उत्तर प्रदेशकानपुर देहात

पुलिस ने तब तक कुछ नही किया, जब तक मर नही गई रेप पीड़िता

कानपुर। आरोपितों के खुलेआम घूमने और गांव में हो रही तरह-तरह की चर्चा से किशोरी आहत कानपुर देहात के रूरा क्षेत्र की गैंगरेप पीड़िता ने शुक्रवार रात चौबेपुर क्षेत्र में अपनी चचेरी बहन के घर फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली। खुदकुशी की जानकारी होते ही पुलिस ने दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया तथा एक फरार है। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए आनन-फानन में पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया।

किशोरी 13 नवंबर से लापता थी। परिजनों ने 14 को थाने में तहरीर दी थी, जिस पर पुलिस ने दो दिन बाद गुमशुदगी दर्ज की, जबकि परिजनों ने अपहरण की आशंका जताई थी। इसी बीच 17 नवम्बर को किशोरी अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर थाने पहुंची। आपबीती सुनकर पुलिस ने मेडिकल कराकर उसे 22 नवम्बर को कोर्ट में 164 के बयान के लिए पेश किया। कोर्ट में किशोरी ने तीन आरोपितों को नाम लेते हुए गैंगरेप की घटना बयां की। बयान के आधार पर पुलिस ने दर्ज रिपोर्ट में गैंगरेप की धाराएं बढ़ाईं। रिंकू, लाला, सन्नी को नामजद किया गया। आरोप है कि पुलिस ने आरोपितों की गिरफ्तारी का कोई प्रयास नहीं किया।

बेटी की हालत देख परिजनों ने उसे एक हफ्ता पहले चौबेपुर स्थित उसकी चचेरी बहन के घर भेज दिया। शुक्रवार रात किशोरी ने दुपट्टे से पंखे के हुक में फंदा डालकर फांसी लगा ली। रात करीब 10 बजे परिवार के लोगों ने उसका शव लटका देखा तो किशोरी के परिजनों को सूचना दी। उधर, जानकारी पर पहुंची पुलिस ने छानबीन के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को जब पता चला कि खुदकुशी करने वाली किशोरी गैंगरेप पीड़िता थी तो चौबेपुर से रूरा तक हड़कंप मच गया।

खुदकुशी के बाद दो गिरफ्तार
सक्रिय हुई पुलिस ने शनिवार को दो आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया। कानपुर देहात के एसपी अनुराग वत्स व डीएम राकेश सिंह ने मीडिया को बताया कि 22 नवम्बर को कोर्ट में किशोरी ने सन्नी के चाचा लाला व उसके साथी रिंकू का नाम लिया था। 2 दिसम्बर को मामले को गैंगरेप की धारा में तरमीम कर दिया गया। दो आरोपित सन्नी व लाला गिरफ्तार कर लिए गए हैं। रिंकू की तलाश की जा रही है।

 परिवार को मिल रही थी धमकी
रिपोर्ट दर्ज कराने पीड़िता थाने पहुंची तो आरोपित पक्ष के लोग उसके परिवार पर दबाव बनाने लगे। कोर्ट में बयान न देने की कोशिश करते रहे। घटना से आहत पीड़िता ने जब कोर्ट में सच्चाई बताई तो आरोपितों की ओर से पीड़िता के परिवार को केस वापस न लेने पर अंजाम भुगतने की धमकी दी जाने लगी। अनहोनी की डर से परिजनों ने किशोरी को चौबेपुर भेज दिया था। पुलिस भी दबाव में आकर आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर रही थी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही और आरोपितों की धमकियों से आहत बेटी आत्महत्या को मजबूर हो गई।

सिर्फ इतना पूछती थी कि गिरफ्तारी हुई क्या…
गैंगरेप पीड़िता इतनी आहत थी कि ज्यादा बात नहीं करती थी। पिता ने बताया कि जब भी उससे फोन पर बात हुई तो वह सिर्फ इतना ही पूछती थी कि कोई पकड़ा गया कि नहीं। जवाब न में मिलने बात करना बंद कर देती थी। बेटी को काफी समझाने का प्रयास किया मगर वह गुमसुम ही रहती थी। जब उसे खाना देते तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगते। पिता ने कहा कि अगर पुलिस आरोपितों को गिरफ्तार कर लेती तो शायद बेटी की जान बच जाती।

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