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साईं बाबा के जन्म स्थान पर उद्धव उवाच से सिहरी शिर्डी!

साईं भक्तों की आस्था में उबाल! किया दावा : बाबा ने जन्म स्थान बताया ही नहीं! फिर भी पाथरी में बना है साईं का मंदिर। तमाम भक्त मानते हैं इसे जन्मस्थान! चर्चा यह भी कहीं शिर्डी में होने वाली करोड़ों की कमाई तो नहीं है लक्ष्य? या फिर महाराष्ट्र की समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने का है तरीका!

कृष्ण कुमार द्विवेदी (राजू भैया)
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के द्वारा पाथरी को साईं बाबा का जन्म स्थान बताने एवं वहां के लिए विकास पैकेज देने की घोषणा के बाद शिर्डी सिहर उठी है। शिर्डी के लोग आंदोलन की राह पर है! जबकि इसी के साथ बाबा जी के जन्म स्थान को लेकर चर्चाओं का दौर भी तेज हो गया है। उधर दूसरी ओर यह भी है कि कहीं शिर्डी में हर वर्ष होने वाली करोड़ों की कमाई पर कोई लक्ष्य तो नहीं साधा जा रहा ? फिलहाल भाजपा शिर्डी में स्थानीय निवासियों के साथ खड़ी नजर आ रही है।

साईं बाबा को उनके भक्त व अन्य लोग शिरडी वाले साईं बाबा के नाम से विधिवत जानते हैं। लगभग साईं बाबा का नाम सुनने भर से लोगों की जुबां पर शिर्डी का नाम आ जाता है। लेकिन इस समय शिर्डी आंदोलनरत है, तनाव में है, तो साथ में सदमे में भी । हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने जिला परभणी के पाथरी को साईं बाबा का जन्म स्थान बताया और वहां के विकास के लिए सौ करोड़ रुपए के पैकेज की घोषणा की। इसे सुनते ही शिर्डी सिहर उठी। शिर्डी के लोग इसके विरोध में उतर आए। रणनीति बनी, बैठकें हुई और फिर रविवार से बाजार तथा अन्य तमाम उपक्रम विरोध स्वरूप बंद हो गए? वैसे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने इस बीच शिर्डी वासियों को बातचीत का न्योता भी दिया।

शिर्डी के लोगों का कहना है कि साईं बाबा के जन्म स्थान के बारे में कोई कुछ नहीं कह सकता! क्योंकि बाबा जी ने कभी अपने जन्मस्थान के बारे में बताया ही नहीं। हां उनकी मृत्यु सन 1918 अक्टूबर को हुई ।यह जरूर सही है ।उधर दूसरी ओर पाथरी को साईं बाबा का जन्म स्थान मानने वाले साईं भक्त कहते हैं कि बाबा का जन्म यही पाथरी में 1935 1938 के बीच में हुआ था? मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की घोषणा के बाद शिरडी गुस्से में है! जबकि वर्ष 2018 में पाथरी गए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने साईं समाधि शताब्दी समारोह में कहा था कि पाथरी बाबा का जन्म स्थान है यहां का विकास जरूरी है ।खैर तब इस पर ज्यादा हल्ला नहीं बचा था ।लेकिन वर्तमान में उद्धव उवाच के बाद पूरे देश में साईं भक्तों में बेचैनी व तनातनी का माहौल है।

साईं मंदिर शिरडी में प्रतिदिन औसतन 80 लाख रुपए तक का चढ़ावा चढ़ता है !यही नहीं यदि वर्ष 2019 के चढ़ावे की बात की जाए तो यहां पर 287 करोड रुपए का चढ़ावा आया ! यही नहीं मंदिर में 19 किलो सोना एवं 392 किलो चांदी भी भक्तों के द्वारा चढ़ाई गई है? जानकारी यह भी मिली है कि वर्ष 2018 में 285 करोड रुपए का चढ़ावा मंदिर में आया था? इसके अलावा चर्चा के मुताबिक लगभग 15 करोड रुपए से ज्यादा रुपया फिक्स डिपाजिट भी है? एक तथ्य यह भी उभरकर सामने आ रहा है कि कहीं शिर्डी में होने वाली कमाई को लक्ष्य बनाकर कोई नया कदम तो नहीं चला जा रहा? शिर्डी वासी इससे काफी आक्रोशित है।

