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खंडहर में तब्दील हो रहे अफसरों के रात्रि भ्रमण आवास!

शासन की त्वरित न्याय दिलाने की मंशा पर फिर रहा पानी, फरियादियों को ढूंढें नहीं मिल रहे तैनाती स्थलों पर अफसर

मलिहाबाद, बीकेटी व मोहनलालगंज तहसील में करोड़ों की लागत से बनाये गये हैं आवास

लखनऊ। प्रदेश में तहसील स्तरीय अफसरों और डॉक्टरों को आवास आवंटित होने के बावजूद भी मुख्यालयों पर रात्रि निवास न करने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत दिनों कड़ी नाराजगी जताई थी। यही नहीं उन्होंने अफसरों को सख्त चेतावनी दी थी कि उपजिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, चिकित्सक सहित अन्य तहसील स्तरीय अधिकारी अपने अपने तैनाती स्थलों पर ही रात्रि विश्राम करें। ऐसा न करने वाले अफसरों के खिलाफ सख़्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। लेकिन फिर भी अधिकारी अपनी ऐशोआराम की जिंदगी में किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं आने देना चाहते हैं। इसी के चलते राजधानी लखनऊ की बख्शी का तालाब,मलिहाबाद व मोहनलालगंज तहसील परिसर सहित अन्य तहसीलों में करोड़ों की लागत से बने सरकारी आवास खंडहर में तब्दील हो रहे है। तैनाती स्थल पर रात्रि निवास न करने से फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण गुणवत्तापूर्ण होना सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है।

मालूम हो कि योगी सरकार प्रदेश में ग्राम स्वराज अभियान के तहत अधिकारियों से लेकर मंत्री तक सरकार द्वारा संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। और गांवो में रात गुजारकर जनता की जनसमस्याओं से रूबरू होकर उनको त्वरित न्याय दिलाने का काम कर रहे हैं।तो वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त आदेशों के बावजूद भी बीकेटी तहसील क्षेत्र के अधिकांश विभागों के मुखिया अपने तैनाती स्थल पर बने सरकारी आवासों में रात्रि निवास नहीं कर रहे है।जिससे एक तरफ जहां फरियादियों को त्वरित न्याय दिलाने की शासन की मंशा पर पानी फिर रहा है।वहीं करोड़ों की लागत से बने यह सरकारी आवास खंडहर में तब्दील हो रहे है।ग्रामीण क्षेत्र में तैनात अधिकारी अपने ऐशो आराम की जिंदगी में तकलीफ नजदीक नहीं आने देना चाह रहे हैं।इसी वजह से तैनाती स्थल पर बने सरकारी आवासों में अधिकारी रात्रि निवास करने से परहेज कर रहे है।उपजिलाधिकारी,तहसीलदार,नायब तहसीलदार,राजस्व निरीक्षक,पशु चिकित्सक,प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के अधीक्षक सहित लगभग उन समस्त विभागों के अधिकारी जिनको अपने तैनाती स्थल पर सरकारी आवास आवंटित हुए है।वह उन आवासों में निवास न करके राजधानी की पाश कालोनियों में निवास कर रहे है। तहसील के अधिवक्ता मन्तोष अवस्थी व बार के पूर्व अध्यक्ष रणंजय सिंह सहित कई अधिवक्ताओं ने बताया कि तहसील परिसर में ही करोड़ों खर्चकर उपजिलाधिकारी,तहसीलदार,नायब तहसीलदार,राजस्व निरीक्षकों सहित कई कर्मचारियों को तहसील परिसर में ही सरकारी आवासों की सुविधा इस लिये मुहैय्या करायी गयी थी।

तहसील स्तरीय अधिकारी इन आवासों में निवास कर क्षेत्र के फरियादियों की जनसमस्याओं का त्वरित निराकरण कर उन्हें न्याय दिलाये।उन्होंने यह भी बताया कि कई वर्षो से खाली पड़े तहसीलदार के आवास को अब जंगली कीड़ो मकोड़ो ने अपना आवास बना लिया है।जब से यह आवास बनकर तैयार हुआ है तब से आज तक किसी तहसीलदार ने इस आवास में निवास नहीं किया है जिससे इस आवास परिसर में बड़ी-बड़ी जंगली झाड़ियां उग आयी है व वहां पर लगा हैंडपंप भी खराब हो गया है। तहसील स्तरीय अधिकारियों जिनको तैनाती स्थल पर सरकारी आवास आवंटित है। उनको अपने सरकारी आवास में रात्रि निवास करने के लिए जिला प्रशासन के अफसरों द्वारा कई बार लिखित और मौखिक आदेश दिए जा चुके है। फिर भी कोई भी अधिकारी अपने सरकारी आवास में रात्रि निवास नहीं कर रहा है। तहसील के अधिवक्ताओं, क्षेत्रीय नागरिकों व जनप्रतिनिधियों ने तहसील स्तरीय सभी विभागों के अधिकारियों को तैनाती स्थल पर आवंटित सरकारी आवासों में रात्रि निवास करने के लिए मुख्य सचिव और जिला अधिकारी को निर्देशित करने की मांग की है।

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