विचार मित्र

कश्मीर का माहौल खराब करने की नापाक कोशिशें

राजेश माहेश्वरी

भारत की सीमा के उस पार और कश्मीर में एक ऐसा वर्ग ऐसा है जो ये नहीं चाहता कि कश्मीर में शांति स्थापित हो। नया कश्मीर शांति के साथ विकास के मार्ग पर आगे बढ़े। बीते सोमवार को कश्मीर में आंतकियों ने ग्रेनेड से हमला किया जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गयी और 38 अन्य घायल हो गये। इससे पहले आंतकियों ने यूरोपियन यूनियन के सांसदों के दौरे से पहले पांच मजदूरों को मौत के घाट उतार दिया था। बीच-बीच में आंतकियों ने कई ट्रक ड्राइवरों की भी हत्या कर माहौल खराब करने और दहशत फैलाने की कोशिश की। केंद्र सरकार और देश की जनता चाहती है कि कश्मीर में शंाति बहाल हो, और नये कश्मीर में कश्मीरी नयी जिंदगी शुरू करें। लेकिन चंद ताकतें अशांति का साम्राज्य स्थापित करने के फिराक में लगी हैं। ऐसे में सवाल ये है कि वो कौन लोग हैं जो ये नहीं चाहते कि कश्मीर में हालात सामान्य हों। कश्मीरवासी बिना किसी भारी सुरक्षा और तामझाम के आम जीवन बसर कर सकें।

बीते 31 अक्तूबर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अलग-अलग संघ शासित क्षेत्र हो गए हैं। व्यवस्था और संविधान बदल गए हैं। विशेष दर्जे के कारण लागू 153 पुराने कानून खत्म कर दिए गए हैं और अन्य राज्यों की तरह 106 केंद्रीय कानून अब कश्मीर में भी लागू होंगे। अब ये क्षेत्र प्रत्यक्ष तौर पर भारत सरकार के अधीन आ गए हैं। कानून-व्यवस्था केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन होगी। अब संविधान और तिरंगा भी भारत के ही होंगे। बेशक जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में इतिहास ने करवट ली है, नया समय लिखा जा रहा है, नए बदलाव का आगाज भी हो रहा है, लेकिन कुछ आशंकाएं बरकरार हैं। कश्मीर में एक तबका अपने पुराने संविधान और झंडे के साथ आक्रोश में है। वह ‘हिंदुस्तान, आरएसएस मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहा है और उसे अनुच्छेद 370 वापस चाहिए।

धारा 370 हटने का सबसे ज्यादा दर्द पाकिस्तान को हुआ। देश के अंदर भी पाक हिमायती एक लाॅबी है। जम्म-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के बाद से तल्ख हुए भारत पाकिस्तान के रिश्ते और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के खिलाफ कश्मीर मामले पर हर ओर से मिली हार ने पाकिस्तान की बौखलाहट और बढ़ा दी है। इसी खिसियाहट में वह भारत से जंग शुरु करने का माहौल बना रहा है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तानी सेना ने अपने 100 से ज्यादा एसएसजी कमांडो फोर्स को तैनात किया है। वहीं नियंत्रण रेखा पर घुसपैठ के लिए पाक की बार्डर एक्शन टीम (बैट) और आतंकी मिलकर भारतीय सेना के खिलाफ ऑपरेशन चलाने की तैयारी कर रहे है। दरअसल पाक अपनी इस हरकत से दोनों देशों के बीच युद्ध का माहौल बनाकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी का ध्यान कश्मीर पर केंद्रित करना चाहता है, ताकि दूसरे देश भारत-पाक के बीच मध्यस्थता का मार्ग तलाश सकें।

सूत्र बताते है कि हाल ही में अफगानिस्तान से 100 से ज्यादा आतंकियों को पाक अधिकृत कश्मीर भेजा जा चुका है। इसके अलावा जैश-ए-मोहम्मद के करीब 15 आतंकी नियंत्रण रेखा के नजदीक पाकिस्तान की लिपा घाटी में रुककर घुसपैठ की तैयारी कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि घाटी में बर्फ गिरने से पहले पाक अपने आतंकियों को कश्मीर में दाखिल करवाना चाहता है। इसको लेकर मसूद अजहर का भाई इसका प्लान तैयार कर रहा है। जैश के सरगना मौलाना मसूद अजहर के भाई मुफ्ती रऊफ असगर ने भी कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ के एजेंडे पर बहावलपुर स्थित ठिकाने पर अपने टॉप कमांडरों से चर्चा की है।

