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सोशल मीडिया के लिये गाइड लाइन तैयार करने में जुटी सरकार, देना है सुप्रीम कोर्ट का जवाब

नई दिल्ली। केंद्र सरकार सोशल मीडिया को रेगुलेट करने को लेकर दिशा-निर्देश बनाने में जुट गई है। इसके लिए सूचना और प्रसारण, आईटी, कानून और गृह मंत्रालय बहुत तेजी से काम कर रहे हैं। जनवरी के अंतिम सप्ताह तक यह गाइडलाइन फाइनल हो जाएगी, क्यों कि अंतिम सप्ताह में ही सुप्रीम कोर्ट को बताना है कि अब तक क्या हुआ। इसकी मदद से सोशल मीडिया पर भ्रामक, भावनाओं को भड़काने वाली, राष्ट्र विरोधी, झूठी खबरों को रोकने के लिए नियमों की दशा और दिशा तय की जा सकेगी।

दरअसल सोशल मीडिया के नियम और गाइडलाइन के चारो मंत्रालयों की भूमिका अहम है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो अभी प्लेटफार्म अपने स्तर पर ही पोस्ट की निगेहबानी करते हैं। चुनाव आयोग के आग्रह के बाद आदर्श चुनाव आचार संहिता के तहत सोशल मीडिया प्लेटफार्म ने स्वयं अपने लिए नियमों की व्याख्या कर रखी है। केंद्र ने 2012 में सोशल मीडिया को लेकर एक गाइड लाइन तो तैयार की थी लेकिन उसके लागू करने के मसौदे पर कभी फैसला नहीं हो पाया है। जबकि पिछले आठ सालों में सोशल मीडिया देश की रोजमर्रा की जिदंगी में घर कर गया है।

सोशल मीडिया का दायरा और प्रभाव कई गुना बढ़ गया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से सोशल मीडिया पर लगातार हेटस्पीच, फेक न्यूज, अपमानित करने वाली पोस्ट और देश की एकता को ठेस पहुंचाने वाली गतिविधियों पर नजर रखने के लिए गाइडलाइन या दिशा-निर्देश को लेकर जवाब मांगा था। न्यायालय ने सरकार से पूछा था कि वह सोशल मीडिया को नियमित करने के लिए क्या कर रही हैं।

गत 22 अक्टूबर को सोशल मीडिया से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर कहा गया था कि वह 15 जनवरी तक सोशल मीडिया को लेकर नियमावली या गाइडलाइंस तैयार कर लेगी। हालांकि इसी बीच सुप्रीमकोर्ट ने फेसबुक, वॉटसअप, इस्टाग्राम सहित तमाम सोशल मीडिया प्लेटफार्म को लेकर तमिलनाडु, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, मुंबई हाईकोर्ट में चल रहे मामलों का संज्ञान लेते हुए सभी मामलों को अपने दायरे में कर लिया था। इसके लिए जनवरी के आखिरी हफ्ते में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी होनी है। इसलिए सरकार सुनवाई से पहले सोशल मीडिया के लिए नियम बनाने की कवायद में जुटी है।

इसके अलावा वरिष्ट अधिकारी ने कहा देश में बाकी सभी मीडिया माध्यमों को लेकर नियमावली और प्रसारण मानक हैं। ऐसे में सोशल मीडिया के लिए भी नियमों का तंत्र विकसित होना चाहिए। केंद्र सरकार दिशा-निर्देशों को तय करने में सोशल मीडिया को लेकर संसद में पेश होने के बाद प्रवर समिति के पास पड़े डेटा प्रोटेक्शन बिल के प्रावधानों से भी सहायता ले रही है।

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