बदलता भारत: आज दुनिया के 100 देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट निर्यात कर रहा है

नई दिल्ली: कुछ साल पहले भारतीय सेना के पास बुलेट प्रूफ जैकेट की कमी थी लेकिन अब हालात बिल्कुल बदल गए हैं। भारत अब न केवल वैश्विक मानकों के बुलेटप्रूफ जैकेट बना रहा है बल्कि विश्व के 100 से अधिक देशों को इसका निर्यात भी कर रहा है। मानक संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के मुताबिक अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के बाद भारत चौथा देश है, जो राष्ट्रीय मानकों पर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुलेटप्रूफ जैकेट बनाता है।

इन जैकेट्स की विशेषता है कि यह 360 डिग्री सुरक्षा, डायनैमिक वेट डिस्ट्रीब्यूशन जैसी विशेषता से लैस हैं। बीआईएस के उप निदेशक राजेश बजाज ने एक कार्यक्रम के दौरान बताया, ‘मैं समझता हूं कि बुलेटप्रूफ जैकेट भारत में न केवल तैयार और खरीदे जा रहे हैं बल्कि बीआईएस मानकों के अनुसार 100 अन्य देशों में भी बेचे जा रहे हैं।’

बीआईएस में वैज्ञानिक और बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने वाली राष्ट्रीय मानक के एक सदस्य जेके गुप्ता ने बताया, ‘भारत मानकों के अभाव में गुणवत्ता वाले बुलेटप्रूफ जैकेट की खरीद करने में सक्षम नहीं था। इसलिए, लंबे समय से इसकी मांग थी। सशस्त्र बल इस उत्पाद के लिए गुणवत्ता मानक निर्धारित करते हैं। दिसंबर 2018 में, बीआईएस ने प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग के निर्देश के बाद बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए एक राष्ट्रीय मानक तैयार किया।’

जेके गुप्ता ने आगे बताया, ‘बुलेटप्रूफ जैकेट पर मानक दिसंबर 2018 में लगाया किया गया था और अब हर कोई इसे लागू कर रहा है। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत, हमारे पास विश्व स्तरीय सुविधा और डिजाइन क्षमताएं हैं। हम यूरोप में 100 से भी अधिक देशों को इन जैकेटों का निर्यात कर रहे हैं।’

गुप्ता ने बताया कि दो सावर्जनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू) मेडानी और चेन्नई ऑर्डिनेंस फैक्ट्री तथा हरियाणा के पलवल स्थित एसएनपीपी, फरीदाबाद आधारित स्टारवायर, कानपुर की एमकेयू नामक तीन निजी उपक्रमों में इन जैकेटों का उत्पादन किया जा रहा है। अभी तक सैन्य बलों को लगभग 1.86 लाख जैकेट की आपूर्ति की जा चुकी है और आगे की आपूर्ति के लिए निविदा प्रक्रिया चल रही है।

गुरुवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, ‘ बुलेट प्रूफ जैकेट के लिए मानक वैश्विक मानदंडों से बेहतर है और भारत दुनिया में चौथा देश है जिसके पास अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन के बाद ऐसा मानक उपलब्ध है।’

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