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2000 के नोट हो सकते हैं बंद, आज भी हो रहा कैश में 85% भुगतान

पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग का कहना है कि जल्द  2,000 के नोटों को बंद किया जा सकता है. उन्होंने एक नोट प्रकशित किया है. गर्ग ने 31 अक्टूबर को वित्त सचिव पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी. स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का विकल्प देने के बाद ऊर्जा सचिव के रूप में पदभार संभाला. 72-पृष्ठ के एक नोट में कहा गया है कि भारत की राजकोषीय प्रबंधन प्रणाली उन प्रथाओं का उपयोग करती है जो स्थिर नहीं हैं.

नोटबंदी के तीन साल पूरे होने पर आर्थिक मामलों के पूर्व सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा है कि 2000 के नोटों का बड़ा हिस्सा सर्कुलेशन में नहीं है. इनकी जमाखोरी हो रही है, इन्हें बंद कर देना चाहिए. गर्ग के मुताबिक सिस्टम में काफी ज्यादा नकदी मौजूद है. 2000 के नोट बंद करने से कोई परेशानी नहीं होगी.  गर्ग ने कहा कि दुनियाभर में डिजिटल पेमेंट का चलन बढ़ रहा है. भारत में भी ऐसा हो रहा हैलेकिन इसकी रफ्तार धीमी है. भारत में आज भी 85% भुगतान कैश में हो रहा है.

मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को कालेधन पर रोक लगाने के लिएनोटबंदी की घोषणा की थी. नोटबंदी के बाद सरकार ने नए 2000 का नोट जारी किये थे.  2016 में मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले को विपक्ष अभी भी दुर्भाग्यपूर्ण बताता है. नोटबंदी के बाद कृषि मंत्रालय ने स्वीकार किया था कि नोटबंदी का फैसला किसानों के लिए काफी नुकसानदेह साबित हुआ है.

कृषि मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया था कि किसानों पर नोटबंदी से हुत बुरा असर पड़ा है.  इस मामले में वित्त मंत्रालय से जुड़ी संसद की एक स्थायी समिति के सामने कृषि मंत्रालय ने नोटबंदी के दुष्प्रभावों को स्वीकार किया है. मंत्रालय ने माना  ”नोटबंदी के बाद से नगदी की कमी के चलते लाखों किसान, रबी सीजन में बुआई के लिए बीज-खाद नहीं खरीद सके. इसका किसानो पर बहुत बुरा असर पड़ा. जिसके एक तरह से किसानों की कमर तोड़ दी”.

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