कारोबार

डिजिटल लाईफ में लेनदेन करते समय इन खास बातों का रखेगे ध्यान तो नहीं पड़ेगा पछताना

नई दिल्ली। भारत में एक तरफ जहां लोग डिजिटल की ओर भाग रहे हैं वहीँ दूसरी ओर इस वजह से धोखाधड़ी का खतरा भी बढ़ गया है। ऑनलाइन बैंकिंग सुविधा आपके बैंकिंग और अन्य वित्तीय जानकारी के लिए बहुत बड़ा खतरा है। आपके डेटा को चुराने के लिए हैकर्स हर तरह के ट्रिक अपना रहे हैं। वे इसके लिए तकनीक की मदद ले सकते हैं या फिर फ्रॉड कॉल कर सकते हैं। जोखिम तब और ज्यादा बढ़ जाता है जब आप किसी अनधिकृत व्यक्ति को अपनी वित्तीय जानकारी, क्रेडिट और डेबिट कार्ड डिटेल, ओटीपी (वन-टाइम-पासवर्ड), एटीएम पिन, नेट बैंकिंग पासवर्ड आदि दिखाते हैं। इससे बचने के लिए हम कुछ सुझाव दे रहे हैं।

1. कभी भी किसी अनधिकृत व्यक्ति को अपना क्रेडिट या डेबिट कार्ड का डिटेल साझा न करें। लोग खरीदारी, भोजन, एयरलाइन टिकट बुक करने और अन्य उद्देश्यों के लिए अपने कार्ड का उपयोग करते हैं। कार्ड पर एक्सपायरी की तारीख, नाम, कार्ड नंबर आदि की जानकारी छपी होती है। बहुत से लोग आपका नाम जानते हैं लेकिन इस जानकारी को छोड़कर, अन्य जानकारी साझा न करें।

2. सभी क्रेडिट और डेबिट कार्ड में कार्ड सत्यापन मूल्य होता है, जिसे सीवीवी नंबर के रूप में जाना जाता है, यह कार्ड के पीछे की तरफ अंकित होता है। यह संख्या डिजिटल लेनदेन के दौरान सुरक्षा के अंतिम स्तर के तौर पर कार्य करती है।

3. एक अन्य महत्वपूर्ण जानकारी वन-टाइम पासवर्ड है। यह एक तरह का सत्यापन कोड है जो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। सभी लेनदेन (कार्ड, नेट बैंकिंग या ई-वॉलेट के माध्यम से) लेनदेन को पूरा करने के लिए इस कोड की आवश्यकता होती है। इसलिए, कभी भी किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के साथ अपने ओटीपी को साझा न करें। जान लीजिए कि बैंक और वित्तीय संस्थान अपने ग्राहकों से ओटीपी कभी नहीं पूछते हैं।

4. पैसा निकालने या लेनदेन पूरा करने के लिए एटीएम और PoS (बिक्री के बिंदु) पर क्रेडिट और डेबिट कार्ड पिन (व्यक्तिगत पहचान संख्या) की आवश्यकता होती है। अपना पिन दर्ज करते समय, सुनिश्चित करें कि कोई भी आपको पीछे से नहीं देख रहा है।

5. ऑनलाइन लेनदेन के लिए नेट बैंकिंग का उपयोग करते समय, आपको अपनी ग्राहक आईडी (लॉगिन आईडी) और पासवर्ड दर्ज करना होगा। हर छह महीने में अपना नेट बैंकिंग पासवर्ड बदलना सही रहता है।

loading...
=>

Related Articles