उत्तर प्रदेशहरदोई

वह जिसे चुनते हैं चुने जाने वाले उसे कितना सुनते हैं” लोकतंत्र की सफलता इसी में निहित- अंशुमान तिवारी

वह जिसे चुनते हैं चुने जाने वाले उसे कितना सुनते हैं" लोकतंत्र की सफलता इसी में निहित- अंशुमान तिवारी

वह जिसे चुनते हैं चुने जाने वाले उसे कितना सुनते हैं” लोकतंत्र की सफलता इसी में निहित- अंशुमान तिवारी
हरदोई- प्रतिबिंब “सांस्कृतिक एवं सामाजिक अकादमी द्वारा “भारतीय लोकतंत्र: बदलते प्रतिमान” पर बोलते हुए वरिष्ठ पत्रकार और इंडिया टुडे के संपादक अंशुमान तिवारी ने भारतीय लोकतंत्र के विभिन्न पहलुओं और उसकी बारीकियों से अवगत कराते हुए कहा कि लोकतंत्र की सफलता इस पर निर्भर करती है कि उसमें भय और अज्ञान से मुक्त होकर प्रश्न पूछने की परंपरा को हम कितना अधिक जागृत कर पाते हैं। लोकतंत्र की सफलता इस  पर निर्भर करती है कि “वह जिसे चुनते हैं चुने जाने वाले उसे कितना सुनते हैं”।श्री तिवारी पुण्य आत्मा गिरीश चंद बाजपेई स्मृति व्याख्यानमाला की चौदहवीं कड़ी में पुष्प गिरी सभागार में शनिवार को अपना व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने और स्पष्ट करते हुए कहा कि केवल चुनाव होना ही लोकतंत्र नहीं है लोक तंत्र सभी को सवाल करने का अधिकार देता है और भारतीय परंपरा में ऋषियों, राजा महाराजाओं और शासकों सबसे सवाल किए जाते रहे हैं और उनके उत्तर दिए जाते रहे हैं अब यदि लोकतंत्र में प्रश्नों से बचा जाने का प्रयास किया गया तो यह लोकतंत्र को कमजोर करेगा।उन्होंने ग्रीस जैसे देश में भी प्रश्न पूछने से बचने वाली जनता का उदाहरण देते हुए कहा यदि प्रश्न पूछने से जनता बचती है अथवा शासन सत्ता भय दिखाकर प्रश्नों का उत्तर देने से बचता है तो यह लोकतंत्र के लिए शुभ लक्षण नहीं माना जा सकता है। उन्होंने पौराणिक उदाहरणों से भी सिद्ध किया कि प्रश्न पूछना और उनका उत्तर पाना भारतीय परंपरा का अहम हिस्सा है। उन्होंने प्रश्न और उनके उत्तरों का महत्व समझाते हुए कहा कि लोकसभा और राज्यसभा के दोनों सदनों की कार्यवाही प्रश्न काल से ही शुरू होती है। कार्यक्रम का प्रारंभ पुण्यात्मा गिरीश चंद्र बाजपेई के चित्र पर पुष्पांजलि के साथ हुआ। मुख्य अतिथि श्री तिवारी को प्रतिबिंब पदाधिकारियों अरुण मिश्रा, रामबाबू शर्मा,आनंद गुप्ता तथा धर्मेंद्र गुप्ता ने माल्यार्पण किया।प्रतिबिम्ब अध्यक्ष अरुणेश बाजपेई ने श्री तिवारी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया और उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। पुण्यात्मा गिरीश चंद्र बाजपेई का परिचय डॉ आलोक टंडन ने तथा इंडिया टुडे संपादकअंशुमान तिवारी का परिचय प्रोफेसर अखिलेश बाजपेई ने किया।कार्यवाही का संचालन प्रतिबिंब सचिव अनिल श्रीवास्तव ने किया। व्याख्यान की समाप्ति रजनीश त्रिपाठी, डॉ नरेश शुक्ला, शिव शरण सिंह चौहान, भजन लाल, संदीप सिन्हा, एसएन अग्निहोत्री, रमेश चंद्र पाठक ,उमाकांत दीक्षित, ऋषि कुमार सैनी, पूर्ण कुमार गुप्ता मुख्य रूप से उपस्थित रहे और अपने विचार प्रकट किए।
इस अवसर पर छात्रवृत्ति अशोक कुमार को अध्यापक, शिक्षण संस्थाओं, में बीएड इंटर्नशिप कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए इलाहाबाद विश्वविद्यालय से किए जा रहे शोध के लिए प्रमाण पत्र और ₹10000 के दाम के रूप में प्रदान की गई।
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