रामकृष्ण मठ: शिकागो धर्म सँसद की 125वीँ वर्षगांठ पर जुटी हस्तियों ने युवाओं को किया सम्बोधित

रामकृष्ण मिशन के विभिन्न मठो से आए स्वामी जी समेत मन्त्री महेन्द्र सिह, कुलपति मनोज दीक्षित व अरूणिमा सिन्हा ने युवाओं को स्वामी विवेकानन्द के पदचिन्हों पर चलने का किया आवाह्न।

रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने बताया कि साल भर मनाई जा रही शिकागो धर्म सँसद की 125वीं वर्षगांठ 2019 दिसम्बर तक चलेगी।

लखनऊ। शिकागो मेँ विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानन्द के संबोधन की 125 वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में रामकृष्ण मठ, लखनऊ ने 11 सितंबर 2019 को एक युवा सम्मेलन आयोजित किया। विभिन्न सत्रों में आयोजित कार्यक्रम के पहले सत्र में, कार्यक्रम सुबह 9:30 बजे पंजीकृत प्रतिनिधियों को दिशानिर्देश और ध्यान के साथ शुरू हुआ, जिसमें उपनिषदों से शांति मंत्र स्वामी विवेकानन्द द्वारा रचित स्वदेश मंत्र और अमृत मंत्र स्वस्वर में उच्चारित हुआ। निर्धारित कार्यक्रम का विस्तृत परिचय तथा निर्देशित ध्यान रामकृष्ण मठ लखनऊ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी द्वारा दिया गया। उद्बोधन कार्यक्रम का शुभारम्भ मठ के सन्यासीयों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू हुआ। स्वामी मुक्तिनाथानन्द ने अपने स्वागत भाषण में कहा कि शिकागो धर्म संसद में स्वामी जी के भाषण में पूरी दूनिया में भारत के प्रति धारणा बदलने को मजबूर कर दिया है। आवश्यकता है कि युवा पीढी स्वामी विवेकानन्द के विचारो को आत्मसात कर अपना भविष्य उज्जवल करते हुये राष्ट्र के साथ ही साथ विश्व जगत को भी आलोकित करे। इस अवसर पर स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी ने आये हुये अतिथियों को पौधें उपहार स्वरूप प्रदान करते हुये अंग वस्त्रम् व स्वामी विवेकानन्द की पुस्तक प्रदान किया।

युवा सम्मेलन को सम्बोधित करते हुये विशिष्ट अतिथि डॉ0 राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या, उत्तर प्रदेश के कुलपति प्रो0 मनोज दीक्षित ने कहा कि युवा पीढ़ी भारत के गौरवशाली अतीत को समझते हुये स्वामी विवेकानन्द के बताये मार्ग पर चले। स्वामी विवेकानन्द के विचार न केवल हमेशा प्रासंगिक है बल्कि हम सबका हमेशा मार्ग प्रशस्त करते रहेंगे।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, उत्तर प्रदेश सरकार के जल शक्ति विभाग के माननीय कैबिनेट मंत्री डॉ0 महेंद्र सिंह ने युवाओं को सम्बोधित करते हुये कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने भारत की सनातन संस्कृति को पुर्नजीवित किया। इसके पूर्व पूरे विश्व में भारतीय संस्कृति व भारतीयों को लोग हेय दृष्टि से देखते थे विश्व का मानना था कि भारत के लोग अनपढ़ व गवार है। किन्तु स्वामी विवेकानन्द ने शिकागो धर्म संसद में अपने ओजस्वी वाणी से भारत की गौरवशाली सस्कृति व सम्पूर्ण विश्व के उत्थान में भारतीयों के योगदान से अवगत कराया। स्वामी विवेकानन्द के ओजस्वी वाणी का ही असर रहा कि शिकागो धर्म संसद में आये सम्पूर्ण विश्व के लोगो के मन मे भारत के प्रति श्रद्धा की भावना जाग्रत हुई।

प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ और रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, लखनऊ के प्रबंध समिति के पूर्व सदस्य पद्मश्री डॉ0 मंसूर हसन ने धन्यवाद ज्ञापन दिया।

