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‘मिड-डे-मील’ में भ्रष्टाचार के कीड़े!

मरा हुआ चूहा, पाउडर वाला दूध, नमक-रोटी जैसे घटनाक्रम ने खोली इस महायोजना की पोल

नौनिहालों को बेसिक शिक्षा से अधिकाधिक जोड़ने को चल रही वृहद सरकारी योजनाओं में शुमाार

योगी सरकार ने बदली मंत्रालय की जिम्मेदारी, फिर भी प्राइमरी स्कूलों के मध्यान्ह भोजन पर दुर्व्यवस्था हावी

लखनऊ। कहते हैं जब पेट भरा होता है तो पढ़ाई-लिखाई में भी मन लगता है। देश-प्रदेश में चल रही ‘मिड-डे-मील’ यानी (मध्यान्ह भोजन) के परिप्रेक्ष्य में देखें तो संभवत: उपरोक्त उद्देश्य को लेकर ही इस महायोजना की शुरूआत की गई…ताकि समाज के विभिन्न आयाम जैसे, गांव-शहर और गली-मोहल्ला के अंतिम पंक्ति में बैठा बच्चा प्राथमिक शिक्षा लेने से महरूम न होने पाये। मंशा यही रही कि वो बच्चा, स्कूल जाने के पहले अपना पेट भरने के बारे में नहीं सोचे बल्कि बस्ता उठाये और पाठशाला की ओर कूच करे…उसे वहीं पठन-पाठन और दोपहर का भोजन मिल जाया करेगा। निश्चित तौर पर जिस किसी के भी मन-मस्तिष्क में पहली बार यह बात आयी, वो काबिले-तारीफ है…इसके बाद आई-गई विभिन्न पार्टियों की सरकारों ने भी इस योजना के संचालन को कभी बंद नहीं होने दिया। इतना ही नहीं एमडीएम स्कीम को स्कूली बच्चों के बीच आकर्षक बनाने के मद्देनजर पूरे हफ्ते का अलग-अलग खानपान मेन्यू चार्ट बनाने का भी प्लान लाया गया। अब जबकि केंद्र से लेकर प्रदेश में एक ही दल की पूर्ण बहुमत वाली सरकार काबिज है तो भी मिड डे मील योजना बदस्तूर जारी है।

मगर यूपी की बात करें तो कहीं न कहीं मिड-डे-मील में तमाम स्तर से भ्रष्टाचार के कीडेÞ पांव पसारते जा रहे हैं। आलम यह रहा कि योगी सरकार ने जब पहले कैबिनेट टीम में फेरबदल किया तो बेसिक शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी एक से हटाकर अपने दूसरे युवा जनप्रतिनिधि को सौंपी। साथ ही प्रदेश सरकार ने यह भी अपेक्षा रखी कि जमीनी स्तर पर बेसिक शिक्षा विभाग की तमाम योजनाओं की जननी मानी जाने वाली एमडीएम स्कीम का संचालन और इसकी मॉनीटरिंग ठीक-ठाक होगी। मगर नतीजा जो दिख रहा, वही ढाक के तीन पात।
हैरत की बात यह रही कि एमडीएम से जुड़ी कुछ गड़बड़ियों को लेकर जब प्रदेश सरकार के मौजूदा बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी से उनके मोबाइल नंबर पर लगातार तीन दिनों तक सम्पर्क करने की कोशिश की गयी तो हर बार उनके अलग-अलग स्टाफ ने यही कहा कि…मंत्री जी मीटिंग में या फिर किसी अहम कार्यक्रम में व्यस्त हैं।

मिड-डे-मील से जुड़ी हाल-फिलहाल की कुछ घटनाओं पर नजर डालें तो…मुजफ्फरनगर के एक प्राइमरी स्कूल के मध्यान्ह भोजन में मरा हुआ चूहा पड़ा मिला। ऐसे ही जौनपुल जिले के मछलीशहर ब्लाक के एक प्राइमरी स्कूल में पाउडर वाल 500 ग्राम दूध बनाकर 63 बच्चों को पिला दिया गया। वहीं गाजीपुर जनपद के एक प्राथमिक विद्यालय में एमडीएम के तहत बनी खिचड़ी व दूध का सेवन करने के बाद से ही पांच बच्चों की तबियत बिगड़ गई। इन सभी घटनाओं से कुछ समय पहले घटित मिर्जापुर जनपद के एक स्कूल में एमडीएम के तहत बच्चों को परोसी गई नमक-रोटी वाले घटनाक्रम ने तो मिड-डे-मील योजना की काफी किरकिरी करायी। हालांकि एमडीएम संचालन की अनियमितताओं को लेकर जब ऐसे कुछ मामले प्रकाश में आने शुरू हुए तो कहीं बेसिक शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया तो कहीं प्रिंसिपल को नोटिस जारी कर दिया गया, कहीं प्रधान व इकाई अध्यक्ष से जवाब-तलब करने की औपचारिकता पूरी की गई, तो मध्यान्य भोजन परोसने वाली कुछ संस्थाओं को ब्लैक लिस्ट में डालकर नौनिहालों के प्रति निभाये जा रहे दायित्वों की इतिश्री कर ली गई।

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