नागरिकता कानून पर अमित शाह बोले, चाहे जितना विरोध हो, सरकार झुकेगी नहीं

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश के कई इलाकों में चल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्षी दलों पर लोगों को भड़काने का आरोप लगाया है। उन्होंने विपक्षी दलों के राष्ट्रपति से मुलाकात कर ऐक्ट को वापस लेने की अपील पर कहा कि मोदी सरकार इस ऐक्ट को वापस नहीं लेगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी दल जो करना चाहें कर लें, लेकिन इसे वापस नहीं लिया जाएगा। अमित शाह ने कहा कि कुछ राजनीतिक दल इस मसले पर हिंदू और मुस्लिम में भेद पैदा करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों के गलत प्रचार के चलते भ्रांति पैदा हुई है। संशोधित ऐक्ट के तहत किसी की नागरिकता वापस लेने का नहीं बल्कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आने वाले अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रस्ताव है। अमित शाह ने कहा कि नेहरू-लियाकत समझौते में कहा गया था कि दोनों देश अपने-अपने अल्पसंख्यकों की रक्षा करेंगे। लेकिन, बांग्लादेश, पाकिस्तान में ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा अफगानिस्तान समेत तीनों देशों का राजकीय धर्म इस्लाम है, ऐसे में अल्पसंख्यकों का उत्पीड़न होता है। उनके लिए कानून बनाया तो गलत क्या है।

एनआरसी लाने का काम तो कांग्रेस ने ही किया
एनआरसी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे बीजेपी नहीं बल्कि कांग्रेस ही लेकर आई थी। उन्होंने कहा कि इसके जिस क्लॉज के तहत हम एनआरसी ला रहे हैं, उसे 3 दिसंबर, 2004 में ही यूपीए लेकर आया था। मैं मानता हूं कि इसे ठीक बनाया गया। ऐसा कौन सा देश है, जिसके नागरिकों का रजिस्टर नहीं है।

विपक्ष कहे कि हर पाकिस्तानी को देंगे नागरिकता
अमित शाह ने कहा कि मेरा खुला चैलेंज है कि आप देश के आगे कहिए कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से आने वाले किसी भी व्यक्ति को हम नागरिक बनाएंगे। आधार, पहचान पत्र को नागरिकता की पहचान मानने से इनकार करते हुए शाह ने कहा कि रजिस्टर बनाना ही चाहिए। आखिर जो व्यक्ति इस देश का नागरिक है, उसे डर क्यों होना चाहिए।

आखिर जामिया के अंदर पत्थर कहां से आए?
देश के विश्वविद्यालयों में ऐक्ट का विरोध होने के सवाल पर शाह ने कहा, ‘यूनिवर्सिटीज का मतलब मुझे मालूम है। देश में 400 से ज्यादा यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन कुल 22 में ही प्रोटेस्ट है। उनमें भी सिर्फ 5 विश्वविद्यालयों में ही थोड़ा आंदोलन है। जामिया में पुलिस के घुसने पर शाह ने कहा कि आखिर पत्थर कहां से आए। विडियोग्रफी से पता चलता है कि कैसे यूनिवर्सिटी में बाहर के लोग भी घुसे थे।’

नेहरू-लियाकत समझौता फेल होने के चलते लाए ऐक्ट
शाह ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि 1950 में नेहरू-लियाकत समझौता हुआ था, जिसका एक हिस्सा एक-दूसरे देश के अल्पसंख्यकों की रक्षा करना था। इस पर बीते 70 सालों से काम नहीं किया गया क्योंकि आप (कांग्रेस) वोट बैंक बनाना चाहते थे। हमारी सरकार ने इस पैक्ट को सही ढंग से लागू किया है और लाखों लोगों को नागरिकता देने का फैसला किया है, जो बीते कई सालों से इंतजार में थे।

राजनाथ सिंह बोले, नफरत नहीं सिखाती भारतीय संस्कृति
गृह मंत्री के अलावा अमेरिका में एक कार्यक्रम में मौजूद डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने भी इस मुद्दे पर भ्रम दूर करने की कोशिश करते हुए कहा कि यह ऐक्ट मुस्लिमों के खिलाफ नहीं है। राजनाथ सिंह ने कहा, ‘हमारी संस्कृति किसी से नफरत करना नहीं सिखाती।’ नागरिकता संशोधन कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के अल्पसंख्यक हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को भारतीय नागरिकता का प्रावधान है।

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