तीसरे परस्पर संवादात्मक सत्र में, उद्घाटन गीत अनिमेष मुखर्जी द्वारा प्रस्तुत किया गया और उसके बाद शिकागो भाषण की ऑडियो रिकॉर्डिंग की सुनाई गई।

स्वामी मुक्तिनाथानन्द जी महाराज ने अपने (विषय प्रवेश) मुख्य भाषण में कहा कि स्वामी विवेकानन्द के विचार व उनके संस्मरण सम्पूर्ण जगत को हमेशा आलोकित करते रहेंगे।

अद्वैत आश्रम, मायावती, उत्तराखंड के अध्यक्ष, स्वामी शुद्धिदानन्द जी ने “भारतीय युवाओं के प्रति स्वामी विवेकानन्द के सन्देश” पर एक प्रेरणादायक भाषण दिया। उन्होंने कहा कि भारत के युवाओं को स्वामी विवेकानन्द की शिक्षा को आत्मसात करते हुये जीवन का अन्तिम लक्ष्य को सामने रखते हुये निकटतम लक्ष्य तक पहुँचना होगा।

युवा सम्मेलन में प्रथम एवरेस्ट विजेता दिव्यांग महिला पद्मश्री डॉ0 अरूणिमा सिन्हा, लखनऊ ने “युवाओं के प्रेरणा के शाश्वत स्रोत-स्वामी विवेकानन्द” विषय पर एक ओजस्वी भाषण दिया। श्रीमती सिन्हा ने युवाओं को अपने सँघर्ष की बाते बताते हुए कहा कि जीवन में सँघर्ष करने से ही राह बनती है। उन्होंने बालिकाओं को प्रोत्साहित करते हुये कहा कि उनके जीवन में तमाम कठिनाईयाँ आयी जब उन्हें न केवल महिला होने के कारण कमजोर समझा गया बल्कि दिव्यांग होने के चलते लोग उन्हें हतोत्साहित किया करते थे। श्रीमती सिन्हा ने कहा कि लोगो के नकारात्मक विचार पर वह स्वामी विवेकानन्द की जीवनी को पढ़कर आगे बढ़ने की प्रेरणा लेती थी। युवाओं को सम्बोधित करते हुये उन्होंने सकल्प दिलाया कि प्रत्येक युवा स्वामी विवेकानन्द के विचारों को पढकर समाज व राष्ट्र को मजबूत करेगा।

रामकृष्ण मिशन सेवाश्रम, कनखल, उत्तराखंड के स्वामी निर्विकल्पानन्द ने “शिकागो धर्म महासम्मेलन में अध्यात्म व विज्ञान का समन्वय स्वामी विवेकानन्द द्वारा” पर चर्चा की। कार्यक्रम का संचालन विवेकानन्द युवा संघ, लखनऊ के संयोजक विवेक शर्मा ने किया। इस अवसर पर सुखद राम पाँडे, अमरीश मिश्रा, राहुल, सौरभ शुक्ला आदि मौजूद रहे।

सम्मेलन में शिकागो भाषण की प्रतिकृति का वीडियो शो भी प्रतिभागियों को दिखाया गया। इस अवसर पर दिन भर आयोजित होने कार्यक्रम का संक्षेप रामकृष्ण मठ, लखनऊ के स्वामी भक्तिसुद्धानन्द द्वारा किया गया। कार्यक्रम का समापन स्वस्वर में स्वामी विवेकानन्द कृत (मूर्त महेश्वर स्तोत्रम) के साथ हुआ, तदोपरान्त दोपहर के भोजन उपस्थित सभी भक्तगणों एवं युवा प्रतिभागियों को दिया गया।

संध्या आरती के बाद शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें लखनऊ के पंडित अशोक गोस्वामी ने मनमोहक वायलिन वादन प्रस्तुत किया उस दौरान तबले पर उनका संगत भातखंडे संगीत संस्थान, लखनऊ के श्री सारंग पाण्डेय ने दिया, उनकी जुगलबंदी में वहां उपस्थित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

युवा सम्मेलन में भाग लेने वाले लखनऊ एवं विभिन्न क्षेत्रों से आये लगभग 450 प्रतिभागी ने कार्यक्रम में भाग लिया।

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