विचार मित्र

बेकाबू होती प्याज की कीमतें

तारकेश्वर मिश्र

बढ़ती महंगाई ने तो मध्यम और गरीब वर्ग की  कमर तोड़ कर रख दी है। सब्जियों की शान समझे जाने वाला प्याज कभी-कभी महंगाई का लाल रूप दिखाकर आम जनता की आंखों में जबरदस्त आंसू ला देता है। अब एक बार फिर से देश के कुछ राज्यों में प्याज की कीमतों में उछाल आ गया है।

दिल्ली से लेकर मुंबई और देहरादून से लेकर चेन्नई तक के बाजारों में प्याज के दाम बढ़ते जा रहे हैं। जिससे एक बार फिर आम जनता में रोष है और विपक्ष को सरकार पर निशाना साधने का मौका मिल गया है। दरअसल, पिछले साल के सूखे ने और इस बार मॉनसून की देरी ने मुश्किलें बढ़ा दीं है। इस बार कई जगहों पर मूसलाधार बारिश की वजह से बड़े पैमाने पर प्याज की फसल भी बर्बाद हो गई। नतीजा मंडियों में सप्लाई कम हो गया और कीमतें खरीदारों को रुलाने लगीं हैं।

गौरतलब है कि चीन के बाद सबसे ज्यादा प्याज उत्पादन भारत में होता है। भारत प्याज का एक बड़ा निर्यातक भी है। कुल उत्पादन का 7 से 11 फीसदी प्याज निर्यात किया जाता है। प्याज के प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, कनार्टक तथा राजस्थान में बेमौसम बारिश से प्याज की फसल को नुकसान हुआ है जिस कारण इसकी कीमतों में फिर तेजी आई है।

दिल्ली एनसीआर में प्याज की फुटकर कीमतें बढ़कर फिर से जबकि प्रमुख महाराष्ट्र की मंडियों में महीनेभर में ही इसकी कीमतों में 35 से 38 फीसदी की तेजी आ चुकी है। केन्द्र की तरफ से ही प्याज की कीमतों को कंट्रोल करने के लिए काम किया जाता है यह स्टेट सब्जेक्ट भी नहीं है। जहां तक केन्द्र की तरफ से जारी किए जाने वाली हिदायते है उन पर पूरी तरह से नजर रखी जा रही है और नियमों से अधिक प्याज कक स्टोरेज नहीं करने दी जा रही है।

गौरतलब है कि प्याज के बढ़ते दाम एक बार फिर चिंता का विषय बन गए हैं सोशल मीडिया पर भी लोग इस मसले पर सवाल उठाने लगे हैं, वहीं विपक्षी नेता भी सरकार से सवाल पूछ रहे हैं हालांकि, ये दाम कबतक नीचे आएंगे, इसका अभी कोई जवाब मिलता नजर नहीं आ रहा है। प्याज के बढ़ते दाम पर केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मामले के मंत्री राम विलास पासवान ने कहा है कि घरेलू स्तर पर प्याज के उत्पादन में 30-40 फीसदी की कमी है। यही वजह है कि प्याज के दाम बढ़ रहे हैं।

जानकारों के मुताबिक 2019 के खरीफ सीजन में प्याज के उत्पादन गिरावट के साथ 20 लाख टन रहने का अनुमान है जबकि पिछले साल की समान अवधि में यह उत्पादन 30 लाख टन का था। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार की तरफ से अभी प्याज के उत्पादन का आंकड़ा नहीं दिया गया है, लेकिन बाढ़ की वजह से प्याज के उत्पादन में गिरावट की आशंका है। नवंबर आखिर या दिसंबर तक प्याज के दाम कम हो सकते हैं। वास्तव में किसी वस्तु की कीमत उसकी मांग एवं आपूर्ति पर निर्भर करती है और फिलहाल मांग के मुकाबले आपूर्ति कम है। मॉनसून में देरी से खरीफ सीजन के लिए प्याज की बुवाई बाद में की गई। वहीं कई राज्यों में बाढ़ की वजह से फसल खराब हो गई।

जिस प्याज की कीमतें आज आसमान छू रही हैं, मई-जून के महीनों में जब किसान इसे मंडियों में लेकर जाता है तो कीमत कौड़ियों में होती है। ऐसे में सवाल यह भी है कि जब किसान 50 पैसे किलो में प्याज बेचता है तो आम आदमी उसे 80 रुपए में खरीदने के लिए मजबूर क्यों हैं? और क्या इसकी बढ़ी हुई कीमत से किसानों को फायदा होता है? बढ़ी कीमतों से किसानों को कितना फायदा ? प्याज की बढ़ी कीमतों से किसानों को कितना फायदा हो रहा है? कृषि प्रधान देश में प्याज की कीमत में बढ़ोतरी और किसानों की दयनीय दशा सचमुच शर्मनाक और निंदनीय है।

