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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान के दुष्प्रचार की एक और कोशिश नाकाम

नई दिल्ली। जिनेवा में चल रहे संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के वर्तमान सत्र में संकल्प पत्र पेश करने की समय सीमा खत्म हो गई। इसी के साथ पाकिस्तान द्वारा यूएनएचआरसी में कश्मीर मुद्दे पर समर्थन हासिल करने का दांव भी खत्म हो गया। पाकिस्तान भारत के खिलाफ कश्मीर मुद्दे पर कोई प्रस्ताव दाखिल नहीं कर सका। इसी के साथ पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर प्रस्ताव के लिए अन्य देशों का समर्थन हासिल करने में विफल हो गया।

कुमम मिनी देवी ने रखा भारत का पक्ष
यूएनएचआरसी में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव कुमम मिनी देवी ने कहा कि, जम्मू और कश्मीर में हमारा निर्णय हमारे संप्रभुता के अधिकार के भीतर आता है और यह भारत का आंतरिक मामला है। हमारे फैसले को गलत बताने की पाकिस्तान की कोई भी कोशिश अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाओं को छिपा नहीं सकती।

उन्होंने कहा कि, अगर मैं पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और उसके अधीन क्षेत्रों की बात करूं तो वहां पर नागरिकों के लापता होने के मामलों, हिरासत में बलात्कार, हत्याओं और नागरिक अधिकारों के लिए लड़ने वाले कार्यकर्ताओं और पत्रकारों की हत्या और अत्याचार के मामले सामान्य हैं। पाकिस्तान के अंतर्गत आने वाले राज्य गिलगित-बाल्टिस्तान में सरकार के उठने वाली आवाज को दबा दिया जाता है।

वहीं संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने भी बुधवार को कहा था कि कश्मीर मुद्दा सुलझाने के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता सबसे जरूरी चीज है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में गुतारेस ने कहा कि हमारी क्षमता मदद से संबंधित है और यह तभी लागू हो सकता है, जब संबंधित पक्ष इसे स्वीकार करें। उन्होंने कहा कि भारत का हमेशा से मानना है कि कश्मीर एक आंतरिक मामला है और मध्यस्थता के लिए तीसरे पक्ष की कोई जरूरत नहीं है, वह चाहे संयुक्त राष्ट्र हो या अमेरिका।

पाकिस्तान को पहले भी मुंह की खानी पड़ी थी
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में कश्मीर मुद्दे को कम से कम चार बार उठाने के अपने प्रयासों के बाद भी पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी थी, लेकिन पाकिस्तान जेनेवा में इस मुद्दे पर तत्काल बहस चाहता था।

जेनेवा और न्यूयॉर्क में स्थित राजनयिकों का कहना था कि, 47 सदस्यीय यूएनएचआरसी में चीन को छोड़कर अन्य देशों ने कश्मीर पर बहस की मांग नहीं की है, जबकि यूरोपीय देशों ने इस मुद्दे पर चुप्पी बनाए रखी।

पाकिस्तान ने ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन (ओआईसी) के कोऑर्डिनेकर के रूप में एक संयुक्त बयान जारी कर दावा किया था कि सभी 58 सदस्य इस्लामाबाद का समर्थन करते हैं और जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को रद्द करने पर नई दिल्ली के खिलाफ खड़े हैं। हालांकि इस संगठन के सदस्यों ने भारत को बताया कि निजी तौर पर उनका इस बयान से कोई लेना देना नहीं है।

पाकिस्तान ने यूएनएचआरसी में जम्मू-कश्मीर की परिस्थिति पर संयुक्त बयान जमा कराया था। हालांकि यह देश कौन हैं इसके बारे में उसने बताने से मना कर दिया था। यूएनएचआरसी में बयान देने के बाद पाकिस्तान के विदेश कार्यालय की वेबसाइट पर लिखा गया था कि उसके जम्मू-कश्मीर वाले बयान को इन देशों का समर्थन हासिल है, लेकिन उसने समर्थन करने वाले देशों की पहचान नहीं बताई है।

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