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कमलेश तिवारी हत्याकांड: आरोपियों ने कबूला गुनाह, 15 बार चाकू से किया वार फिर चेहरे पर मारी गोली

हिंदू समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या के चार दिन बाद गुजरात एटीएस ने दोनों मुख्‍य आरोपियों को राजस्थान बॉर्डर के शामलजी से गिरफ्तार कर लिया। एटीएस और पुलिस की पूछताछ में दोनों हत्यारोपी शेख अशफाक हुसैन और पठान मोइनुद्दीन अहमद ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है।

इस बीच कमलेश तिवारी की अटॉप्सी रिपोर्ट से पता चला है कि हत्यारों ने वारदात के दौरान कम से कम 15 बार तिवारी पर चाकू से वार किया था। 18 अक्टूबर को लखनऊ में कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी। आरोपी मिठाई के एक डिब्बे में चाकू लेकर आए थे।

सीजेएम ने पहले तीनों की 14 दिन की न्यायिक हिरासत मंजूर की, फिर पुलिस की रिमांड अर्जी पर सुनवाई की। सीजेएम ने हत्या की साजिश रचने के इन आरोपियों की चार दिन की रिमांड स्वीकृत की है।

कमलेश तिवारी के शव की अटॉप्सी करने वाले किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों ने पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उनके सीने के बाईं तरफ चाकू के सात वार का जिक्र किया है। हमारे सहयोगी टाइम्स ऑफ इंडिया के पास मौजूद रिपोर्ट की कॉपी के मुताबिक चाकू के हमलों से कमलेश तिवारी के सीने में तीन से चार सेंटीमीटर का सुराख हो गया था। इसके साथ ही तिवारी के शव के परीक्षण के दौरान दो जगह चाकू से रेते जाने के निशान मिलने हैं। इनमें से एक निशान उनकी गर्दन को रेतने का है।

दिवंगत कमलेश तिवारी के शव के अन्य हिस्सों में बाकी घाव के निशान मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हत्यारों ने कम से कम एक बार गोली चलाई थी, क्योंकि तिवारी के मुंह के पास चेहरे के बाईं तरफ बुलेट इंजरी मिली है। यूपी पुलिस इस बात से हैरान है कि कमलेश तिवारी की पत्नी किरन और उनके अंगरक्षक पॉइंट-32 बोर पिस्टल से चली गोली की आवाज क्यों नहीं सुन पाए। वारदात के वक्त दोनों लोग घर के ग्राउंड फ्लोर पर ही थे।

पुलिस का कहना है कि अभी यह साफ नहीं है कि पिस्टल मिठाई के डिब्बे में थी या फिर इसे कहीं और छिपाया गया था। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘यह एक अवैध हथियार है। इसलिए ऐसा कहना मुश्किल है कि कैसे और किन हालात में हथियार कमलेश तिवारी के घर तक पहुंचा। यह अहम बिंदु अलग से जांच का विषय है कि हत्यारे अपने साथ पिस्टल लेकर आए थे या वह पहले से वहां मौजूद था।’

हत्या के पांचवें दिन मंगलवार को मुख्य आरोपियों अशफाक और मोइनुद्दीन पठान को गुजरात एटीएस ने गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अपना गुनाह कबूल लिया है। डीआईजी एटीएस गुजरात हिमांशु शुक्ला के निर्देशन में एसपी बीपी रोजिया, एसीपी बीएस चावड़ा और अन्य अधिकारियों ने कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाया।

पुलिस के शिकंजे में आया अशफाक सूरत के लिंबायत स्थित ग्रीन व्यू अपार्टमेंट का रहने वाला है, जबकि मोइनुद्दीन खुर्शीद पठान उमरवाड़ा स्थित लो कास्ट कॉलोनी, सूरत का रहने वाला है। बता दें कि अशफाक पेशे से मेडिकल रेप्रिजेंटटिव और मोइनुद्दीन फूड डिलिवरी बॉय का काम करता था। वारदात के बाद से दोनों लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे।

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