श्री साईं बाबा ट्रस्ट संस्थान के अधिकारी दीपक मुदकर मंगलीकर कहते हैं कि कमाई कोई मुद्दा नहीं है। सवाल हमारी आस्था का है। दुनिया जानती है साईं बाबा की कर्मभूमि शिर्डी है। सवाल शिर्डी के स्वाभिमान का है। शिरडी की जनता का कहना है कि उन्हें पाथरी के विकास से भी कोई परेशानी नहीं है। बस परेशानी यह है कि पथरी को बाबा का जन्म स्थान बताया जा रहा है! जबकि बाबा जी ने जीवित रहते हुए अपने किसी भी भक्त को अपना जन्म स्थान बताया ही नहीं?

शिर्डी में आज 19 जनवरी को बंद का आवाहन है। भक्तों के लिए बाबा जी का मंदिर खुला है। लेकिन बाकि सुविधाएं नदारद है। जिसको लेकर भक्तजन भी परेशान हैं ।सनद हो कि शंकराचार्य स्वरूपानंद ने भी अभी कुछ माह पहले साईं बाबा को मुस्लिम करार दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि हिंदुओं को शिरडी जाने से बचना चाहिए। लेकिन आस्था का महत्व व्यक्ति के जीवन में बहुत बड़ा होता है इसका कोई बड़ा असर हिंदू वर्ग पर नहीं पड़ा। शिर्डी क्षेत्र से भाजपा के विधायक राधाकृष्ण विखे पाटील शिर्डी बंद का खुलकर समर्थन करते हैं। साईं बाबा के भक्त उनकी भक्ति को भक्ति योग, कर्म योग, ज्ञान योग एवं सूफीवाद के माध्यम से करते हैं। माना जाता है कि शिर्डी में साईं बाबा को 18 सौ 54 के आसपास देखा गया था !वैसे तो साईं बाबा को लेकर तमाम पुस्तकें लिखी गई हैं। लेकिन श्री गोविंदराव रघुनाथ दाभोलकर के द्वारा लिखित श्री साईं सच्चरित्र को काफी प्रासंगिक माना जाता है। इस किताब को दाभोलकर ने साईं बाबा के साथ रहते हुए 1910 से 1918 के बीच लिखा था ऐसा माना जाता है!

पाथरी से लेकर शिरडी तक विचारों के तूफान नजर आ रहे हैं। तो इसका असर देश एवं विदेशों में रहने वाले उन तमाम साईं भक्तों पर भी दिख रहा है जो शिरडी वाले साईं बाबा से जुड़े हुए हैं। एनसीपी के नेता अब्दुल्ला खान दुर्रानी का दावा है कि इसके पर्याप्त सबूत हैं कि साईं बाबा का जन्म पाथरी में हुआ था। शिर्डी के लोग यह सोच रहे हैं कि जब पाथरी के साईं मंदिर का विकास होगा तब शिर्डी में कमाई के रास्ते सीमित हो जाएंगे यही वजह है कि शिर्डी के लोग इसका विरोध कर रहे हैं। जबकि शिर्डी के लोग इसे नकारते हैं ।फिलहाल कुछ भी हो लेकिन यह तय है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के द्वारा साईं बाबा के जन्म स्थान के विकास को लेकर कही गई बात के बाद महाराष्ट्र में बवाल व तनाव का माहौल तो है ही? खास बात यह है कि भाजपा यहां शिर्डी वासियों के साथ खड़ी नजर आ रही है। वहीं कुछ लोगों का दावा है कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे राज्य की बड़ी समस्याओं से जनता का ध्यान हटाने के लिए यह मुद्दा लेकर सामने आए हैं। फिलहाल शिर्डी में बंद से जीवन अस्त-व्यस्त है!

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