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‘राजनीतिक गुरू’ के नामांकन में शामिल नहीं होने की रही चर्चा!

लखनऊ में राज्यसभा उपचुनाव में यूपी से घोषित भाजपा उम्मीदवार

सुधांशु त्रिवेदी ने दाखिल किया नामांकन

मुख्यमंत्री व डिप्टी सीएम रहें मौजूद, मनोज सिन्हा के नाम पर फिलहाल विराम

लखनऊ। प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार को राज्यसभा उप चुनाव में यूपी से भाजपा उम्मीदवार बनाये गये सुधांशु त्रिवेदी ने कुल तीन सेटों में अपना नामांकन दाखिल किया। एक सेट में 10 विधायकों ने प्रस्ताव किया। शुक्रवार को नामांकन का आखिरी दिन था। बता दें कि भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली के निधन के बाद रिक्त हुई इस सीट के लिए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी के नाम की घोषणा शीर्ष नेतृत्व ने एक दिन पहले ही किया। इस एक सीट पर हो रहे उप चुनाव में किसी अन्य दल के प्रत्याशी का नामांकन न होने से सुधांशु त्रिवेदी का राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होना लगभग निश्चित ही माना जा रहा है।
वहीं सुधांशु से पहले यूपी राज्यसभा उपचुनाव के लिये पूर्व रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के नाम की चर्चा तो लखनऊ से लेकर दिल्ली तक खूब हुई, मगर आखिरी बाजी त्रिवेदी के हाथ में लगी। गौर हो कि सिन्हा इस बार गाजीपुर से लोकसभा चुनाव हार गये थे और ऐसे में उनका किसी न किसी तरह राज्य सभा में जाना तकरीबन तय माना जा रहा था। यानि एक प्रकार से अब आने वाले कुछ दिनों के लिए मनोज सिन्हा के नाम पर फिलहाल विराम लगता दिख रहा है।

बहरहाल, नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अलावा डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा, राज्यसभा सदस्य डॉ. अशोक वाजपेयी सहित पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता व पदाधिकारी मौजूद रहें। लखनऊ के इंदिरानगर क्षेत्र निवासी सुधांशु ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में पीएचडी करने के बाद कई विश्वविद्यालयों में अध्यापन का कार्य किया है। यही नहीं सुधांशु को सबसे कम उम्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के सूचना सलाहकार होने का श्रेय भी प्राप्त है। साथ ही सुधांश लम्बे समय तक राजनाथ सिंह के सलाहकार के तौर पर जाने जाते रहें। पार्टी सूत्रों की मानें तो दरअसल, सुधांशु की ठीक-ठाक पकड़ ज्योतिष ज्ञान पर भी है और इसी के चलते वो राजनाथ सिंह के सम्पर्क में आयें। ऐसे मेें धीरे-धीरे करके राजनाथ के वरदहस्त और अपनी वाकपटुता व प्रभावपूर्ण भाषा शैली के दम पर सुधांशु लखनऊ की प्रादेशिक राजनीतिक से आगे निकलकर दिल्ली की केंद्रीय राजनीति का प्रमुख हिस्सा बन गये। हालांकि बीजेपी से लेकर अन्य विपक्षी दलों में इस बात की चर्चा जोर-शोर से रही कि आज जब सुधांशु त्रिवेदी का कैरियर सही मायने में एक ‘पॉलीटिकल लीडर’के रूप में आगे बढ़ने जा रहा है, तो ऐसे महत्वपूर्ण समय में एक तरह से उनके ‘राजनीतिक गुरू’ माने जाने वाले राजनाथ सिंह का उनके नामांकन के समय मौजूद न होना अपने आप में एक सोचनीय स्थिति है।

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