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जिनके हित छिपे, उन स्वार्थियों की साजिश

अनुशासनहीनता के चलते यूपी कांग्रेस से निष्काषित वरिष्ठ नेताओं का राग अलाप

नोटिस के बाद 7 दिन का समय देने का प्रावधान मगर मिला केवल 24 घंटे

पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर बतायेंगे अपनी आपबीती

लखनऊ। कांग्रेस पार्टी से निष्कासित किये गये वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार को मीडिया के समक्ष सार्वजनिक रूप से अपनी सफायी पेश की। नेताओं ने निष्कासन को लेकर लगाये गये आरोप को सरासर झूठा और तथ्यहीन बताया। साथ ही आरोप भी लगाया कि यह उन लोगों की साजिश है जिनका कांग्रेस पार्टी के सिद्धांतों से कोई सरोकार नहीं है। नेताओं ने इस कदम को कांग्रेस के संविधान को दरकिनार कर अनुशासन की कार्रवाई बताया। कांग्रेस के इन वरिष्ठ नेताओं का कहना रहा कि संविधान में निष्कासन से पूर्व नोटिस के बाद सात दिन का समय देने का प्रावधान है, लेकिन इसको दरकिनार करते हुए हम लोगों को जवाब देने के लिए महज 24 घंटे का समय दिया गया। नेताओं ने इसे आनन-फानन में की गयी कार्रवाई बताते हुए कहा कि जिनके हित छिपे हुए हैं यह उन स्वार्थियों की साजिश है। कहा कि यह निष्कासन अवांछनीय, अवैधानिक और कार्यकतार्ओं के सम्मान पर चोट है। गौर हो कि पार्टी की अनुशासनहीनता के चलते यूपी कांग्रेस के 11 वरिष्ठ नेताओं को निष्काषित कर दिया गया जिसमें पूर्व मंत्री सत्यदेव त्रिपाठी, रामकृष्ण द्विवेदी व हाजी सिराज महेंदी सहित कई बुजुर्ग व पुराने नेता शामिल हैं।

निष्कासन के ठीक एक दिन बाद ही ये सभी नेता एकमंच पर इकट्ठे हुए और यही कहा कि वो अभी भी कांग्रेस के प्रति आस्था रखते हैं व अध्यक्ष सोनिया गांधी के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे। इन नेताओं के मुताबिक बीते 14 नवम्बर को पंडित जवाहर लाल नेहरु के जन्मदिवस पर पूर्व सांसद संतोष सिंह के आवास ने उनकी जयंती मनायी गयी थी और कांग्रेस को मजबूत करने पर चर्चा हुई थी। अब हम पर आरोप लगा दिये गये कि हम लोग प्रियंका गांधी के निर्णयों का विरोध कर रहे हैं। हमारा सवाल है कि क्या पंडित नेहरु का जन्मदिन मनाना अपराध है? क्या पार्टी को मजबूत बनाने की बात करना गुनाह है? हम पर लगाया गया यह आरोप कि हम नौजवानों के खिलाफ हैं, सरासर झूठा और बेबुनियाद है। हम सभी युवा आंदोलन की राजनीति से उठकर आये हैं। प्रदेश के कई जनपदों में इस कार्रवाई की निंदा की जा रही है। वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि कार्यकतार्ओं का विचार मंथन का कार्यक्रम दिसम्बर में नोएडा में आयोजित किया जायेगा। इसके अलावा पूर्वांचल व बुंदेलखंड में भी विचार मंथन कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। तैयारी समिति की बैठक 30 नवम्बर को आयोजित की गयी है। वहीं उप्र कांग्रेस कमेटी व्यापार प्रकोष्ठ ने वरिष्ठ नेताओं के निष्कासन को साजिशन की गयी कार्रवाई बताया है। प्रकोष्ठ की ओर से कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी से निष्कासित वरिष्ठ नेताओं का निष्कासन निरस्त कर पार्टी में वापस लेने की मांग की है।

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