धर्म - अध्यात्म

क्यों तांडव करते हैं महादेव ये है शिव तांडव करने के पीछे छिपी की कहानी

कई लोगों को ये गलतफहमी होती है कि महादेव सिर्फ क्रोध में ही तांडव करते हैं। जब महादेव बेहद प्रसन्न होते हैं, तब भी वे तांडव करते हैं। आपको बता दें, खुशी में शिव आनंद तांडव करते है जिससे पूरा वातावरण मनमोहक हो जाता है। इसके अलावा, त्रिपुरा, संध्या, समारा, काली, उमा भी तांडव के प्रकार है जो महादेव द्वारा विभिन्न अवस्था में किए जाते हैं। तांडव के अंदर पूरी सृष्टि का सारांश समाया हुआ है। ये मृत्यु, जन्म, विनाश, रचना सभी को दर्शाता है।

एक बार माता सती भगवान शिव के साथ अपने पिता दक्ष द्वारा आयोजित हवन में हिस्सा लेने आई थीं। वहां भोलेनाथ का अपमान होता देख, माता सती ने अ’ग्नि में कूदकर आ’त्मदा’ह कर लिया। इस घटना से महादेव इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने रुद्र तांडव शुरू कर दिया। उस तांडव के चलते पूरी सृष्टि पर प्र’लय जैसी परिस्थिति उत्पन्न हो गई।

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वहीं दूसरी एक और कहानी प्रचलित है जिसमें कहा गया है कि-  एक बार रावण ने भगवान शिव से मिलने के लिए लंका से कैलाश की ओर रूख किया। वे पूरे रास्ते भोलेनाथ को याद करते रहे और उनके गुणगान गाते रहे। परंतु ये वो समय था जब महादेव अपने ध्यान में मग्न थे जिसके चलते उन्हें इस बात का अहसास ही नहीं हुआ कि उनका परमभक्त उनकी प्रतीक्षा कर रहा था। रावण इस बात से आहत हो गया और उसने पूरा कैलाश पर्वत अपने हाथों से उठा लिया।

इस हलचल के चलते महादेव का ध्यान भंग हो गया और उन्होंने क्रोध में आकर अपना पंजा कैलाश पर्वत के ऊपर रख दिया। अब रावण का हाथ उस पर्वत के नीचे दब गया और वो दर्द में तड़पने लगा। उसे उसकी गलती का अहसास हुआ और उसका घमंड टूट गया। अब भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए रावण ने शिव तांडव स्त्रोत गाना शुरू कर दिया। इस संगीत के माध्यम से महादेव की महानता का बखान किया गया है। अपने लिए इतना खूबसूरत संगीत सुन महादेव रावण से प्रसन्न हो गए और उन्होंने अपना पंजा पहाड़ के ऊपर से हटा लिया। इसलिए लंकेश रावण को शिव तांडव का रचयिता कहा जाता है।

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