सरकार प्राइवेट ट्रेड के माध्यम से विभिन्न देशों से प्याज आयात कराने का प्रयास कर रही है। इनमें अफगानिस्तान, मिस्त्र, टर्की और इरान जैसे देश शामिल हैं। वर्ष 2018-19 में भारत ने 3,468 करोड़ रुपए में 2.1 करोड़ कुंतल प्याज निर्यात किया। जबकि इस वर्ष प्याज आयात करने की नौबत नहीं आई। इसके पिछले वर्ष 2017-18 में भारत ने लगभग 11 करोड़ रुपए से 65925.85 कुंतल प्याज आयात किया जबकि 3088 करोड़ रुपए का 15.88 लाख कुंतल प्याज निर्यात भी किया। लेकिन 2019-20 की स्थिति ठीक नहीं लग रही।

बढ़ी कीमतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार दो हजार कुंतल प्याज आयात करने जा रही है, जबकि हम इस सीजन में 35.23 लाख कुंतल प्याज निर्यात भी कर चुके हैं। इस वर्ष के निर्यात के आंकड़े अप्रैल से मई, 2019 के बीच के हैं। इस साल जब हमने प्याज दूसरे देशों को बेचा तब हमारे देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव, नासिक में प्याज की कीमत 500 से 1000 रुपए प्रति कुंतल थी। आज मतलब निर्यात के ठीक तीन महीने बाद जब हम प्याज दूसरे देशों से मंगा रहे हैं, तब इसी मंडी में प्याज की कीमत 2300 से 4000 रुपए प्रति कुंतल तक पहुंच चुकी है। मतलब जब किसानों के पास माल ज्यादा था तब हमने उसे सस्ते दामों में बेचा और वही प्याज ज्यादा कीमत में खरीद रहे हैं। पिछले साल के आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो सितंबर महीने में हर साल औसतन 6 से 6.5 मीट्रिक टन प्याज की बिक्री 10 से 20 रुपए प्रति किलो हुई। लेकिन 2015 से स्थिति थोड़ी बदली। 2015 सितंबर में बाजार में 3.4 मीट्रिक टन प्याज ही बाजार पहुंचा। इस साल 24 सितंबर तक बाजार में 3.1 मीट्रिक टन प्याज ही बाजार तक पहुंच पाया है।

दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी संघ (नाफेड) के अनुसार इनके पास अभी 30 हजार टन प्याज है। यहां से पश्चिम बंगाल, पंजाब, ओडिशा, असम नई दिल्ली और केरल को प्याज भेजा जा रहा है। नाफेड ने पिछले दिनों अपने एक बयान में कहा था कि देश में प्याज का इतना स्टॉक है कि बाहर से मंगाने की जरूर ही नहीं पड़ती लेकिन यह सब कुछ कारोबारियों का किया कराया है। जब तक वे उपज मार्केट में छोड़ेंगे नहीं तब तक कीमत कम नहीं होगी। क्योंकि बाहर से प्याज आने में अभी समय लगेगा। केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान के वर्ष 2012 में किए गए एक सर्वे के अनुसार भारत में प्याज की कुल पैदावार का 20 फीसदी हिस्सा ही किसानों के पास होता है। जबकि 18.1 फीसदी हिस्सा कोल्ड स्टोरेजे में रखा होता है। थोक व्यापारियों के पास 38 और रिटेलर के पास 22.3 फीसदी स्टॉक होता है।

इमर्सन क्लाइमेट टेक्नोलॉजीज इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सालाना 44,000 करोड़ रुपए का फल-सब्जी और अनाज बर्बाद हो जाता है। सीफेट की ही एक रिपोर्ट के अनुसार, देश में लगभग 6.1 करोड़ टन कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है, ताकि बड़ी संख्या में फल, अनाज के साथ खाद्यान्न खराब न हो। इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि देश भर में हर साल कोल्ड स्टोरेज के अभाव में 10 लाख टन प्याज बाजार में नहीं पहुंच पाता है।

देशभर में फल-सब्जियों के भंडारण के लिए जितने कोल्ड स्टोरेज हैं, लगभग उतने ही और चाहिए। देशभर में इस समय भारत सरकार की रिपोर्ट की मानें तो 6300 कोल्ड स्टोरेज हैं, जिनकी भंडारण क्षमता 3.1 करोड़ टन है। जबकि देश में लगभग 6.1 करोड़ टन कोल्ड स्टोरेज की जरूरत है ताकि बड़ी संख्या में फल, अनाज के साथ खाद्यान्न खराब न हो और किसानों को इसका लाभ मिले। फिलवक्त समस्या से निपटने के लिए सरकार ने फैसला लिया है कि अफगानिस्तान, मिस्र, तुर्की और ईरान में भारतीय दूतावासों से प्याज के आयात के लिए अनुरोध किया जाएगा ताकि भारत में ठीक तरह से उसकी आपूर्ति हो सके। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पहले 80 कंटेनर प्याज का आयात तत्काल प्रभाव से होगा, फिर और 100 कंटेनर भारत में प्याज समुद्र के जरिए आने की उम्मीद है। सरकार को तत्काल प्रभाव से प्याज की कीमतें काबू में रखने के उपाय करने चाहिए।

-मान्यता प्राप्त स्वतंत्र पत्रकार

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