धर्म - अध्यात्म

पिता की सेवा से मिलती है सूर्य की कृपा


जो बुजुर्गों को सताता है उसे भी शनि का प्रकोप झेलना पड़ता है । इसलिए शनि को प्रसन्न करने के लिए एक उपाय यह भी बताया जाता है कि आप बुजुर्गों की सहायता करें। शनिवार के दिन किसी बुजुर्ग को धन, अन्न या किसी अन्य चीज का दान करें।
जिसका शनि ठीक स्थिति में नहीं होता है उसे प्रसन्न्न करने के लिए बाकी उपायों के साथ किसी बुजुर्ग की सहायता भी करनी चाहिए। दरअसल इंसान की उम्र के अनुसार भी ग्रहों का प्रभाव पड़ता हैं। जैसे बच्चा जब शिशुवस्था में होता है उस पर चंद्रमा का प्रभाव पड़ता है। युवावस्था पर बुध का प्रभाव पड़ता है।

वृद्घावस्था में इंसान शनि के प्रभाव में आ जाता है। इसी कारण से जो व्यक्ति किसी वृद्घ को सताता है उसे शनि का प्रकोप झेलना पड़ता है। रिश्तों के प्रति भी किसी व्यक्ति का अपनापन या दुराभाव उसे ग्रहों के सुखद और दुखद परिणामों के भोगने का कारण बनता है। इसलिए व्यक्ति को अपने रिश्तों के प्रति भी सजग रहने की आवश्यकता है। अगर वह मां-बाप या अन्य रिश्तों को अपनी जिंदगी में अहमियत नहीं देता उसे ग्रहों के कुप्रभावों को झेलना पड़ता है। यदि किसी को सूर्य की कृपा प्राप्त करनी है तो उसे अपने पिता का सम्मान और सेवा करनी चाहिए।

पिता की प्रसन्नता से सूर्य की प्रसन्न्नता प्राप्त होती है। पिता को तिरष्कृत कर अगर आप सूर्य को प्रसन्न करना चाहे जितन ही बड़ा माणिक्य क्यों ही न धारण कर ले आपको सूर्य की कृपा कभी नहीं मिलेगी। इसी प्रकार चंद्रमा को प्रसन्न करने के लिए माता की प्रसन्न्ता आवश्यक है। जो व्यक्ति अपनी माता की सेवा करता है उसे चंद्रमा के कारण दुख का भोग नहीं करना पड़ेगा। इसी प्रकार जो व्यक्ति अपने नौकर -चाकरों का ख्याल नहीं रखता है उन्हें बात-बात पर प्रताडि़त करता है उसे शनि का प्रकोप झेलना पड़ता है।

इसलिए शनि को प्रसन्न करने के लिए अपने नौकरों -चाकरों की संतुष्टिï आवश्यक है। अपने गुरू, अध्यापक या किसी विद्घान को प्रसन्न करके आप बृहस्पति की कृपा पा सकते हैं। जो काम पुखराज करेगा उसे कहीं अधिक काम अपने गुरू की सेवा कर सकती है या अध्यापकों का आशीर्वाद काम कर सकता है। पत्नी को दुखी कर कोई व्यक्ति शुक्र की कृपा नहीं पा सकता है। इसलिए हीरा पहनने से बेहतर है की आप अपनी पत्नी को खुशियां दें। रिश्तों की महत्ता केवल इसीलिए नहीं वे केवल रिश्तेभर हैं। बल्कि उनका संबंध आपके ग्रहों से भी हैं। आप अपनों को सताकर कहीं भी खुश नहीं सकते है।

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