उत्तर प्रदेशहरदोई

नागरिकता बिल के विरोध में सण्डीला व बिलग्राम की जमीयत ने दिया ज्ञापन

नागरिकता बिल के विरोध में सण्डीला व बिलग्राम की जमीयत ने दिया ज्ञापन

नागरिकता बिल के विरोध में सण्डीला व बिलग्राम की जमीयत ने दिया ज्ञापन
 
बिलग्राम,सण्डीला,हरदोई।संडीला व बिलग्राम में जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से नागरिकता संशोधन बिल के विरोध में राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को दिया गया।ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार ने यह बिल लाकर भारतीय धर्मो में भेदभाव उत्पन्न करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि इस बिल से पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान में रहने वाले बौद्ध,सिक्ख, हिंदू व पारसी लोगों को भारतीय नागरिकता मिल सकेगी।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार बाहरी देश के लोगों को नागरिकता देना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार वोट बैंक की राजनीति करते हुए इस बिल को लाई है। उन्होंने राष्ट्रपति से इस बिल को वापस लेने की मांग की है। इस अवसर पर संगठन केउपाध्यक्ष मौलाना मोहम्मद फारूक मजाहरी, मीडिया इंचार्ज अब्दुल वली,जनरल सेक्रेट्री यासिर अब्दुल कयूम कासमी,सभासद हसन मक्की,मोहम्मद तोहिद मौजूद रहे। बिलग्राम नगर में नागरिकता संशोधन अधिनियम(सीएबी) के खिलाफ जमीयत उल्माये हिंद के सदस्यों एवं नगर की  तमाम जनता ने शांति पूर्ण प्रदर्शन कर अपने गुस्से का इजहार किया और भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन तहसीलदार अवनिद्र कुमार को सौंपा।शुक्रवार को नमाज़ जुमा अदा करने के बाद ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद के बाहर नगर के काफी तादाद में लोग जमीयत उल्माये हिंद के सदस्य मुस्लिम धर्म गुरूओं के साथ इकट्ठे हो गये और उन्होंने सरकार के द्वारा किए गए संविधान के नागरिक संशोधन बिल के विरोध में प्रदर्शन किया।
 ज्ञापन मे कहा, हम भारत के लोग  माननीय राष्ट्रपति से अपील करते हैं कि वे इस तरह के कानून के माध्यम से लोगों के अन्याय और सांप्रदायिकता को रोकने के लिए अपने अच्छे कार्य का उपयोग करें। आपको बता दें कि सरकार की तरफ से जिस विधेयक को सदन में पास किया गया है वह दो अहम चीज़ों पर  आधारित है- पहला, ग़ैर-मुसलमान प्रवासियों को भारतीय नागरिकता देना और दूसरा, अवैध विदेशियों की पहचान कर उन्हें वापस भेजना, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान हैं। अब इसे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी नागरिकता संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सरकार ने इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी। लिहाजा अब इस विधेयक ने कानून का रूप ले लिया है। अब देखना ये होगा कि क्या ये बिल इतने विरोध प्रदर्शनों के बावजूद लागू हो पायेगा या नहीं।
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