शीर्ष खुफिया सूत्रों ने कहा कि नियंत्रण रेखा से लगे पीओके क्षेत्र के कोटली, रावलकोट, बाघ और मुजफ्फराबाद में आतंकी शिविर प्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तानी सेना के सहयोग से दोबारा सक्रिय हो गए हैं, खुफिया रिपोर्टो में कहा गया है कि पाकिस्तान के आतंकी संगठन अगले कुछ हफ्तों में भारत के कई शहरों में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर सकते हैं। उनकी क्षमता कम है और क्षेत्र में सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे आतंक रोधी अभियानों के चलते आतंकियों केपास नेतृत्व का भी अभाव है। जिसे देखते हुए भारतीय सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। ताजा घटनाक्रम में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद भारत सरकार ने नया नक्शा जारी किया है। पाकिस्तान को यह बात हजम नहीं हो रही।

पाकिस्तान सरकार ने रविवार को भारत द्वारा जारी किए गए नए राजनीतिक नक्शे को खारिज कर दिया। भारत सरकार ने नए बनाए गए केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का नया नक्शा जारी किया। गृह मंत्रालय द्वारा जारी नए नक्शे में गुलाम कश्मीर को हिस्सों को भी कश्मीर के हिस्से के रूप में दिखाया गया है। नक्शों में गुलाम कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का हिस्सा है, जबकि गिलगित-बाल्टिस्तान लद्दाख का हिस्सा है। पाकिस्तान ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का उल्लंघन कारार दिया है। पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने कहा, श्पाकिस्तान इन राजनीतिक मानचित्रों को खारिज करता है, जो संयुक्त राष्ट्र के नक्शे से अननुरूप नहीं है।

पाकिस्तान के साथ ही साथ देश में ऐसी ताकतें और चंद राजनीतिक दल हैं जो ये नहीं चाहते कि केंद्र सरकार के कश्मीर में चल रहे प्रयास सफल हों। उन्हें सरकार की सफलता में अपनी राजनीतिक हार होती दिखती है। यूरोपियन यूनियन के सांसदों के दौरे के वक्त कांग्रेस समेत विपक्ष के कई दलों ने कड़ा ऐतराज जताया था। विपक्ष का आरोप था कि जब अपने देश के सांसदों को कश्मीर जाने की इजाजत नहीं दी तो फिर विदेशी सांसदों को वहां जाने की अनुमति क्यों दी गई। कांग्रेस ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाया है। यह बिल्कुल अलग विषय है, जिसका विश्लेषण भी अलग ही होना चाहिए, लेकिन खासकर कांग्रेस याद करे कि जब नेता विपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में प्रतिपक्ष के नेता अरुण जेतली 2012 में कश्मीर में तिरंगा फहराने जाना चाहते थे, तो केंद्र की मनमोहन-सोनिया सरकार ने जाने से रोक दिया था। कांग्रेस के बड़े नेता अपने विवादास्पद बयानों को भी याद रखें।

दरअसल पाकिस्तान की मंशा थी कि घाटी में कुछ हिंसक वारदातें करवाकर वो दुनिया को ये बताना चाहता था कि अनुच्छेद 370 पर भारत के फैसले के बाद वहां परिस्थितियां नियंत्रण से बाहर है। इसलिए विश्व समुदाय को वहां हस्तक्षेप करना चाहिए। लेकिन हो ठीक उल्टा रहा है। कश्मीर में परिस्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। और भारत विश्व समुदाय को ये बताने और दिखाने में सफल रहा है कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान जो प्रोपेगेंडा फैला रहा है वो बकवास है। वहां जो भी एहतियातन कदम उठाए गए हैं वो कश्मीर के लोगों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए उठाए गए हैं। जो जल्द ही बहाल भी कर दी जाएगी। और कुछ मुश्किलों के बाद वहां जो अमन और शांति का जो बयार बहेगा उसे पाकिस्तान समेत पूरी दुनिया देखेगी। यूरोपियन यूनियन के सांसदों ने भी मोदी सरकार की कश्मीर नीति को सही दिशा में बताया है।

वास्तव में कश्मीर में भारत सरकार के सफल होते इरादे पाकिस्तान और पाकिस्तान हिमायती भारत में बैठी एक जमात को बर्दाशत नहीं हो रहे हैं। ऐसे में विभिन्न तरीकों से अशांति का माहौल बनाने का प्रयास किया जा रहा है। चूंकि सरकार ने सुरक्षा और चैकसी को हाई अलर्ट पर रखा है ऐसे में उम्मीद की जानी चाहिए कि आंतकवादी किसी बड़ी घटना को अंजाम नहीं दे पाएंगे। आम कश्मीरी देश के साथ खड़ा दिखाई देता है। उम्मीद की जानी चाहिए कि धीरे धीरे ही सही कश्मीर में विकास की धारा बहने लगेगी और आम कश्मीरी शांति से जीवन बसर करेगा।

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