कारोबार

किराये पर घर देनें से पहले इन बातों का जरूर रखें ध्यान

नई दिल्ली. अपनी आमदनी के साथ-साथ नियमित और पक्की कमाई के लिए घर का एक हिस्सा (या फ्लोर) किराये पर देना सामान्य बात है. हालांकि, आंखे मूंद कर किसी के भी हाथ में घर की चाबी थमाकर किराया मांग लेना सही नहीं.

घर को किराये पर लगाने में भी कई जोखिम हैं. किरायेदार की किसी भी गलत हरकत का असर सीधा आप पर पड़ता है. इसके अलावा आपके घर को लेकर भी जोखिम बना रहता है. ऐसे में घर किराये पर देने से पहले इन बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

घर को करें किराये के लिए तैयार

अमूमन लोग घर के उस हिस्से पर विशेष ध्यान नहीं देते, जो उन्हें किराये पर देना है. वे मानते हैं कि वहां किया गया खर्च उनकी जेब ढीली करेगा, मगर उसका फायदा किरायेदार उठाएगा. पहली नजर में यह फायदे का सौदा लगता. लेकिन यह सोच सही नहीं है.

किरायेदार की तलाश

किरायेदार की तलाश के लिए लोग अकसर प्रॉपर्टी एजेंट या फिर जान-पहचान वाले लोगों से बात करते हैं. प्रॉपर्टी डीलर एक या डेढ़ महीने का किराया कमीशन में लेते हैं. हालांकि, कई विशेषज्ञों की राय में यह तरीका बेहतर है. प्रॉपर्टी डीलर के पास अकसर वहीं लोग जाते हैं, जिन्हें वाकई जरूरत है. साथ ही यह आपको कागजी कार्रवाई से भी मुक्त करता है. ऐसे में आपका समय बचता है. इसके अलावा आप वेबसाइट्स और एप्स के जरिए भी अपना मकान किराये पर लगा सकते हैं.

अपनी प्रॉपर्टी को किराये पर चढ़ाने से पहले दीवारों और छत की लीकेज देख लें, उसे सही तरह से पेंट करवा लें और उसमें बिजली और प्लंबर का काम करवा लें. साथ ही पेस्ट कंट्रोल करा देना भी बेहद जरूरी है. ये तमाम बातें आपको न सिर्फ किरायेदार के साथ रोज-रोज की चिक-चिक से बचाएगी, बल्कि एक शानदार घर किराये पर देने के समय आप अतिरिक्त किराया भी मांग सकते. अंत में याद रखें कि यह घर आप ही का है और उसे अच्छी हालत में रखना आपके लिए ही फायदेमंद है.

किरायेदार की जांच

सिर्फ किरायेदार की तलाश भर कर लेने से आपका काम नहीं चलेगा. आपको उसकी पूरा जांच करनी चाहिए क्योंकि आपकी संपत्ति उन्हीं के पास होगी. अपने किरायेदार की पुसिल जांच अवश्य करवा लें, जिसका फॉर्म आपको पुसिल के वेबसाइट से आसानी से मिल सकता है. इलाके के पुसिल थाने में इसे जमा करवाते समय किरायेदार की आईडी प्रूफ देना न भूलें. इसके अलावा किरायेदार क्या करता है, कहां काम करता है, यह जानकारी भी आपके पास होना जरूरी है. संभव हो तो, किरायेदार के पुराने घर से भी उसके बारे में पता करें.

तय करें उचित किराया

अकसर लोग अपने घर के किराये को बढ़ाकर बताते हैं. आपके घर का किराया आपके इलाके के अनुसार ही होना चाहिए. एक-दो बिंदुओं पर इसमें 2-5 फीसदी का फर्क आ सकता है, मगर ज्यादा फर्क आपको अभिमानी साबित कर सकता है. साथ ही अपने घर का किराया जरूरत से ज्यादा न घटाए. जल्दी किरायेदार पाने के लिए लोग ऐसा करते हैं. इसलिए किराये को मिल रही सहूलियतें और खासियते, इसी के आधार पर उचित किराया रखें. अपने इलाकों में किराये की जानकारी आपको आसानी में मिल सकती है.

घर किराये पर देने में कानूनी औपचारिकताएं

लोग अकसर इस बिंदु की कुछ बातों को नजरअंदाज कर बैठतें हैं और फिर खामियाजा भुगतते हैं. ऐसे में जरूरी है कि आप सिर्फ मौखिक आधार पर ही रेंट एग्रीमेंट न बनाए. भारत में रेंट के पेपर 11 महीने के आधार पर बनते हैं, क्योंकि 12 महीने से अधिक के रेंट एग्रीमेंट का पंजीकरण अनिवार्य है.

12 महीने या उससे अधिक के रेंट एग्रीमेंट में राज्य सरकार ही किराये की दरें तय करती हैं. हालांकि, आपके रेंट एग्रीमेंट में लीज की तारीख, सिक्योरिटी डिपोजिट, पेमेंट का समय (मासिक/त्रैमासिक/सालाना), किराये की आखिरी तारीख, देर से किराया देने का जुर्माना, जानवरों की पॉलिसी, घर खाली कराने की नियम व शर्तें शामिल होनी चाहिए. साथ ही यह भी ध्यान रखें कि घर के रख-रखाव की सभी बातें विस्तृत में लिखना जरूरी है.

यदि आपका घर किसी सोसाइटी में है, तो अपने किरायेदार को उसके नियमों को जानकारी भी लिखित रूप में जरूर दें. चाबी सौंपने से पहले सारी बातें सुनिश्चित कर लें. इन सब बातों के अलावा, कई विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि यदि आप फर्निश्ड या सेमी-फर्निश्ड घर किराये पर दे रहे हैं, तो अपनी सामान की सूची और मौजूदा स्थिति देख लें और किरायेदार को भी उससे अवगत करवाएं. यदि संभव हो तो उसकी फोटो भी खींच लें. घर में लगे पंखे,

ट्यूबलाइट, बल्ब, टंकी, पाइप आदि समेत तमाम फिटिंग्स का पूरा ब्यौरा अपने पास तो रखे हीं, साथ की किरायेदार को भी दें. इससे आप घर खाली करने के दौरान होने वाले सभी झंझटों से खुद को बचा सकते हैं.

 

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