बिहार

बालू टेंडर पर तत्काल रोक , एनजीटी में 21 अक्टूबर की सुनवाई बाद निर्णय

बिहार सरकार के बालू बंदोवस्ती नियमावली-2019 के अनुरूप संतुष्ट नहीं हैं एनजीटी

>> नदी को कई भाग में बांटने को लेकर दाखिल की गयी हैं आपत्ति

>> जनवरी 2020 में खनन विभाग को टेंडर करना अनिवार्य ,नहीं तो राजस्व की क्षति

>> नीलामी प्रक्रिया के दस्तावेज बिक्री आज से होने वाली थी शुरू 25 अक्टूबर को था टेंडर

रवीश कुमार मणि
पटना ( अ सं ) । बालू खनन पर एकाधिकार को समाप्त करने के लिए सरकार ने बालू खनन नियमावली-2019 तो लागू कर दिया लेकिन सवालों के घेरे में आ गया हैं । आगामी पंचांग वर्ष 2020 के लिए टेंडर होने के लिए आज से बिक्री पत्र होना था की अचानक विभाग ने बालू टेंडर पर रोक लगा दिया हैं । एनजीटी में आगामी 21 अक्टूबर के सुनवाई के बाद टेंडर पर निर्णय लिया जाएगा ।
   बिहार में अवैध बालू खनन का बड़ा कारोबार होता रहा है ,जिससे पर्यावरण के क्षति की लगातार शिकायतें होती रही है और मामला उजागर होता रहा हैं ।मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सख्त निर्देश के बाद खनन विभाग ने बालू बंदोवस्ती -2019 बनाई हैं और लागू भी कर दिया हैं । इसमें एकाधिकार समाप्त कर नदियों को यूनिट के तौर पर बांटा गया हैं और आगामी 2020 का टेंडर पंचांग वर्षों के लिए करना था।
टेंडर प्रक्रिया को जानने के लिए खनन विभाग ने पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया । आज से टेंडर का बिक्री -पत्र होना था की खनन विभाग ने ज्ञापांक-3495 दिनांक 11/10/19 जारी कर बालू खनन प्रक्रिया ,टेंडर पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दिया हैं । यह रोक एनजीटी में लंबित मामले का हवाला देकर किया गया हैं ।
विभागीय पत्र में यह बताया गया हैं की एनजीटी में आगामी 21 अक्टूबर की सुनवाई निर्धारित हैं । सुनवाई पूर्ण होने के बाद आगामी पंचांग वर्ष 2020 का टेंडर किया जाएगा ।मालूम हो की आगामी 25 अक्टूबर तक पटना ,भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, रोहतास, गया, जहानाबाद, जमुई, लखीसराय, भागलपुर, बांका जिले में बालू खनन का टेंडर करना निर्धारित किया गया था।
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