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असम में गैर-कानूनी घोषित किए गए 18 लाख लोग कहां जाएंगे : कैप्टन अमरिंदर सिंह

चंडीगढ़। विधानसभा में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अकाली दल को घेरते हुए कहा ‘भारत में जो हो रहा है, वह देश के लिए ठीक नहीं है।’ उन्होंने कहा कि लोग देख और समझ सकते हैं और बिना किसी उकसाहट के अपने आप विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। अकालियों से राजनीति से ऊपर उठने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वोट डालने से पहले अपने देश के बारे में सोच लेना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने सवाल किया, ‘वह लोग कहां जाएंगे जिन्हें आप गैर-नागरिक मानते हो? असम में गैर-कानूनी घोषित किए गए 18 लाख लोग कहां जाएंगे, अगर उन्हें किसी अन्य देश ने पनाह देने से मना कर दिया? क्या इस बारे में किसी ने सोचा है? क्या गृह मंत्री ने कभी सोचा है कि तथाकथित गैर -कानूनी लोगों के साथ क्या करना है? गरीब लोग जन्म प्रमाण पत्र कहां से लेंगे?’ उन्होंने भारतीय सेना के सिपाही अब्दुल हमीद की मिसाल दी, जिसे 1965 में भारत-पाकिस्तान जंग में दिखाई बहादुरी के बदले मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

उन्होंने कहा कि अंडमान की सेलुलर जेल में मुसलमानों की बड़ी संख्या थी। कैप्टन ने कहा, ‘मुसलमानों को क्यों बाहर रखा गया?’ केंद्र ने सीएए में यहूदियों को क्यों नहीं शामिल किया? उन्होंने कहा कि भारत में जनरल जैकब के तौर पर यहूदी राज्यपाल रहे हैं, जिन्होंने देश के लिए 1971 की जंग लड़ी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस स्थिति के लिए जिम्मेदार लोगों को अपने आप पर शर्मिंदा होना चाहिए। उन्होंने अकाली दल पर बरसते हुए कहा कि उन्होंने संसद में तो इस बिल की हिमायत कर दी और फिर अपने राजसी एजेंडे को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग विचार प्रकट करने लगे। उन्होंने अकालियों से कहा, ‘आपको शर्म आनी चाहिए और आप एक दिन पछताओगे।’

हिटलर की पुस्तक मीन काम्फ का पंजाबी में अनुवाद करवाकर विपक्ष को देंगे कैप्टन
सदन में सीएए पर लाए गए प्रस्ताव पर अपने विचार रखते हुए मुख्यमंत्री ने इसे एक दुखांत करार दिया और कहा कि यह उनकी बदकिस्मती है कि अपने जीवन में ऐसा दिन देखना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री ने दुख जाहिर करते हुए कहा, ‘साल 1930 में जो कुछ हिटलर के नेतृत्व में जर्मनी में घटा था, वही कुछ अब भारत में घट रहा है।’

कैप्टन ने कहा कि उस समय भी जर्मनी के लोगों ने आवाज नहीं उठाई थी और बाद में उन्हें पछतावा हुआ था। लेकिन हमें अब आवाज बुलंद करनी चाहिए, ताकि बाद में पछताना न हो। उन्होंने विपक्ष खासकर अकालियों को अडोल्फ हिटलर की मीन काम्फ को पढ़ने की अपील की ताकि सीएए के खतरों को समझा जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह इस किताब का अनुवाद करवाकर बांटेंगे ताकि वह सभी हिटलर द्वारा की गईं ऐतिहासिक गलतियों के बारे में जान सकें।

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