शिक्षा—रोजगार

मोदी सरकार की दूसरी पारी में भी उबल रहे विश्वविद्यालय ?

नई दिल्ली। मोदी सरकार के लिए दोनों ही कार्यकाल में विश्वविद्यालय प्रबंधन बड़ा सिरदर्द साबित हुआ। पहले कार्यकाल में हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या से दूसरे कार्यकाल में जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में हिंसा तक।

पहले कार्यकाल में हैदराबाद, इलाहबाद, जेएनयू और जाधवपुर विश्वविद्यालय में उपजे विवाद को खत्म करने के लिए मोदी सरकार को मशक्कत करनी पड़ी तो दूसरी कार्यकाल में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय के बाद अब जेएनयू विश्वविद्यालय की घटना ने मोदी सरकार के सामने चुनौती खड़ी की है। दूसरे कार्यकाल में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक मुस्लिम युवक को संस्कृत विभाग में प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के विरोध ने दुनिया का ध्यान खींचा था।

पहले कार्यकाल में मोदी सरकार रोहित वेमुला आत्महत्या मामले में बुरी तरह उलझ गई थी। पूरे मामले के दलित राजनीति से जुड़ जाने से सरकार को बड़ी परेशानी झेलनी पड़ी। इसके बाद जेएनयू में कथित देशविरोधी नारे के बाद छात्र नेताओं की गिरफ्तारी के मामले में भी देश की राजनीति में उबाल आया।

हालांकि पहले कार्यकाल में मोदी सरकार को इन मुद्दों पर स्थिति संभालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी। वेमुला की आत्महत्या मामले में तो खुद पीएम मोदी को बीच बचाव में उतरना पड़ा। तब कहा गया कि इसी मामले के कारण तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के विभाग में बदलाव किया गया।

अब मोदी सरकार दूसरे कार्यकाल के शुरुआत में ही विश्वविद्यालयों में प्रबंधन की कमी का सिरदर्द झेल रही है। इस कार्यकाल में पहले एएमयू में बवाल हुआ तो सीएए के खिलाफ आंदोलन मामले में जामिया में पुलिस के बल पर भी सवाल खड़े हुए।

सरकार अभी इन मामले को थामने में ही जुटी थी कि फीस बढ़ोत्तरी के मुद्दे पर पहले से आंदोलनरत जेएनयू में रविवार देर शाम हुई भीषण हिंसा ने सरकार की सिरदर्दी और बढ़ा दी। पहले कार्यकाल की तरह ही एकजुट विपक्ष इस मामले में सरकार को निशाने पर ले रहा है तो राजग के सहयोगी दल भी असहज हैं। जदयू ने इस घटना पर न सिर्फ खुल की चिंता जताई है, बल्कि पुलिस और विश्वविद्यालय के कुलपति के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

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