रामलीला देखने के लिए लोगों की हुजूम उमड़ी

रामलीला देखने के लिए लोगों की हुजूम उमड़ी आरा/जगदीशपुर(सूरज कुमार राठी)। आज के अत्याधुनिक युग में भी रामलीला के कद्रदानों की कमी नहीं हैं। पूरी तन्मयता से वे रामलीला देखते हैं और एक भी लीला देखना नहीं भूलते। रविवार को दूसरे दिन भी वीर कुंवर सिंह किला परिसर के रामलीला मैदान में रामलीला देखने के लिए लोगों की हुजूम उमड़ी थी। आयोजित रामलीला महोत्सव का उद्घाटन जगदीशपुर के दवा पंचायत की मुखिया सुषुमलता कुशवाहा ने दीप प्रज्वलित कर शुभारंभ किया। तत्पश्चात समिति के जवाहर शर्मा ने मुखिया को मोमेंटो देकर सम्मानित किया। जहां मुखिया ने समिति के सदस्यों का अभिवादन करते हुए कहा कि जगदीशपुर का रामलीला महोत्सव अपने आप में अनूठा है। यहां जो रामलीला होता है पूरे शाहाबाद में नाम तो है ही लेकिन बिहार में भी ऐसा रामलीला कम ही देखने को मिलता है। यहां के रामलीला की कई खासियत है। जो दूसरे जगह नहीं देखने को मिलता है। उन्होंने आगे बताया कि यहां का रामलीला महोत्सव का शोभा इसलिए और बढ़ जाता है जहां हिंदू मुस्लिम ईसाई आपस में मिलकर दृश्य का संचालन करते जो सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारा का अनूठा मिसाल है। उन्होंने खुशी इजहार करते हुए समिति के पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाते हुए कहा कि लगातार 37 वर्ष से रामलीला महोत्सव होते आ रहा है इसके लिए विशेषकर समिति के हर सदस्य धन्यवाद के पात्र हैं। इसके पश्चात दूसरे दिन का पात्र शुरू किया गया। जहां विश्वामित्र की यज्ञ रक्षा, पुष्प वाटिका, धनुष यज्ञ, केकई मंथरा संवाद, सरवन कुमार की माता पिता की भक्ति, केवट राम संवाद का दृश्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुति की गई। विश्वामित्र की भूमिका में मुकुल पांडे, राम की भूमिका में अंजनी कुमार, लक्ष्मण कन्हैया कुमार, माली अमन कुमार, सीता करण कुमार, जनक जगरनाथ केसरी, जनक की पत्नी सुनील यादव, सरवन सोनू कुमार दशरथ संजय भारती, केवट का रोल जवाहर शर्मा ने निभाया। सभी कलाकारों ने काफी बेजोड़ प्रस्तुति किया। विभिन्न प्रसंगों को देखकर दर्शक काफी भावविभोर हुए।दूसरे दिन आयोजित रामलीला मंचन में कैकई-दशरथ संवाद की प्रस्तुति विशेष रही सीता-राम संवाद के साथ मंचन का समापन हुआ और दर्शकों को राम के जीवन की कठिनाइयों को समझाने में पात्रों की भूमिका अहम रही।रामलीला मंचन की इसबीच धूम मची हुई है। कैकई-दशरथ संवाद की प्रस्तुति विशेष रही। अयोध्या में राम के राज्याभिषेक की तैयारियों के बीच कैकई के कोप भवन में चले गई। दशरथ रानी कैकई के पास जाकर उसे समझाते लगे। मंचन में कैकई मंथरा के संवादों ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस आयोजन को सफल बनाने में रामलीला समिति के हर कार्यकर्ता जी जान से लगे हुए।

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