीप कुमार ने बटन मशरूम पर चर्चा करते हुए बताया कि इसके लिये कम्पोस्ट तैयार किया जाता है।जिसके लिये गेहूँ का भूसा,मुर्गी की खाद, चोकर ,यूरिया,सिगल सुपर फास्फेट, पोटाश, जिप्सम एवं नीम की खली की आवश्यकता होती है ।एक कुन्टल खाद मे 700 ग्राम स्पान (मशरूम बीज)लगता है। जिससे 15-20 किग्रा.मशरूम तैयार हो जाता है। अम्बेकर नगर के ही वरिष्ठ वैज्ञानिक डा.रामजीत ने मशरूम के उत्पाद एवं उसके बिक्रय पर चर्चा किया।केन्द्र के वैज्ञानिक डा.ए.के सिंह ने मशरूम उत्पादन घर पर चर्चा किया तथा बताया कि 25 वर्गमीटर के कच्चे मकान या झोपडी मे भी मशरूम उत्पादन किया जा सकता है.श्री गौरीशंकर उधान वैज्ञानिक ने सावधानियो पर प्रकाश डाला ।डा.मौर्य ने मशरूम मे लगने वालेे कीट वीमारियो से बचाने के उपाय बताया डा.रेखा ने मशरूम के विभिन व्यंजन जैसे सब्जी ,सुप, आचार आदि बनाने की विधियाँ बताई। प्रशिक्षण मे धनपतगंज,कुड़वार,बल्दीराय दूबेपुर भदैया ,कादीपुर ब्लाक के विभिन गावो के 43 कृषको ने भाग लिया। इस मौके पर सत्य प्रकाश श्रीवास्तव, सुधा सिंह,इम्तियाज अहमद,तफ़्सीर अहमद,मोनू तिवारी,मुन्ना यादव व इसराइल अहमद सहित कई लोग मौजूद रहे।

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