Saturday, March 6, 2021 at 12:11 AM

सुरक्षित मातृत्व सेवा प्रदान करने को आगे आयी ‘फॉगसी’ संस्था की ‘मान्यता’

नई दिल्ली। अच्छी तरह प्रशिक्षित और सशक्त नर्सें गर्भावस्था से सम्बंधित जटिलताओं के उपचार और समयबद्ध प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। निजी मातृत्व सुरक्षा में कुशलता लाने के लिये एफओजीएसआई ने ‘मान्यता’ नामक एक पहल शुरू की है, जो सुनिश्चित करती है कि महिलाओं को प्रसव के दौरान और तुरंत बाद सुरक्षित और सम्मानजनक देखभाल मिले।

उत्तर प्रदेश में लगभग 34 प्रतिशत संस्थागत प्रसूतियाँ (डिलीवरीज) निजी मातृत्व सुविधाओं में होती हैं। इसलिये, ऐसे राज्य के निजी अस्पतालों की नर्सों और कर्मचारियों की कुशलता पर ध्यान देना बहुत जरूरी है, जहाँ बच्चे के जन्म के दौरान प्रमाण-आधारित गुणवत्तापूर्ण देखभाल के मानकों का अनुपालन एक चुनौती है। यह खासतौर से इसलिये महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाल ही में जारी 2015-17 का सैम्पल रजिस्ट्रेशन सर्वे (एसआरएस) मैटरनल मोर्टेलिटी बुलेटिन बताता है कि उत्तर प्रदेश में मातृत्व मृत्यु अनुपात (एमएमआर) वर्ष 2014-16 के 201 से बढ़कर 216 हो गया है, जबकि राष्ट्रीय औसत 130 से 6 प्रतिशत कम होकर 122 पर आ गया है।

भारत में इस अंतर को देखते हुए, फॉगसी (फेडरेशन ऑफ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनीकोलॉजिकल सोसायटीज ऑफ इंडिया) ने मान्यता को लॉन्च किया, जो निजी मातृत्व स्वास्थ्यरक्षा क्षेत्र के लिये गुणवत्ता सुधार एवं प्रमाणन की पहल है। इस पहल के तहत निजी मातृत्व सुविधाओं के डॉक्टरों और कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार गुणवत्ता और सुविधा मानकों तथा प्रसव-पूर्व, प्रसव के दौरान और बाद के लिये राष्ट्रीय मानकों के अनुसार काम करें।

लखनऊ की जानी-मानी प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीति कुमार समझाते हुए कहती हैं, ‘‘बच्चे के जन्म के दौरान और बाद में उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के कारण सैकड़ों माताएं मर जाती हैं, जिसका कारण कुशल कर्मचारियों का अभाव और गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की अनुपलब्धता है। कुशल कर्मचारियों तक सीमित पहुँच, खासकर शहरों के समीपवर्ती क्षेत्रों में, इस राज्य में गुणवत्तापूर्ण प्रसव देखभाल प्रदान करने में गंभीर चुनौती है।’’

डॉ. प्रीति ने आगे कहा, ‘‘गुणवत्तापूर्ण सेवाएं सुनिश्चित करने के लिये मान्यता जरूरी है। इसमें एक तकनीक के तौर पर स्किल-ड्रिल्स का उपयोग किया जाता है, ताकि अस्पताल में गुणवत्ता का लगातार सुधार हो। ऐसे व्यवहारिक प्रशिक्षण से टीमवर्क, संवाद, आत्मविश्वास और कुशलता की क्षमता बढ़ती है, ताकि जटिलताओं और इमरजेंसी को मैनेज करने में कठिनाई न हो।’’

इसकी शुरूआत से अब तक 230 से अधिक अस्पताल यह प्रमाणपत्र ले चुके हैं या उत्तर प्रदेश के 23 जिलों में गुणवत्ता सुधार प्रशिक्षण से गुजर रहे हैं। राज्य के मान्यता-प्रमाणित अस्पतालों की डॉक्टरों और नर्सों ने लगभग 33,372 सुरक्षित डिलीवरीज कराई हैं।

आगरा के एक प्रतिष्ठित प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा कहते हैं, ‘‘मेरे अस्पताल ने इस प्रोग्राम में शामिल होने के तीन माह के भीतर एनएबीएच एंट्री-लेवल प्रमाणन की योग्यता अर्जित कर ली, जो इससे पहले कई प्रयासों के बावजूद संभव नहीं हुआ था।’’ नेशनल एक्रेडिटैशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स एंड हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (एनएबीएच) निजी अस्पतालों के लिये सबसे वांछित प्रमाणनों में से एक है, जो बीमा और अन्य तृतीय पक्षों द्वारा मनोनयन की वस्तुनिष्ठ प्रणाली प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा, ‘‘एनएबीएच प्रतिष्ठित है, लेकिन यह हमारे कर्मचारियों को किसी तरह का प्रशिक्षण नहीं देता है। इस स्थिति में हमें मान्यता से मदद मिलती है।’’

डॉ. प्रीति और डॉ. मल्होत्रा ने अस्पतालों को गुणवत्तापूर्ण देखभाल पर जागरूक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है और वे राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों को साझा कर रहे हैं। यह पहल राष्ट्रीय मातृत्व स्वास्थ्य की प्राथमिकताओं की पूरक है और इसका लक्ष्य निम्न आय वाले समुदायों को प्रमाणित मातृत्व सुरक्षा सेवाओं तक पहुँच देना है। एफओजीएसआई की योजना हर जिले के और अधिक निजी अस्पतालों को अपनी छत्रछाया में लाने और उत्तर प्रदेश को महिलाओं की प्रसूति के लिये अधिक सुरक्षित राज्य बनने में मदद करने की है।’

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