अंतरराष्ट्रीय

अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है तो इसका असर पूरी दुनिया पर होगा ?

नई दिल्ली। अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के शीर्ष सैन्य अधिकारी की मौत के बाद एक बार फिर से खाड़ी देशों में तनाव बढ़ता दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान जवाबी कार्रवाई करता है तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर होगा।

अगर ऐसा होता है तो भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी बोझ बढ़ेगा। कच्चे तेल में तेजी आने से भारत का आयात बिल बढ़ेगा जो चालू खाते के घाटे को बढ़ाने का काम करेगा। ईंधन महंगा होने से ढुलाई की लागत बढ़ेगी जो रोजमार्रा की चीजों पर बोझ बढ़ाने का काम करेगी। वहीं, वैश्विक बजार में तनाव से रुपया भी टूटेगा। रुपये पर मार पड़ने से खाद्यय तेल और अन्य सामानों के आयात महंगे होंगे। विदेश में घूमना-पढ़ना महंगा होगा। कुल मिलाकर एक बार फिर से महंगाई का बोझ आम आदमी पर पड़ने की आशंका है। ऐसे में आरबीआई द्वारा आने वाले मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं बचेगी। यानी सस्ते कर्ज का तोहफा नहीं मिलेगा।

कच्चा तेल
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने बताया कि भारत अपनी जरूरत का 75 प्रतिशत कच्चा तेल सऊदी देशों से आयात करता है। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ना भारत जैसे देश के लिए बड़ी चिंता की बात है। अगर, ईरान जवाबी कर्रवाई करता है तो कच्चे तेल में भारी उछाल आने की पूरी संभावना है।

क्या होगा असर
शुक्रवार को ही ब्रेंट कच्चा तेल 4.4 प्रतिशत बढ़कर 69.16 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अगर आने वाले दिनों में कच्चा तेल 80 डॉलर के पार चला जाता है तो पेट्रोल-डीजल में बड़ा उछाल आ सकता है। पेट्रोल में करीब पांच से छह रुपये की तेजी आ सकती है। डीजल और एलपीजी खरीदना महंगा हो जाएगा।

सोना-चांदी
केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने बताया कि वैश्विक तनाव बढ़ने पर निवेशक सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी का रुख करते हैं। आने वाले तीन महीनों में सोने का भाव प्रति तोला 44 हजार रुपये और चांदी 58 हजार रुपये प्रति किलो पहुंच सकता है। सोने-चांदी की कीमत में और उछाल आने से मांग प्रभावित होगी। आम लोग चाहकर भी सोने-चांदी की खरीदारी नहीं कर पाएंगे। वहीं, बाजार में मांग कम होने से इसका कारोबार प्रभावित होगा। इससे इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को जॉब संकट का सामना करना पड़ सकता है।

रुपया
एंजेल ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट अनुज गुप्ता ने बताया कि खाड़ी देशों में तनाव बढ़ने के चलते डॉलर के मुकाबले रुपया टूटकर 74 के स्तर पर जा सकता है। यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी करेगा क्योंकि इसके कमजोर होने से आयात बिल बढ़ेगा। इससे चालू खाते का घाटा बढ़ेगा। विदेशी से आयतित होने वाली तमाम वस्तुओं की कीमतें बढेंगी। विदेश में घूमना, पढ़ान और खरीदारी करना महंगा हो जाएगा। खाद्य तेल, मोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि खरीदने के लिए अधिक कीमत चुकानी होगी।

शेयर बाजार
शेयर बाजार विशेषज्ञ रजनीश खोसला ने बताया कि अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ने से शुक्रवार को एशियाई बाजारों में चीन का शंघाई कंपोजिट, हांग कांग का हैंग सेंग और दक्षिण कोरिया का कोस्पी गिरावट में बंद हुए। यूरोपीय शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहेगा। इसमें भी आने वाले दिनों में बड़ी गिरावट की आशंका है। शेयर बाजार में गिरावट आने से देश के साथ विदेशी निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना होगा। शेयर बाजार अर्थव्यवस्था में तेजी का संकेत देता है। अगर बाजार में गिरावट आएगी तो निवेशकों को भरोसा टूटेगा। यह आर्थिक सुस्ती से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सही नहीं होगा।

शुक्रवार को ही ब्रेंट कच्चा तेल 4.4 प्रतिशत बढ़कर 69.16 डॉलर प्रति बैरल जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट कच्चा तेल 4.3 प्रतिशत उछलकर 63.84 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अगर, आने वाले दिनों में कच्चा तेल में उछाल आता है तो भारत में पेट्रोल-डीजल और एलपीजी महंगा हो जाएगा। वहीं, सुरक्षित निवेश के लिए सोने-चांदी की मांग बढ़ेगी। इससे इनकी कीमतें नई ऊंचाई पर पहुंच जाएगी। वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ाने से शेयर बाजार में गिरावट आएगी। डॉलर के मुकाबले रुपया पर भी गिरेगा। कुल मिलाकर एक बार फिर से महंगाई का बोझ आम आदमी पर पड़ने की आशंका है। ऐसे में आरबीआई द्वारा आने वाले मौद्रिक समीक्षा में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद नहीं बचेगी। यानी सस्ते कर्ज का तोहफा नहीं मिलेगा।

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