फतेहपुर

शासन के सख्त आदेश के बाद भी रुक नहीं रहा परिषदीय लिपिको का शोषण

-खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के लिये मायने नहीं रखते हाईकोर्ट के आदेश
-नियम विरुद्ध ढंग से बीआरसी में भेजने पर मचा बवाल, एसों० ने की आदेश निरस्त करने की माँग

फतेहपुर। जिले की प्राथमिक व जूनियर स्तरीय शिक्षा व्यवस्था के बे-पटरी हो जाने के पीछे काफी कुछ जिम्मेदार खण्ड शिक्षा अधिकारियो की अपने कामों के प्रति हीला-हवाली बड़ा कारण माना जा रहा है। साथ ही नियमो के विपरीत परिषदीय लिपिको को बीआरसी से सम्बद्ध करने का आदेश उच्च न्यायालय की व्यवस्था के विपरीत है, जिसमें इस व्यवस्था को ही समाप्त करने का आदेश दिया गया था।
गौरतलब है कि जनपद में खण्ड शिक्षा अधिकारियों के कुल चौदह पद सृजित हैं। जिनमे 13 ग्रामीण और एक नगर क्षेत्र में है। मूलतः जनपद के वरिष्ठ खण्ड शिक्षा अधिकारी को ही मुख्यालय (नगर) का प्रभार सौंपा जाता है। ऐसा शासनादेश भी है किंतु कुछ वर्ष पूर्व अपने सजातीय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी विनय कुमार के समय मुख्यालय का चार्ज हासिल करने वाले राकेश कुमार सचान अब व्यवस्था पर ही भारी पड़ रहे है। कई वरिष्ठ एसडीआई है, के बावजूद वर्षों से वे सीट पर जमे है और उन पर अपने कर्मचारियों का उत्पीड़न करने के आरोप भी लगते रहे हैं।
खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय राकेश कुमार सचान के पत्र-परिषदध्63-68/2019-20 दिनांक- 09/10/2019 में निर्गत तुगलकी फरमान उच्च न्यायालय इलाहाबाद में योजित याचिका संख्या 25476/2015 लवलेश कुमार पाण्डेय, 25469/2015 विजय शंकर त्रिपाठी, 25549/2015 मोहम्मद साबिर, 25475/2015 राजेश कुमार श्रीवास्तव व 25547/2015 पन्ना लाल तिवारी बनाम स्टेट आफ यू०पी० व अन्य के सम्बंध में पारित विभिन्न आदेशों के क्रम प्रकरण का खुला उल्लंघन भी है!
खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय श्री सचान ने उच्च न्यायालय के आदेश को धता बताते हुए दिनांक- 09/10/2019 के आदेश में डीएम के एक पुराने कथित पत्र का हवाला देते हुए अपने कार्यालय में कार्यरत समस्त परिषदीय कार्यालय सहायकों को अपने अपने पटलों के साथ साथ बीआरसी में भी सम्बद्ध कर दिया। बताते चले कि उच्च न्यायालय ने इस व्यवस्था पर चार साल पहले से रोक लगा रखी है किंतु श्री सचान ने इसे धता बताते हुए आदेश जारी कर दिया। साथ ही अब अपने अधीनस्थो का उत्पीड़न भी कर रहे हैं।
उपरोक्त सन्दर्भ में प्रकाश में आया है कि 2012 में शिक्षा निदेशक ने परिषदीय लिपिको को बीएसए कार्यालय के लिपिको के साथ सामंजस्य बनाकर काम लेने के आदेश दिये गये थे किन्तु उसका कही पर अनुपालन नही हो रहा है, साथ ही एकीकरण के आदेश को भी तवज्जो नहीं दी गई। इसके अतिरिक्त बीआरसी में लिपिक की नियुक्ति पद सृजित न होने के कारण ब्लाक के तीन अनुचरों को सम्बद्ध कर उनसे कार्यालय में सहयोग लेने के आदेश को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।
विगत एक नवम्बर को उ०प्र० बेसिक शिक्षा परिषद कर्मचारी एसों० ने परिषदीय लिपिको को नियम विरुद्ध ढंग से विकास खण्डो पर सम्बद्ध किये जाने सम्बंधी आदेश को निरस्त करने की माँग जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से भी की गई किन्तु उस पर भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है। क्योंकि खण्ड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय राकेश कुमार सचान अपने को प्रदेश के एक मंत्री का रिश्तेदार बताते है, इसलिये उनके नियम विरुद्ध आदेश पर रोक लगाने की हिम्मत बीएसए भी नहीं कर पा रहे है। इतना ही नहीं तीन वर्ष का मानक होने के बावजूद श्री सचान लगभग 06 साल से एसडीआई मुख्यालय के पद पर वरिष्ठता के मानक के विपरीत जमे है, इस पर भी योगी का सिस्टम मौन क्यों है यह पूरी तरह समझ से परे है!
इस सन्दर्भ में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी से सम्पर्क किया गया तो उनका कहना था कि अगर कोई आदेश नियम विरुद्ध हुआ है तो वापस होगा। सम्बंधित अधिकारी की गलत तैनाती के सवाल को बीएसए टाल गये। उधर खबर है कि पिछले काफी समय से श्री सचान अपने मूल कार्यालय न जाकर बीएसए कार्यालय में बैठकर काम चला रहे है। इसकी शिकायत एसों० ने शासन में की है। साथ ही चेतावनी दी है कि अगर एसडीआई मुख्यालय के क्रियाकलाप न सुधरे तो एसों० आंदोलन के लिये बाध्य होगा।

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