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‘मुख्यमंत्री योगी’ ने सरकारी अस्पतालों में दवाओं को लेकर सुनाया बड़ा फैसला

अस्पतालों में दवाओं व मेडिकल सामान की ‘‘लोकल परचेज व्यवस्था पर रोक लग जाएगी।

उत्तर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में आपूर्ति होने वाली दवाओं और मेडिकल सामान की खरीद अब यूपी मेडिकल सप्लाइज कारपोरेशन के जरिये होगी।

राज्य सरकार ने हाल ही में इसकी स्थापना का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य विभाग के इस आशय के प्रस्ताव को मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में मंजूरी दी है।

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राज्य सरकार के प्रवक्ता एवं वरिष्ठ मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने बताया कि वर्तमान में सरकारी अस्पतालों में दवाओं व मेडिकल उपकरणों की आपूर्ति के लिए दर अनुबंध केंन्द्रीयकृत रूप से केंन्द्रीय औषधि भण्डार (सीएमएसडी) के जरिये होती है।

इसमें दर अनुबन्धित औषधियों एवं उपकरणों के क्रय आदेश व भुगतान की कार्यवाही सम्बन्धित जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों/ मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों द्वारा की जाती है। मात्रा अनुबन्धित उपकरणों के क्रय आदेश सीएमएसडी द्वारा सीधे जारी किये जाते हैं।

औषधियों एवं उपकरणों के क्रय करने हेतु वर्तमान व्यवस्था में अत्यधिक समय लगता है, जिसकी वजह से नि:शुल्क औषधियां उपलब्ध कराने एवं चिकित्सालयों को उपकरणों की आपूर्ति किये जाने की शासन की महत्वाकांक्षी योजना का लाभ जन-सामान्य को समय से प्राप्त नहीं हो पाता है।

सिंह ने बताया कि वर्तमान में दवाओं के लिए राज्य सरकार ने 500 करोड़ रुपये और एनएचएम के तहत 300 करोड़ रुपये की व्यवस्था है, इसी प्रकार मेडिकल उपकरणों के लिए 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है।

उन्होंने बताया कि इस बजट के धन का 80% हिस्सा सीएमओ/सीएमएस द्वारा लोकल परचेव व अन्य माध्यमों से खर्च किया जाता है, जबकि बजट का 20% हिस्सा सीएमएसडी द्वारा किया जाता है।

वर्तमान में तमिलनाडु और राजस्थान में दवाओं व मेडिकल उपकरणों के खरीद कारपोरेशन द्वारा की जाती है।

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