Thursday, January 21, 2021 at 6:44 AM

‘समाधान दिवस’ पर फरियादी पस्त, अधिकारी मस्त

लखनऊ. पहले तहसील दिवस और अब सम्पूर्ण समाधान दिवस…नाम तो बदल दिया लेकिन शिकायतों के निस्तारण में अफसरों का मनमाना रवैया अभी भी बरकरार है। हालांकि, सरकार ने जो सम्पूर्ण समाधान का नीति बनायी है, उसे अगर अफसरों द्वारा अमलीजामा पहनाने में दिलचस्पी दिखाई जाये तो इस दिवस का महत्व बढ़ जाए और सरकार की मंशा भी पूरी हो सकेगी। वहीं फरियादियों को भी त्वरित न्याय मिल सकेगा। लेकिन सीएम योगी आदित्यनाथ की सख्ती के बावजूद अधिकारी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं.

न्याय की जगह मिली अधूरी जांच रिपोर्ट

राजधानी के अन्तर्गत आने वाले प्रमुख क्षेत्रों जैसे बीकेटी, सरोजनीनगर, मलिहाबाद, मोहनलालगंज व सदर तहसीलों की बात करें तो यहां पर अफसरों की अनदेखी के चलते विभिन्न गांवों से अपनी शिकायतों के निस्तारण की आस लगाए फरियादियों को उसका पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है। आलम यह है कि अफसरों का हुजूम होने के बाद भी फरियादियों को न्याय के लिए काफी दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। बावजूद इसके उन्हें न्याय के स्थान पर अधूरी जांच रिपोर्ट ही मिलती है। यहां तक कि कई प्रकरणों में तो महीनों तक जांच ही नहीं होती है। यही नहीं कई फरियादियों को तो अपनी एक ही शिकायत के निस्तारण के लिए महीनों तहसील स्तरीय अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। न्याय न मिलने से फरियादियों का भरोसा तहसील दिवस से उठता जा रहा है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री व जिला प्रशासन के आलाधिकारियों के स्पष्ट निदेर्शों के बावजूद भी मौके पर न्याय मिलने की प्रगति में कोई सुधार नहीं हो रहा है। यह स्थिति लगातार कई समाधान दिवसों में सभी पांचों तहसीलों में देखने को मिली। बीकेटी, मलिहाबाद सहित अन्य तहसीलों के विभिन्न गांवों के शिकायतकर्ताओं ने अपना दुखड़ा बयां किया।

200 बार दिया शिकायती पत्र

तहसील मुख्यालय से करीब 30 किमी दूर अल्दमपुर ग्राम पंचायत के ग्राम प्रधान अतुल कुमार शुक्ला ने बताया कि वे अल्दमपुर, उसरना गांवो के बॉर्डर पर स्थित 372 बीघे की सौतल झील पर भूमाफियाओं द्वारा किये गये अवैध कब्जों को छुड़ाकर उसको मूल स्वरूप में लाने के लिए तहसील समाधान दिवसों के साथ ही डीएम और जिले के आला अफसरों को भी लिखित शिकायती पत्र लगभग 200 बार दे चुके हैं, मगर ढुलमुल रैवये के चलते अभी तक जिले की सबसे बड़ी झील पर से अवैध कब्जा नहीं हट सका है। वहीं भारतीय किसान यूनियन धर्मेन्द्र गुट के प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता रामप्रकाश सिंह बताते हैं कि बीकेटी फलपट्टी क्षेत्र में अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को दरकिनार कर ग्राम बाबापुरवा मजरा शिवपुरी गांव में धड़ल्ले से प्लाटिंग की जा रही है। उनकी मानें तो गांव चकबंदी प्रक्रिया के दौरान ही नियम विरुद्ध तरीके से रोड बनाने, सरकारी चकरोडो व राजकीय नलकूपों की नालियां, पाइप लाइनों व हौजियो सहित अन्य कई सरकारी जमीनों पर  कब्जा करने, हरिजन आवंटन की सैकड़ों बीघा जमीनों की बंदरबाट कर दी जा रही है। उनके अनुसार तहसील समाधान दिवस में लिखित शिकायती पत्र देकर मामले की जांच करवाकर दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की थी, मगर अभी तक कोई अमल नहीं हुआ। उनका तो यह भी कहना है कि ग्राम पंचायत शिवपुरी में सिर्फ आवासीय कंपनियों को लाभ दिलाने के लिए चकबंदी कराई जा रही है।


निस्तारण की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल

बीकेटी तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता रामकुमार सिंह कहते हैं कि शिकायतकर्ता जो वास्तविक अपनी पीड़ा बताते हैं उस पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता है। निस्तारण के वक्त आखिर दोनों पक्षों को क्यों नहीं सुना जाता है। मौके पर पहुंचकर आखिर जांच क्यों नहीं होती है। अगर निस्तारण गुणवत्तापरक है तो एक ही शिकायत को  लेकर  शिकायतकर्ता बार-बार क्यों परेशान होता है। निचले स्तर के अफसर जो आख्या लगा देते हैं,  उच्चाधिकारी उस पर आंख बंदकर भरोसा कर लेते हैं।

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