मेडिकल लैब टेक्नीशियन का कोर्स करके आप पा सकते हैं अच्छी सेलरी के साथ बेहतर भविष्य

नई दिल्ली। लैब टेक्निशियन की जरूरत अस्पताल से लेकर क्लिनिक और लैब हर जगह देखी जा रही है, क्योंकि विभिन्न तरह की आधुनिक जांचों के जरिए इलाज करने वाले डॉक्टरों को रोग की सटीक पहचान करने के लिए उन्हें इनकी मदद चाहिए। इन लैब टेक्नीशियंस की जरूरत आजकल बड़े शहरों में ही नहीं, हर छोटे-मझोले शहरों में स्थित सभी मेडिकल लेबोरेटरीज में भी है…

आप आज किसी बीमारी के इलाज के लिए किसी भी हॉस्पिटल या क्लीनिक में चले जाइए। वहां उपचार से पहले डॉक्टर मर्ज की सही पहचान के लिए मरीज के ब्लड, यूरिन आदि की जांच के अलावा आवश्यकतानुसार एक्सरे, एमआरआइ आदि कराने के लिए कहते हैं। इससे डॉक्टरों को रोगियों का सही इलाज करने में आसानी होती है। यही कारण है कि लैब टेक्नीशियन का महत्व आजकल काफी बढ़ गया है। लैब टेक्नीशियंस द्वारा आधुनिक उपकरणों के जरिए किया गया टेस्ट बीमारी को पहचानने से लेकर उसके इलाज तक में सहायता पहुंचाता है। इसके लिए इन प्रोफेशनल्स को विभिन्न तरह के सैंपल्स की जांच करनी पड़ती है, जैसे कि बॉडी फ्लूड्स, टिश्यू, ब्लड टाइपिंग, माइक्रोऑर्गेनिज्म स्क्रीनिंग, केमिकल एनालिसिस, ह्यूमन बॉडी सेल काउंट टेस्ट इत्यादि। मेडिकल क्षेत्र में इन प्रशिक्षित टेक्नीशियंस को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट (एमएलटी) भी कहा जाता है।

जॉब्स की संभावनाएं

मेडिकल लैब टेक्नीशियन का कोर्स करने के बाद सरकारी और निजी अस्पताल, क्लीनिक, चिकित्सा रोग विज्ञान प्रयोगशालाओं, अनुसंधान प्रयोगशालाओं या ब्लड बैंक जैसे स्थानों पर जॉब्स मिल सकती है। दुनिया के अन्य देशों में भी ऐसे स्किल्ड प्रोफेशनल्स की काफी मांग है। कुछ वर्षों का अनुभव हो जाने पर बतौर रिसर्चर और कंसल्टेंट खुद का लैब भी खोल सकते हैं। दरअसल, अस्पतालों और प्रयोगशालाओं में जितनी अहम भूमिका एक डॉक्टर निभाते हैं, उसी तरह की भूमिका एक लैब टेक्नीशियन की भी होती है। वह डॉक्टरों के लिए एक सहायक हाथ होता है, जो किसी भी बीमारी के जांच के समय उनकी सहायता करते हैं। इसलिए एक अच्छे लैब टेक्नीशियन होने के लिए आपको इसके बारे में ज्ञान और जानकारी होना आवश्यक है।

आमतौर पर किसी भी लैब में एक लैब टेक्नीशियन का मुख्य कार्य नमूना लेने, परीक्षण, रिकॉर्ड रखना, निष्कर्ष प्रस्तुत करना और चिकित्सा जांच का दस्तावेजीकरण करने के अलावा प्रयोगशाला के उपकरणों की देखरेख और उसकी सफाई करनी होती है।

कोर्स एवं योग्यताएं

देश के कई संस्थानों में क्लीनिकल/मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन के लिए डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट के रूप में यह कोर्स संचालित हो रहे हैं। सर्टिफिकेट कोर्स 6 माह की अवधि का है, जिसे आप 10वीं के बाद कर सकते हैं, जबकि डिप्लोमा इन मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी जैसे कोर्स के लिए 12वीं पास होना जरूरी है। लेकिन यदि आप बीएससी इन एमएलटी का अंडरग्रेजुएट कोर्स करना चाहते हैं, तो इसके लिए 12वीं फिजिक्स, केमिस्ट्री व बायोलॉजी विषयों के साथ उत्तीर्ण होना आवश्यक है। यह तीन वर्ष की अवधि का कोर्स है। कोर्स के तहत युवाओं को बेसिक फिजियोलॉजी, बेसिक बायोकेमिस्ट्री ऐंड ब्लड बैंकिंग, एनाटोमी ऐंड फिजियोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, पैथोलॉजी, एनवॉयर्नमेंट ऐंड बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट व क्लीनिकल लैब टेक्नोलॉजी जैसे विभिन्न विषयों की जानकारी दी जाती है।

सैलरी

किसी भी लैब टेक्नीशियन को शुरुआत में 15 से 20 हजार रुपये की सैलरी आसानी से मिल जाती है। आमतौर पर ऐसे प्रोफेशनल इस पेशे में 1 लाख रुपये से लेकर 6 लाख रुपये तक वार्षिक पैकेज पाते हैं।

प्रमुख संस्थान

– ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स), नई दिल्ली

www.aiims.edu

– यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज ऐंड जीटीबी हॉस्पिटल, नई दिल्ली

www.ucms.ac.in

– गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

www.ipu.ac.in

’ दिल्ली पैरामेडिकल ऐंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट, नई दिल्ली

www.dpmiindia.com

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