उत्तर प्रदेशहापुड़

खूनी सड़कों ने ली अब तक 418 की जान, 619 सड़क दुर्घटना में 527 लोग घायल

विजय शर्मा
हापुड़ 9 अक्टूबर (तरुण मित्र) केंद्र और प्रदेश सरकार भले ही यातायात नियम पर सख्त कानून लाकर जनता को नियम कायदे बताने के लिए समय समय पर जागरूक करती रहे परंतु सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़े सरकार के बिल्कुल विपरीत है जो यह बताने को काफी है कि यह जनता है जो नियम और कानून तब तक नही मानती जब तक इसके पालन करने बाले ईमानदार न हो जिन्हें सड़कों पर देखा जा सकता है।

यदि यातायात के आकड़ो पर यकीन करें तो सन 2018 का आंकड़ा बताता है कि जनवरी से लेकर दिसंबर तक 369 सड़क दुर्घटनाएं घट चुकी है इनमें करीब 226 लोगों की मृत्यु हो गई है। और 221 लोग इन घटनाओं में अब तक घायल हो चुके हैं वहीं यातायात के सन 2019 के आंकड़े बताते हैं सितंबर तक करीब 250 सड़क दुर्घटनाएं घट चुकी है। इनमें 197 लोगो की मृत्यु हो चुकी है और करीब 221 लोग दुर्घटनाओं में घायल हो चुके हैं आंकड़ों से एक बात तो साफ हो जाती है कि सरकार भले ही कितने यातायात कानून बना ले परंतु इन कानूनों का जनता पर कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि कानून बनाने वाले ही इन कानूनों को तोड़ने के लिए वर्दी वालों पर दवा बनाते हैं इसलिए जब तक हमारा समाज जागरूक नहीं होगा तक तब तक सड़कों पर इस तरह की घटना घटित होती रहेंगी।इसलिए यातायात पुलिस को भी अपना कार्य ईमानदारी से करना चाहिए तभी हमारा देश और देश की जनता इन खूनी सड़कों से सुरक्षित रह सके।

जब इस मामले में जनपद के यातायात पुलिस अधिकारी अजयवीर सिंह से दुर्घटना रोके जाने के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि सरकार यातायात नियम के जितने भी कानून बनाती है वे जनता की भलाई के लिए बनाती है चाहे वाहन की ज्यादा स्पीड को लेकर हो, बिना हेलमेट,गाड़ी की सीट बेल्ट, इंडिकेटर, ओवरलोड वाहन, शराब पीकर वाहन चलाना, यह सारे नियम कानून सरकार ने जनता की भलाई के लिए बनाएं है। यदि जनता इन कानूनों का ईमानदारी से पालन करें तो होने वाली सड़क दुर्घटनाएं ना के समान रह जाएंगी। परंतु आज जनता कानून का पालन ना कर कर अपने जीवन से खिलवाड़ कर रही है जो कि शरारत सरासर गलत है।

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