रायबरेली

ग्रामीणों के श्रमदान व चंदे से हो रहा रास्ते का निर्माण

महराजगंज रायबरेली10अक्टूबर तरुणमित्र । क्षेत्र के अंतर्गत
जहां एक ओर देश के प्रधानमंत्री चाँद पर पहुंचने की बात कर रहे हैं वहीं सन्तोषपुर मजरे जनई गांव अपनी दुर्दशा से उबर नही पा रहा है। ग्राम प्रधान की कार्यशैली से आजिज ग्रामीणों ने गुरूवार को स्वयं के श्रम दान व पैसों से गांव को जाने वाले रास्ते का निर्माण कराना प्रारम्भ किया है। ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम प्रधान द्वारा गांव के विकास कार्यो में रूचि न लेने से गांव की हालत खस्ता है।


बताते चलें कि आजादी के 70 साल बाद भी सन्तोषपुर मजरे जनई गांव सड़क, नाली, खण्डंजा जैसी मूलभूत सुविधाओं से आज भी वंचित है। आलम यह है कि गांव को जाने वाला एक मात्र रास्ता भी कच्चा है जिसमें बरसात के दिनो में घुटनों तक पानी भर जाता है। यदि गांव में कोई बीमार पड़ जाये तो पहले उसे चारपाई में लादकर एक किलोमीटर पैदल ही सड़क तक लाना पड़ेगा। ग्रामीणों ने बताया कि रास्ते को लेकर खण्ड विकास अधिकारी से लेकर मुख्यमंत्री तक को पत्र भेजा गया परन्तु आज तक कोई भी कार्यवाही नही हो सकी। आखिर में ग्रामीणों ने स्वयं के संसाधनों से खडण्जा निर्माण करने की ठानी। गुरूवार को सभी ग्रामीणों ने मिलकर चन्दा लगाकर निर्माण सामग्री की व्यवस्था कर स्वयं के श्रमदान से ही खडण्जा निर्माण प्रारम्भ किया है। लोगों ने बताया कि ग्राम प्रधान मंजू सिंह व उनके प्रतिनिधि जीत बहादुर सिंह उर्फ बिल्ला के विकास कार्यों में रूचि न लेने से ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान को बर्खास्त कर खण्ड विकास द्वारा ग्राम पंचायत को संचालित कराये जाने तक की मांग की है। मामले में खण्ड विकास अधिकारी से जानकारी लेनी चाही परन्तु उनसे सम्पर्क नही हो सका।
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शौचालय व रास्ता न होने से नही हो रही युवाओं की शादी

शासन की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन के अन्तर्गत गांव के चन्द लोगों को ही शौचालय का लाभ मिल सका है अन्य आबादी आज भी खुले में शौच को मजबूर हैं। आलम यह है कि गांव को जाने के लिए रास्ता ना होने व शौचालयों की समुचित व्यवस्था न होने के चलते गांव के युवाओं की शादी होने में भी भारी समस्या है। गांव की ग्राम सभा सदस्य शिवदुलारी, रामहेत तथा हरिश्चन्द्र, विनीत आदि ने बताया कि शौचालय, नाली खडण्जा, व रास्ता न होने के चलते कोई भी रिश्तेदार गांव आने को तैयार नही है और गांव के युवाओं की शादी होने में भी यह समस्याएं बहुत बड़ी बाधा हैं।

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