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सिफिलिस रोग एड्स से भी ज्यादा है खबर नाक जानें लक्षण, कारण और बचाव

एड्स से भी ज्यादा तेजी से फैलने वाली बीमारी सिफिलिस भी यौन संचारित रोग है. सिफिलिस रोग टी पैलिडम बैक्टीरिया के संक्रमण से फैलता है. वजाइना, गुदा, मलाशय, मुंह में छाले और लिंग में बैक्टीरिया का संक्रमण होने पर यह तेजी से फैलता है. सामान्यः यह त्वचा पर छाले पड़ने का रोग है जो एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है. सेक्स के दौरान यह एक इंसान से दूसरे इंसान में फैलता है. सिफिलिस रोग में त्वचा पर पड़ने वाले छाले कई बार दर्द रहित होते हैं. दर्द रहित छालों की वजह से सिफिलिस रोग के बारे में लोग सावधानी नहीं रख पाते हैं. असुरक्षित यौन संबंध बनाने वाले लोगों में यह एड्स से भी ज्यादा तेजी से फैलता है.

सिफिलिस के कारण 

Syphilis symptoms and causes

यौन संचारित रोग सामान्यतः सेक्स करने से ही फैलते हैं. सिफिलिस रोग भी टी पैलिडम बैक्टीरिया के इंफेक्शन के शिकार इंसान के साथ सेक्स करने से फैलता है. कई बार यह त्वचा में कटे हुए भाग की वजह से या छाले की वजह से जल्दी फैलता है.

शरीर में लगी चोट, छाले या श्लेष्मा छिल्ली से टी पैलिडम बैक्टीरिया शरीर के अंदर फैलता है. एक बार शरीर में टी पैलिडम बैक्टीरिया जाने के बाद इसका इंफेक्शन शरीर में फैलने लगता है.

अगर मां को सिफिलिस रोग है तो होने वाले बच्चे को भी टी पैलिडम बैक्टीरिया का इंफेक्शन हो सकता है. डॉक्टर और एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सिफिलिस रोग एचआईवी-एड्स से भी तेज फैलता है.

जो इंसान सिफिलिस रोग का शिकार है अगर आप उसके साथ बाथरूम शेयर करते हैं तो भी टी पैलिडम बैक्टीरिया का इंफेक्शन नहीं होता है. सिफिलिस रोग मुख्यतः यौन संबंध के साथ ही फैलता है.

सिफिलिस के लक्षण 

अलग-अलग स्तर पर सिफिलिस के अलग-अलग लक्षण होते हैं. प्राथमिक स्तर में सिफिलिस रोगी के शरीर में दर्द रहित छाले और चकत्ते होते हैं.

दूसरे स्तर के सिफिलिस में शरीर की त्वचा में खुजली वाले, खुजली रहित चकत्ते और छाले पड़ते हैं. शरीर में दर्द और बुखार की परेशानी भी हो सकती है. कई बार सिफिलिस की बीमारी में अचानक वजन कम होने लगता है.

सेक्सुअल आर्गन के आसपास चकत्ते और खुजली वाले मस्से भी हो सकते हैं. बाल तेजी से झड़ने लगते हैं और गले में खराश की समस्या भी सिफलिस रोग में देखी जाती है.

सिफिलिस का इलाज 

सिफिलिस का इलाज पेनिसिलिन के इंजेक्शन द्वारा होता है. अगल-अलग चरण के हिसाब से पेनिसिलिन की खुराक दी जाती है. कई बार यह अधिक खतरनाक स्टेज पर होने से इलाज बहुत लंबा चलता है.

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