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अध्ययन में खुलासा, चुनाव के दौरान फर्जी कैंपेन का जरिया बना Whatsapp

व्हाट्सएप जहां एक तरफ डॉक्यूमेंटस, वीडियो और इमेज भेजने का सरल माध्यम हैं, वहीं दूसरी तरफ लोग व्हाट्सएप पर फैक न्यूज डालकर लोगों को भ्रमित करने का भी काम करे रहे हैं। मैसेजिंग प्लैटफॉर्म वॉट्सऐप की ओर से लगातार कोशिश की जा रही है कि प्लैटफॉर्म पर फेक न्यूज और झूठे मैसेजेस को फैलने से रोका जा सके, इसके बाजवूद सामने आया है कि ऐप पर ढेरों फेक कैंपेन भारत में चुनाव के दौरान चलाए गए। एक स्टडी में सामने आया है कि भारत और ब्राजील में चुनाव के दौरान व्हाट्सएप का इस्तेमाल चुनाव के दौरान ढेरों फेक मैसेजेस, अफवाहें और फर्जी कैंपेन फैलान के लिए किया गया।

 

फेडरल यूनिवर्सिटी ऑफ मीनास गिराइस ब्राजील और यूएस की मैसेचसिट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एमआईटी) के रिसर्चर्स का कहना है कि फेसबुक की ओनरशिप वाला ऐप प्लैटफॉर्म पर झूठी जानकारी फैलने से रोकने में पूरी तरह नाकाम रहा। स्टडी में रिसर्चर्स का मकसद यह पता लगाना था कि प्लैटफॉर्म पर फेक मेसेजेस और अफवाहें फैलने से रोकने की वॉट्सऐप की कोशिशें और इसके लिए उठाए गए कदम कितने कारगर हैं।

रिसर्च के दौरान चुनाव के दिन से 60 दिन पहले तक का और चुनाव के बाद 15 दिन तक का डेटा जुटाया गया। यह डेटा भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया से जुटाया गया, जहां चुनाव होने जा रहे थे। arXiv.org पर पब्लिश रिसर्च के मुताबिक, ‘हमारे रिजल्ट्स में सामने आया कि वॉट्सऐप की ओर से फेक न्यूज और अफवाहें रोकने के लिए की गईं मौजूदा कोशिशें काफी नहीं हैं। इनकी मदद से ऐसे मेसेज फैलने की रफ्तार जरूर कम होती है लेकिन उन्हें ब्लॉक नहीं किया जा सकता।

रिसर्चर्स ने कहा कि वॉट्सऐप पर पब्लिक ग्रुप्स में लिंक की मदद से नया मेंबर जुड़ सकता है लेकिन प्राइवेट ग्रुप्स में एडमिन ही मेंबर ऐड कर सकता है। ऐसे प्राइवेट ग्रुप्स में होने वाली बातों और इनमें आने वाले मेसेजेस को मॉनीटर करना आसान नहीं होता। रिसर्चर्स ने कई पब्लिक ग्रुप्स जॉइन किए और मेसेजेस को समझने की कोशिश की। स्टडी में सामने आया कि करीब 80 प्रतिशत फोटो फेक इन्फॉर्मेशन से जुड़े हुए शेयर किए गए। इसके अलावा फॉरवर्ड लिमिट के बावजूद कई मेसेजेस ढेरों लोगों तक कॉपी-पेस्ट कर शेयर किए गए।

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