गवर्नर को त्याग पत्र स्वीकृति का पत्र भेजने वाले एआरटीओ का छलका दर्द’!

‘मैं जगत को जीत लेता यदि अपनों से पराजित न होता’!
लखनऊ, 9 सितंबर (तरुणमित्र)। ‘मैं जगत को जीत लेता यदि अपनों से पराजित न होता’…ये लिखित उद्गार परिवहन विभाग में कार्यरत एक सीनियर पीसीएस अफसर सुधेश तिवारी के हैं। इन पंक्तियों का जिक्र उन्होंने विगत आठ सितंबर को गवर्नर आनंदीबेन पटेल को प्रेषित अपने त्याग पत्र में किया है जिसमें उन्होंने अपनी खराब सेहत का हवाला देते हुए गवर्नर से त्याग पत्र स्वीकृति का अनुरोध किया है। पहले फर्रखाबाद में एआरटीओ प्रशासन के पद पर तैनात सुधेश तिवारी को दो दिन पहले ही वहां से हटाकर परिवहन आयुक्त कार्यायल से अटैच कर दिया गया। और फिर अटैच होने के एक दिन बाद ही उन्होंने अपने पद से त्याग पत्र देने का निर्णय ले लिया। वजह चाहे जो भी हो, मगर एक एआरटीओ प्रशासन के पद पर तैनात किसी अफसर ने पहली बार परिवहन विभाग के अब तक के कार्यकाल में इस तरह सार्वजनिक रूप से इस्तीफे की पेशकश की है। बहरहाल, श्री तिवारी के इस कदम को उठाने के बाद से ही परिवहन विभाग में मुख्यालय से लेकर संभागों में तैनात आरटीओ, एआरटीओ व पीटीओ अफसरों के बीच एक अजीबोगरीब बेचैन करने वाली परिस्थितियां उत्पन्न हो गई हैं। वहीं इस मुद्दे पर जब परिवहन मंत्री से लेकर प्रमुख सचिव परिवहन के मोबाइल नंबर पर कॉल किया तो उनसे संपर्क नहीं हो सका।
वैसे फर्रूखाबाद एआरटीओ कार्यालय हमेशा से ही वाद-विवाद के चलते सुर्खियों में रहा है। कुछ समय पहले ही अधिवक्ताओं के एक समूह ने वहां के पीटीओ से जमकर हाथापाई की थी। यही नहीं कुछ वकीलों ने सुधेश तिवारी एआरटीओ को भी ऐसे ही अपना निशाना बनाया था जैसे-तैसे करने उन्होंने अपना बचाव किया। वहीं विभागीय सूत्रों की मानें तो फर्रूखाबाद एआरटीओ कार्यालय के आसपास तमाम अनजान लोगों का आना-जाना बना रहता है और वो हर दिन डीएल से लेकर अन्य काम कराने को लेकर संबंधित प्रशासन पर अनावश्यक दबाव बनाते हैं। ऐसे में जो भी उनका विरोध करता है, तो उसे उपरोक्त तरीके से निशाना बनाया जाता है। एक समय तो यह स्थिति आ गई कि फर्रूखाबाद जाने को लेकर कोई भी एआरटीओ आगे नहीं आ रहा था। मगर फिर सुबोध तिवारी की तैनाती वहां हुई। विभागीय जानकारों की मानें तो उन्होंने वहां की कमान संभालते ही फर्रूखाबाद कार्यालय में फैली अनियमितताओं को एक-एक करके दूर करने की सफल कोशिश की। नतीजतन, अनजान लोगों का बेवजह वहां पर आना-जाना बंद सा हो गया और इसके बाद वहां पर दिन-ब-दिन अराजकता का माहौल कायम होता गया। वहीं हाल-फिलहाल जब स्वतंत्र देव सिंह के बाद योगी मंत्रिमंडल का पहला विस्तार हुआ तो पश्चिमी यूपी में बीजेपी संगठन पर पकड़ रखने वाले अशोक कटारिया को परिवहन विभाग का स्वतंत्र प्रभार दिया गया। कुछ ही दिन पहले उन्होंने रोडवेज मुख्यालय पर क्रमवार पहले निगम और फिर बाद में परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ मैराथन समीक्षा बैठक की। फिर इसके संभवत: एक दिन बाद ही परिवहन मंत्री के कहने पर सुबोध तिवारी को फर्रूखाबाद एआरटीओ प्रशासन के पद से हटाकर टीसी आॅफिस से अटैच कर दिया गया और यह मामला बीता ही था कि श्री तिवारी ने यकायक त्याग पत्र का लेटर जारी कर पूरे विभाग में सनसनी फैला दी। विभागीय सूत्रों का तो यह भी कहना है कि सुबोध तिवारी को फर्रूखाबाद से हटाने से पहले और यहां टीसी कार्यालय से अटैच करने के पूर्व न तो कोई सफाई और न ही कोई स्पष्टीकरण पेश करने तक का मौका दिया गया।

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