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अखिलेश: नौजवानों के भविष्य से खेल रही भाजपा, देश में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि भारत की आबादी में 65 प्रतिशत युवा हैं। भाजपा इन नौजवानों के भविष्य के प्रति तनिक भी चिंता नहीं कर रही है।

आजादी के बाद देश में बेरोजगारी की दर सबसे ज्यादा आंकी गई है। सरकार की नोटबंदी और जीएसटी के लागू होने के बाद उद्योगधंधे बंद हो गए हैं और तमाम व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कर्मचारियों की छंटनी होने लगी है। जैसा कि भाजपा का चरित्र है वह नौजवानों का ध्यान शिक्षा संस्थानों में बढ़ती फीस और अव्यवस्था, बेरोजगारी, मंहगाई और दूसरे बुनियादी मुद्दों से भटकाने के लिए युवा महोत्सव के नाम पर खेल तमाशे आयोजित कर लेती है।

स्वामी विवेकानन्द, जिनकी जयंती पर यह उत्सव मनाया जाता है, नौजवानों को धर्मान्धता, जातीयता और साम्प्रदायिकता की खिलाफत का संकल्प दिलाते थे। वे अज्ञान और भूख को दूर करने के साथ ही इस बात पर बल देते थे कि अंधविश्वास मनुष्य का शत्रु है, पर धर्मान्धता उससे भी बढ़कर है। हमें संकीर्ण सीमा के बाहर जाना होगा अन्यथा हमें पतन की दशा में सड़कर मरना होगा। इसके सिवा दूसरा रास्ता नहीं। वे मानते थे देश की अवनति और पतन का मुख्य कारण जातिप्रथा है।

भाजपा नेतृत्व जातीयता, धर्मान्धता और साम्प्रदायिकता के ही सहारे अपनी राजनीति करती है। उसकी नीति नफरत और समाज को बांटने की है। अभी सीएए के माध्यम से उसने साम्प्रदायिक ताकतों को उभरने का मौका दिया है, जिसका देश भर में विरोध हो रहा है। समाजवादी पार्टी मानती है कि अंधेरे को अंधेरा खत्म नहीं कर सकता है। इसीलिए पार्टी की मांग है कि जाति की भी गणना हो। जाति के आंकड़े आ जाएंगे तो धर्म की लड़ाई खत्म हो जाएगी और विकास का रास्ता खुल सकेगा। आज भारत के पिछड़ेपन के बीच जाति का ही रोड़ा है। समाजवादी पार्टी के प्रेरणापुरूष डॉ० राममनोहर लोहिया और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का भी यही मत था कि जातिप्रथा से गुलामी पैदा हुई। इसने समाज को बांटकर देश की प्रगति में अवरोध पैदा कर दिया है।

भाजपा ने नौजवानों से नौकरियां देने, कौशल प्रशिक्षण और शैक्षणिक सुधार का वादा किया था, ये वादे वादे ही बने रहे। विकास में उनकी भागीदारी का कोई प्रबंधन सामने नहीं आया है। वस्तुत: नौजवान में जोखिम उठाने का साहस होता है। सरकार को नौजवानों के भविष्य को लेकर योजनाएं बनानी चाहिए, जिससे उन्हें आगे बढऩे का अवसर मिल सके। समाजवादी पार्टी ने छात्र-छात्राओं को लैपटॉप बांटकर उन्हें आगे बढऩे का मौका दिया था।

भाजपा ने भी वादा किया पर वादा निभाया नहीं। स्वामी विवेकानन्द युवा इंटरनेट योजना के नाम पर युवाओं के कालेज में दाखिला लेने पर प्रतिमाह 1 जीबी इंटरनेट मुफ्त देने का वादा था, उसे भाजपा कैसे भूल गई? स्वामी विवेकानन्द पर यह धोखाधड़ी नहीं तो क्या है? भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में उत्तर प्रदेश में स्थापित हर उद्योग में 90 नौकरियां युवाओं के लिए आरक्षित किए जाने का वादा किया था। उसका क्या हुआ? भाजपा की डबल इंजन सरकारें कहने और दिखावे के लिए हैं। युवाओं को ठगने के अलावा उसने और क्या किया है?

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